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सहजन भारत में ही नहीं, विदेशों में भी क्यों हो रहा लोकप्रिय? जानिए इसकी खास वजह

Neelam Saini 2026-08-27 17:15:04
सहजन भारत में ही नहीं, विदेशों में भी क्यों हो रहा लोकप्रिय? जानिए इसकी खास वजह
सहजन भारत में ही नहीं, विदेशों में भी क्यों हो रहा लोकप्रिय? जानिए इसकी खास वजह

भारत में सहजन कोई नया नाम नहीं है। गांवों और कस्बों की रसोई में इसकी फलियों की सब्जी और सांभर लंबे समय से भोजन का हिस्सा रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सहजन की पहचान सिर्फ एक पारंपरिक सब्जी तक सीमित नहीं रही। इसकी पत्तियों का पाउडर, बीज से बनने वाला तेल और दूसरे मूल्यवर्धित उत्पाद अब अलग-अलग देशों में खाद्य, पोषण और कॉस्मेटिक उद्योगों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। शोध समीक्षाओं में भी सहजन की पत्तियों और बीजों के पोषण तथा खाद्य उद्योग में संभावित उपयोग पर बढ़ते शोध का उल्लेख मिलता है। सहजन को वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा से जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि पेड़ के कई हिस्सों का उपयोग किया जा सकता है। फलियां भोजन में इस्तेमाल होती हैं, पत्तियों को सब्जी या पाउडर के रूप में लिया जा सकता है और बीजों से तेल निकाला जाता है। यही बहुउपयोगिता इसे दूसरे कई पौधों से अलग बनाती है।

विदेशों में क्यों बढ़ रही है सहजन की दिलचस्पी?

सहजन की वैश्विक लोकप्रियता के पीछे एक बड़ी वजह इसका पोषण संबंधी प्रोफाइल है। वैज्ञानिक समीक्षाओं के अनुसार इसकी पत्तियों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन और विभिन्न जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। इनमें पॉलीफेनॉल, फ्लेवोनॉयड और दूसरे फाइटोकेमिकल्स शामिल हैं। यही कारण है कि खाद्य उद्योग में सहजन की पत्तियों को केवल पारंपरिक सब्जी के तौर पर नहीं, बल्कि खाद्य सामग्री के रूप में भी देखा जा रहा है। हालिया समीक्षा में सहजन की पत्तियों के इस्तेमाल से ब्रेड, दही, बिस्किट, केक और पेय पदार्थ जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित किए जाने का उल्लेख किया गया है। 

पत्तियों का पाउडर बना आसान विकल्प

ताजा पत्तियों की तुलना में सूखे पत्तों का पाउडर लंबे समय तक रखा और विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलाया जा सकता है। यही वजह है कि विदेशों में मोरिंगा पाउडर को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है।पाउडर को सूप, पेय, आटे या दूसरे खाद्य उत्पादों में मिलाने की संभावनाओं पर भी काम हुआ है। खाद्य विज्ञान से जुड़ी समीक्षाओं में सहजन की पत्तियों को भविष्य के लिए एक संभावित खाद्य सामग्री के तौर पर देखा गया है। हालांकि यहां एक जरूरी सावधानी भी है। किसी खाद्य पदार्थ में पोषक तत्व मौजूद होने का मतलब यह नहीं कि वह किसी बीमारी का इलाज कर सकता है। सहजन से जुड़े कई स्वास्थ्य दावों पर प्रयोगशाला और पशु-अध्ययन उपलब्ध हैं, लेकिन हर दावे के लिए मजबूत मानव-आधारित चिकित्सकीय प्रमाण उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। 2025 की समीक्षा ने भी सहजन के जैव सक्रिय घटकों की जैवउपलब्धता और सुरक्षा पर आगे शोध की जरूरत बताई है। 

सूखे और गर्म इलाकों के लिए उपयोगी पौधा

सहजन की दूसरी बड़ी खासियत इसकी खेती से जुड़ी है। यह उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में अच्छी तरह विकसित हो सकता है और सूखे जैसी परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता के कारण कई क्षेत्रों में उपयोगी माना जाता है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में कृषि के सामने पानी की उपलब्धता और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां हैं, कम संसाधनों में उग सकने वाली फसलों और पौधों में दिलचस्पी स्वाभाविक रूप से बढ़ रही है।इसी वजह से सहजन को केवल स्वास्थ्य उत्पाद के नजरिये से नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

भारत की सहजन में अहम भूमिका

सहजन का मूल संबंध भारत से माना जाता है और भारत लंबे समय से इसका प्रमुख उत्पादक रहा है। शोध साहित्य में भारत को सहजन के प्रमुख उत्पादक देशों में रखा गया है। भारत में इसकी फलियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है और पत्तियों, बीजों, तेल तथा पाउडर जैसे उत्पादों का भी व्यापार होता है। पुराने व्यापार आंकड़ों पर आधारित शोध में अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे बाजारों में भारतीय सहजन पत्ती पाउडर के निर्यात का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन आंकड़ों को वर्तमान बाजार का ताजा आकार मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि ये पुराने वर्षों के व्यापार रिकॉर्ड पर आधारित हैं। 

सहजन सिर्फ पत्तियों तक सीमित नहीं

सहजन की लोकप्रियता की एक और वजह इसकी बहुउपयोगिता है। इसके फल यानी फलियां भोजन में इस्तेमाल होती हैं, पत्तियों से पाउडर और खाद्य सामग्री तैयार की जा सकती है, जबकि बीजों से तेल निकाला जाता है।संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन से जुड़े एक हालिया लेख में भी सहजन की पत्तियों, फलियों और बीजों के अलग-अलग उपयोगों का उल्लेख किया गया है। पत्तियों को भोजन में शामिल करने, फलियों को पकाने और बीजों से तेल निकालने के अलावा बीजों से बने अवशेषों के जल शुद्धिकरण में संभावित उपयोग का भी जिक्र है। यानी एक ही पौधे से भोजन, पोषण, कृषि और कुछ औद्योगिक उपयोगों की संभावनाएं निकलती हैं।

स्वास्थ्य को लेकर क्या कहता है विज्ञान?

सहजन की पत्तियों में मौजूद पोषक तत्व और जैव सक्रिय यौगिक वैज्ञानिक रुचि का विषय रहे हैं। विभिन्न समीक्षाओं में इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और दूसरे जैविक प्रभावों पर शोध का उल्लेख किया गया है। लेकिन किसी व्यक्ति के लिए यह कहना कि सहजन खाने से मधुमेह, कैंसर, रक्तचाप या किसी अन्य बीमारी का इलाज हो जाएगा, वैज्ञानिक रूप से सावधानी के बिना किया गया दावा होगा।सहजन को संतुलित आहार का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसे दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। खासकर किसी बीमारी के इलाज के दौरान चिकित्सक द्वारा दी गई दवाओं को सहजन या उसके सप्लीमेंट से बदलना उचित नहीं है।

न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग में बढ़ी संभावना

आज उपभोक्ताओं के बीच ऐसे खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है जिन्हें सामान्य भोजन के साथ पोषण बढ़ाने वाले विकल्प के रूप में पेश किया जाता है। इसी बाजार में सहजन की पत्तियों का पाउडर और उससे बने उत्पादों के लिए संभावनाएं दिखाई देती हैं।2025 में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार खाद्य उद्योग सहजन की पत्तियों और बीजों को उच्च-मूल्य वाले खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है। शोध में खाद्य प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को इसके भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में माना गया है। 

किसानों के लिए भी बन सकता है अवसर

सहजन की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान किसानों और कृषि-आधारित उद्यमों के लिए भी अवसर पैदा कर सकती है। हालांकि केवल बाजार में मांग की खबर सुनकर खेती शुरू करना पर्याप्त नहीं है।किसान को स्थानीय जलवायु, किस्म, बाजार, प्रसंस्करण सुविधा, गुणवत्ता मानकों और खरीदारों की जरूरत को समझना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए उत्पादन करने पर खाद्य सुरक्षा, अवशेष मानक, पैकेजिंग और निर्यात नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण हो जाता है।इसलिए सहजन की लोकप्रियता को किसानों के लिए संभावित अवसर जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे बिना बाजार अध्ययन के निश्चित आर्थिक सफलता के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

आखिर क्यों खास है सहजन?

सहजन की वैश्विक लोकप्रियता को एक ही वजह से समझना मुश्किल है। इसके पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं—

* पोषण: पत्तियों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन और जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। 
* बहुउपयोगिता: फलियां, पत्तियां और बीज अलग-अलग तरीके से उपयोग किए जाते हैं। 
* प्रसंस्करण की संभावना: पत्तियों से पाउडर और विभिन्न खाद्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं। 
* जलवायु अनुकूलता: यह गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियों में भी उग सकता है। 
* अंतरराष्ट्रीय बाजार: सहजन से बने पाउडर, तेल और अन्य उत्पादों का वैश्विक व्यापार पहले से मौजूद है। 

निष्कर्ष

सहजन की कहानी इस बात का उदाहरण है कि भारतीय रसोई में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाला कोई पारंपरिक पौधा वैश्विक खाद्य और पोषण बाजार में नई पहचान हासिल कर सकता है। इसकी पत्तियों में मौजूद पोषक तत्व, पूरे पौधे की बहुउपयोगिता, मूल्यवर्धित उत्पादों की संभावना और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में इसकी खेती की क्षमता इसे खास बनाती है।लेकिन ‘सुपरफूड’ की लोकप्रियता और वैज्ञानिक प्रमाण के बीच फर्क समझना भी उतना ही जरूरी है। सहजन पौष्टिक आहार का हिस्सा हो सकता है, मगर इसके हर स्वास्थ्य दावे को प्रमाणित चिकित्सा तथ्य मानना सही नहीं होगा। आने वाले समय में मानव-अध्ययनों, खाद्य सुरक्षा और प्रसंस्करण तकनीकों पर होने वाला शोध यह तय करने में मदद करेगा कि सहजन वैश्विक खाद्य बाजार में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है। 


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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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