SYNOPSIS
दिल्ली सरकार की संशोधित सोलर नीति के तहत 2.30 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को 3 किलोवाट तक रूफटॉप सोलर जीरो अपफ्रंट लागत पर देने का लक्ष्य है। 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले पात्र होंगे। पांच साल का रखरखाव, मौजूदा बिजली सब्सिडी और सौर बिजली ग्रिड में भेजने की सुविधा मिलेगी।
लोकेशन: दिल्ली
तारीख: 2 सितंबर 2026
बायलाइन: Apurva Choudhary
दिल्ली की संशोधित सोलर नीति में क्या बदला
दिल्ली सरकार ने रूफटॉप सोलर को आम घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए Delhi Solar Energy Policy में दूसरा संशोधन मंजूर किया है। नई व्यवस्था के तहत औसतन 400 यूनिट तक मासिक बिजली खपत वाले पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को 3 किलोवाट तक का रूफटॉप सोलर सिस्टम जीरो अपफ्रंट लागत पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने मार्च 2027 तक करीब 2.30 लाख घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने और इससे 500 मेगावाट अतिरिक्त रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। यह पहल पहले से लागू दिल्ली सोलर पॉलिसी के उस उद्देश्य को आगे बढ़ाती है, जिसके तहत शहर में रूफटॉप सोलर क्षमता को बढ़ाना है।
यहां “मुफ्त सोलर” का मतलब यह समझना जरूरी है कि पात्र उपभोक्ता को इंस्टॉलेशन के समय रकम नहीं देनी होगी। केंद्र और दिल्ली सरकार की उपलब्ध सब्सिडी के बाद सिस्टम की लागत में जो अंतर रहेगा, उसे दिल्ली सरकार अतिरिक्त टॉप-अप के जरिए कवर करेगी।
400 यूनिट तक खपत वालों को क्या मिलेगा
संशोधित व्यवस्था का प्रमुख लाभ उन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए है जिनकी औसत मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है। रिपोर्टों के मुताबिक पात्रता का आकलन वित्त वर्ष 2025-26 की औसत मासिक खपत के आधार पर किया जाएगा और सोलर सिस्टम की स्थापना तकनीकी व्यवहार्यता पर निर्भर रहेगी।
पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को अधिकतम 3 किलोवाट तक का रूफटॉप सोलर सिस्टम जीरो अपफ्रंट लागत पर दिया जाएगा। यानी योजना का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि उपभोक्ता को सिस्टम लगवाने के लिए शुरुआत में बड़ी रकम जुटाने की जरूरत नहीं होगी।
दिल्ली सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि रूफटॉप सोलर अपनाने में शुरुआती लागत एक बड़ी रुकावट रही है। नई व्यवस्था में आर्थिक सहायता को इंस्टॉलेशन के समय उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि उपभोक्ता को पहले अपनी जेब से पूरा खर्च न करना पड़े।
सोलर सिस्टम की लागत कौन उठाएगा
3 किलोवाट के सिस्टम के लिए केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध सहायता और दिल्ली सरकार की सहायता को मिलाकर ₹1.56 लाख तक का वित्तीय समर्थन उपलब्ध है। इसके अलावा पात्र 400 यूनिट तक वाले उपभोक्ताओं के मामले में टेंडर लागत और उपलब्ध सब्सिडी के बीच अंतर को दिल्ली सरकार अतिरिक्त टॉप-अप के जरिए पूरा करेगी।
इस मॉडल का मकसद उपभोक्ता की शुरुआती वित्तीय बाधा को खत्म करना है। यानी इसे केवल सामान्य सब्सिडी योजना की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सरकार ऐसी व्यवस्था बना रही है जिसमें पात्र घरों को सिस्टम लगाते समय अपनी तरफ से शुरुआती भुगतान न करना पड़े।
हालांकि इसका लाभ केवल उन्हीं घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा जो तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। छत की स्थिति, सिस्टम लगाने की तकनीकी क्षमता और योजना की अन्य निर्धारित शर्तें भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
पांच साल तक मुफ्त ऑपरेशन और मेंटेनेंस
रूफटॉप सोलर लगने के बाद उसके रखरखाव को लेकर भी सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है। चयनित विक्रेता सिस्टम का पांच साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस बिना अतिरिक्त शुल्क के करेंगे।
यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोलर सिस्टम लगाने के बाद नियमित निरीक्षण, तकनीकी खराबियों और रखरखाव की जिम्मेदारी उपभोक्ता के लिए अलग खर्च बन सकती है। नई नीति में शुरुआती पांच वर्षों के लिए इस जिम्मेदारी को चयनित विक्रेताओं से जोड़ने का फैसला किया गया है।
पांच साल की अवधि के बाद उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार डिस्कॉम से उपलब्ध मेंटेनेंस और इंश्योरेंस सेवाओं का विकल्प चुन सकेंगे।
मौजूदा बिजली सब्सिडी बंद नहीं होगी
इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि रूफटॉप सोलर लगाने के बाद पात्र उपभोक्ताओं की मौजूदा बिजली सब्सिडी खत्म नहीं होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोलर योजना और मौजूदा बिजली सब्सिडी को साथ रखा जाएगा।
रिपोर्टों के मुताबिक 200 यूनिट तक मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मौजूदा 100 प्रतिशत बिजली सब्सिडी जारी रहेगी। 201 से 400 यूनिट तक की खपत वाले उपभोक्ताओं के लिए लागू सब्सिडी व्यवस्था भी जारी रहने की बात कही गई है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर घर का बिजली बिल हर परिस्थिति में शून्य हो जाएगा। वास्तविक बिल पर खपत, सोलर उत्पादन, ग्रिड से ली गई बिजली और लागू सब्सिडी व्यवस्था का असर पड़ेगा। इसलिए “जीरो बिल” को एक सार्वभौमिक गारंटी के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
अतिरिक्त सौर बिजली से कमाई का रास्ता
रूफटॉप सोलर सिस्टम घरेलू जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा करता है तो लागू नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है। सरकार ने इस व्यवस्था को भी संशोधित नीति का हिस्सा बनाया है।
एक 3 किलोवाट सिस्टम पर्याप्त धूप और अन्य उपयुक्त परिस्थितियों में लगभग 300 यूनिट मासिक बिजली पैदा कर सकता है, हालांकि वास्तविक उत्पादन मौसम, छत की दिशा, धूप की उपलब्धता, सिस्टम की क्षमता और अन्य तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
अतिरिक्त बिजली के लिए मिलने वाला भुगतान लागू नियमों और व्यवस्था पर निर्भर करेगा। इसलिए उपभोक्ताओं को इसे निश्चित मासिक कमाई के रूप में नहीं देखना चाहिए। वास्तविक आर्थिक लाभ हर घर की खपत और सोलर उत्पादन के हिसाब से अलग हो सकता है।
नेट मीटरिंग की प्रक्रिया भी तेज होगी
संशोधित नीति में नेट मीटरिंग की प्रक्रिया को तेज करने का प्रावधान भी सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक आवासीय रूफटॉप सोलर के लिए नेट मीटरिंग का समय पहले करीब 75 दिन तक बताया जाता था, जिसे घटाकर लगभग 25 दिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
नेट मीटरिंग का महत्व इसलिए है क्योंकि इससे सोलर सिस्टम से पैदा हुई और ग्रिड में भेजी गई बिजली का हिसाब रखने में मदद मिलती है। घरेलू उपभोक्ता के लिए यह व्यवस्था सोलर सिस्टम के आर्थिक लाभ को समझने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि प्रक्रिया की वास्तविक समय-सीमा संबंधित डिस्कॉम, तकनीकी स्वीकृति और आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति पर भी निर्भर कर सकती है। इसलिए 25 दिन को हर मामले में अनिवार्य अंतिम समय-सीमा मानना उचित नहीं होगा।
आवेदन कैसे होगा और अभी क्या स्थिति है
दिल्ली सरकार का आधिकारिक Delhi Solar Portal पहले से सोलर पॉलिसी, केंद्रीय सब्सिडी, राज्य सब्सिडी और रूफटॉप सोलर से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है। पोर्टल पर प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत राष्ट्रीय पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन की जानकारी भी दी गई है।
लेकिन संशोधित जीरो-अपफ्रंट व्यवस्था के लिए अलग आवेदन प्रक्रिया या नई एप्लिकेशन विंडो की विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट रूप से जारी नहीं हुई है। इसलिए उपभोक्ताओं को सोशल मीडिया या अनधिकृत वेबसाइटों पर दिए गए किसी भी आवेदन लिंक पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक दिल्ली सोलर पोर्टल और सरकार की अधिसूचनाओं से प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए।
नई व्यवस्था में घरेलू सोलर सिस्टम के लिए आवेदन और रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी राहत दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक 10 किलोवाट तक के आवासीय सोलर सिस्टम के लिए आवेदन और रजिस्ट्रेशन शुल्क हटाया गया है।
सरकार का बड़ा लक्ष्य 500 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता
दिल्ली सरकार ने इस संशोधन को केवल घरेलू बिजली बिल कम करने की योजना के रूप में नहीं रखा है। इसका एक बड़ा उद्देश्य राजधानी में रूफटॉप सोलर की कुल क्षमता बढ़ाना और घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली के उपभोक्ता के साथ-साथ उत्पादक बनाना है।
सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक करीब 2.30 लाख घरों को सोलर से जोड़ने के साथ 500 मेगावाट अतिरिक्त रूफटॉप क्षमता विकसित करना है। दिल्ली में पहले से 10,073 सोलर सिस्टम लगाए जाने की सरकारी जानकारी सामने आई है, जिनमें बड़ी संख्या सरकारी इमारतों पर है।
यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसकी सफलता केवल नीति की घोषणा पर निर्भर नहीं करेगी। विक्रेताओं का चयन, तकनीकी सर्वे, इंस्टॉलेशन की गति, डिस्कॉम समन्वय और उपभोक्ताओं की वास्तविक भागीदारी इसके अहम हिस्से होंगे।
इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती क्या है
जीरो अपफ्रंट लागत से शुरुआती आर्थिक बाधा कम हो सकती है, लेकिन हर घर की छत सोलर सिस्टम के लिए उपयुक्त नहीं होती। छत का क्षेत्रफल, धूप की उपलब्धता, संरचनात्मक स्थिति और बिजली कनेक्शन से जुड़े तकनीकी पहलू स्थापना को प्रभावित कर सकते हैं। नीति में भी लाभ को तकनीकी व्यवहार्यता से जोड़ा गया है।
दूसरी चुनौती बड़े पैमाने पर इंस्टॉलेशन और गुणवत्ता नियंत्रण की होगी। 2.30 लाख घरों को मार्च 2027 तक कवर करने के लिए बड़ी संख्या में इंस्टॉलेशन, निरीक्षण, मीटरिंग और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं को एक साथ संचालित करना होगा।
इसके अलावा उपभोक्ताओं के लिए यह समझना भी जरूरी होगा कि सोलर सिस्टम लगने के बाद बिजली बिल, सब्सिडी और ग्रिड को भेजी गई बिजली का हिसाब किस तरह बदलेगा। स्पष्ट बिलिंग और पारदर्शी जानकारी योजना पर भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब
पात्र घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस नीति का सबसे सीधा फायदा यह है कि रूफटॉप सोलर लगाने की शुरुआती लागत का बोझ कम होगा। इसके साथ पांच साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस, मौजूदा बिजली सब्सिडी और अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने का विकल्प इसे पहले की व्यवस्था की तुलना में अधिक आकर्षक बना सकता है।
लेकिन योजना को “हर घर के लिए मुफ्त सोलर और हर महीने जीरो बिजली बिल” के रूप में समझना सही नहीं होगा। वास्तविक लाभ पात्रता, तकनीकी व्यवहार्यता, सोलर उत्पादन, बिजली खपत और लागू सब्सिडी व नेट मीटरिंग नियमों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल दिल्ली सरकार के सामने मार्च 2027 तक 2.30 लाख घरों और 500 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता का लक्ष्य हासिल करने की चुनौती है। आने वाले महीनों में आवेदन प्रक्रिया, विक्रेता चयन और वास्तविक इंस्टॉलेशन की रफ्तार यह तय करेगी कि संशोधित पॉलिसी जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से असर दिखाती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।