Synopsis
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काबुल | 13 अगस्त 2026 | अपूर्वा चौधरी
अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के करीब पांच साल बाद लगभग 24 लाख लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से बाहर हैं। लंबे समय से जारी पाबंदियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं के भविष्य को प्रभावित किया है। शिक्षा अधिकार बहाल करने की मांग के बीच आने वाले वर्षों में संकट और गहरा सकता है।
अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर गंभीर संकट
अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा को लेकर हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। तालिबान की सत्ता में वापसी के करीब पांच वर्ष बाद भी लाखों छात्राओं के लिए माध्यमिक शिक्षा का रास्ता बंद है। मौजूदा अनुमान के मुताबिक करीब 24 लाख लड़कियां माध्यमिक स्तर की पढ़ाई से बाहर हैं।
लंबे समय तक स्कूल से दूर रहने का असर केवल उनकी मौजूदा पढ़ाई पर नहीं पड़ रहा, बल्कि आगे की उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर भी पड़ने की आशंका है।
2021 के बाद बदली लड़कियों की शिक्षा की तस्वीर
अगस्त 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा को लेकर पहले से मौजूद व्यवस्था प्रभावित हुई और मार्च 2022 में माध्यमिक कक्षाओं की छात्राओं को स्कूल लौटने की अनुमति नहीं दी गई।
इसके बाद दिसंबर 2022 में महिलाओं के विश्वविद्यालयों में पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई। इस तरह माध्यमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा तक पहुंच का रास्ता भी बड़ी संख्या में छात्राओं के लिए बंद हो गया।
नतीजा यह हुआ कि जो छात्राएं अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करके आगे बढ़ना चाहती थीं, उनकी पढ़ाई एक निर्णायक चरण पर रुक गई।
24 लाख छात्राओं का आंकड़ा क्यों अहम है?
करीब 24 लाख छात्राओं का माध्यमिक शिक्षा से बाहर होना अफगानिस्तान के शिक्षा संकट की गंभीरता को दिखाता है। यह ऐसी उम्र है जब विद्यार्थी आगे की पढ़ाई और भविष्य के करियर की तैयारी शुरू करते हैं।
माध्यमिक शिक्षा पूरी नहीं होने से छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा में प्रवेश, पेशेवर प्रशिक्षण और रोजगार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रतिबंध जितने लंबे समय तक जारी रहेंगे, शिक्षा व्यवस्था से बाहर होने वाली नई छात्राओं की संख्या भी बढ़ती जाएगी।
पहले हुई शैक्षिक प्रगति को लगा बड़ा झटका
तालिबान की सत्ता में वापसी से पहले अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में पिछले दो दशकों के दौरान काफी विस्तार हुआ था। बड़ी संख्या में छात्राएं स्कूलों और माध्यमिक संस्थानों तक पहुंचने लगी थीं।
करीब 10 लाख लड़कियां माध्यमिक शिक्षा में नामांकित थीं। लेकिन मौजूदा प्रतिबंधों ने इस प्रगति को पीछे धकेल दिया है।
शिक्षा से लंबे समय तक दूर रहने के कारण उन छात्राओं की पूरी पीढ़ी प्रभावित हो रही है, जिनके लिए स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं बल्कि आगे के जीवन की तैयारी का माध्यम था।
शिक्षा पर रोक का असर रोजगार पर भी
शिक्षा और रोजगार के बीच सीधा संबंध है। माध्यमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण हासिल करने वाली छात्राओं के लिए रोजगार के विकल्प बढ़ते हैं।
इसके विपरीत, लंबे समय तक शिक्षा से बाहर रहने पर कौशल विकास रुक सकता है। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता प्रभावित होने का खतरा बढ़ता है।
अफगानिस्तान जैसे देश में जहां पहले से आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां मौजूद हैं, महिलाओं की शिक्षा सीमित होने का असर परिवारों और व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
महिला शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी की चिंता
लड़कियों की शिक्षा रुकने का असर भविष्य में महिला पेशेवरों की उपलब्धता पर भी दिखाई दे सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
यदि आज की छात्राओं को आगे पढ़ने का अवसर नहीं मिलता तो आने वाले वर्षों में प्रशिक्षित महिला शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य पेशेवरों की संख्या प्रभावित हो सकती है।
इसका असर उन क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है जहां महिलाओं और लड़कियों तक सेवाएं पहुंचाने के लिए महिला पेशेवरों की जरूरत होती है।
वैकल्पिक माध्यमों से पढ़ाई जारी रखने की कोशिश
औपचारिक माध्यमिक स्कूलों तक पहुंच सीमित होने के बावजूद कुछ स्थानों पर वैकल्पिक शिक्षा माध्यमों के जरिए छात्राओं की पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की जा रही है।
समुदाय आधारित शिक्षा, घर पर पढ़ाई और विभिन्न अनौपचारिक शैक्षिक कार्यक्रम कुछ छात्राओं को सीखने से जुड़े रहने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि ऐसी व्यवस्थाएं नियमित माध्यमिक शिक्षा का पूरा विकल्प नहीं बन सकतीं। प्रमाणित शिक्षा, उच्च अध्ययन और पेशेवर करियर के लिए औपचारिक शिक्षा व्यवस्था की अहम भूमिका बनी रहती है।
शिक्षा के अधिकार की बहाली की मांग
अफगान लड़कियों और महिलाओं के लिए माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा का अधिकार बहाल करने की मांग लगातार उठ रही है।
शिक्षा को केवल स्कूल जाने तक सीमित मुद्दा नहीं माना जा सकता। यह व्यक्ति के भविष्य, रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और समाज में भागीदारी से जुड़ा विषय है।
लड़कियों को पांच साल या उससे अधिक समय तक शिक्षा से दूर रखने के बाद उन्हें दोबारा व्यवस्था में शामिल करना भी आसान नहीं होगा। इसके लिए विशेष शैक्षिक कार्यक्रम, अतिरिक्त कक्षाएं और उम्र के अनुरूप पाठ्यक्रम जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ सकती है।
आने वाली पीढ़ी पर पड़ सकता है असर
मौजूदा प्रतिबंधों का असर केवल आज की छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा। यदि शिक्षा से बाहर रहने की स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकता है।
एक शिक्षित मां अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध का असर परिवार और समाज की अगली पीढ़ी पर भी पड़ सकता है।
यही वजह है कि अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा का सवाल अब केवल एक देश की शिक्षा नीति का विषय नहीं रह गया है। यह मानवाधिकार, सामाजिक विकास और आर्थिक भविष्य से जुड़ा व्यापक मुद्दा बन चुका है।
पांच साल बाद भी समाधान का इंतजार
तालिबान की सत्ता वापसी के करीब पांच साल बाद भी लाखों अफगान लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा बहाल नहीं हो सकी है। करीब 24 लाख छात्राओं का स्कूल से बाहर होना इस संकट की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
अब चुनौती केवल स्कूलों के दरवाजे खोलने की नहीं है। लंबे समय से पढ़ाई से दूर रही छात्राओं को दोबारा शिक्षा व्यवस्था में लाना, उनकी उम्र और शैक्षिक स्तर के अनुसार व्यवस्था तैयार करना और आगे की पढ़ाई के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
फिलहाल अफगान लड़कियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी रुकी हुई पढ़ाई आखिर कब दोबारा शुरू होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।