सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि यमन के हूती समूह की ओर से सऊदी अरब की दिशा में दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और दो ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया।
सऊदी अरब | 26 सितंबर 2026
By Mohd Haris
सऊदी अरब में शनिवार तड़के एक बार फिर मिसाइल और ड्रोन हमले का खतरा सामने आया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, यमन के हूती समूह की ओर से सऊदी क्षेत्र की तरफ दो बैलिस्टिक मिसाइलें और दो ड्रोन लॉन्च किए गए थे। गठबंधन ने दावा किया कि सभी चार हवाई खतरों को इंटरसेप्ट कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, दो बैलिस्टिक मिसाइलें खमीस मुशैत की दिशा में बढ़ रही थीं, जबकि दो ड्रोन सऊदी राजधानी रियाद की तरफ जा रहे थे। गठबंधन ने सोशल मीडिया पोस्ट में इन घटनाओं की जानकारी दी और कहा कि वह सऊदी अरब की ओर आने वाले मिसाइल और ड्रोन खतरे की निगरानी कर रहा है।
रियाद की ओर दो ड्रोन, खमीस मुशैत की दिशा में मिसाइलें
26 सितंबर की तड़के सामने आई जानकारी के अनुसार, मिसाइलों को खमीस मुशैत की ओर और ड्रोन को रियाद की दिशा में बताया गया। सऊदी सिविल डिफेंस ने रात के दौरान खमीस मुशैत और अबहा के लिए अलर्ट जारी किए थे। रियाद के लिए उसी समय ऐसा अलर्ट जारी नहीं किया गया था।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए। उपलब्ध रिपोर्ट में इन चारों प्रोजेक्टाइल के कारण किसी नागरिक के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।
हूती समूह पर सऊदी हमले का आरोप
सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन इन हमलों के लिए यमन के हूती समूह को जिम्मेदार बता रहा है। रॉयटर्स ने हूतियों को ईरान समर्थित समूह के रूप में वर्णित किया है। हालांकि, किसी हमले की जिम्मेदारी से जुड़े दावों को संबंधित पक्षों के बयान के रूप में ही देखना जरूरी है, जब तक स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध न हो।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सऊदी अरब और हूती समूह के बीच तनाव फिर बढ़ा हुआ है। जुलाई में हूतियों की ओर से सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा के बाद हमले बढ़े हैं। रॉयटर्स के अनुसार, इन हमलों में सऊदी शहरों, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और शिपिंग गतिविधियों को निशाना बनाने की घटनाएं शामिल रही हैं।
24 सितंबर को भी छह बैलिस्टिक मिसाइलें रोकी गई थीं
इससे पहले 24 सितंबर को सऊदी अरब ने छह बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी थी। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार, ये मिसाइलें पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ और लाल सागर के पास यानबू क्षेत्र की ओर बढ़ रही थीं।
उसी दिन हूती सैन्य प्रवक्ता ने रियाद में एक कथित संवेदनशील ठिकाने और यानबू में सऊदी अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा किया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी पक्ष ने उस समय रियाद पर हमले की तत्काल पुष्टि नहीं की थी।
24 सितंबर की घटनाओं के दौरान सऊदी सिविल डिफेंस ने जेद्दा, मक्का, यानबू, ताइफ और तबूक सहित कई इलाकों के लिए संभावित खतरे की चेतावनी जारी की थी।
यानबू क्यों महत्वपूर्ण है
यानबू सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। लाल सागर के तट पर स्थित यह क्षेत्र तेल निर्यात और रिफाइनिंग गतिविधियों से जुड़ा है। ऐसे में यानबू और इससे जुड़े ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की आशंका सऊदी सुरक्षा के साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी अहम मुद्दा बनती है।
रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी सितंबर में ड्रोन हमलों के बाद प्रभावित हुई थी। इसके चलते तेल निर्यात के वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ा।
क्षेत्रीय संघर्ष का व्यापक संदर्भ
सऊदी अरब और हूती समूह के बीच संघर्ष नया नहीं है। हूतियों ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम लंबे समय तक बड़े पैमाने पर सऊदी क्षेत्र में हूती हमलों को सीमित रखने में अहम रहा। लेकिन 2026 में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ यमन और सऊदी अरब के बीच सैन्य गतिविधियां फिर तेज हुई हैं।
24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया लड़ाई में यमन के भीतर भी मोर्चे सक्रिय हुए हैं और ताइज़ तक पहुंचने वाले महत्वपूर्ण रास्तों पर संघर्ष तेज हुआ है।
मक्का के आसपास भी पहले जारी हुआ था सुरक्षा अलर्ट
सितंबर में सऊदी अरब में हवाई खतरे से जुड़े कई अलर्ट सामने आए हैं। 16 सितंबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा था कि मक्का की दिशा में भेजे गए एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया। हूती पक्ष ने मक्का या अन्य इस्लामी पवित्र स्थलों को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया था।
मक्का में सुरक्षा अलर्ट का मुद्दा इसलिए संवेदनशील है क्योंकि शहर में मस्जिद अल-हराम और काबा स्थित हैं। किसी भी हवाई खतरे का असर सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक यात्रियों की आवाजाही पर पड़ सकता है।
रियाद पर हमले का खतरा क्यों महत्वपूर्ण है
रियाद सऊदी अरब का राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र है। सितंबर में राजधानी की दिशा में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों ने संघर्ष के भौगोलिक दायरे को लेकर चिंता बढ़ाई है।
19 सितंबर को भी सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने रियाद की दिशा में आने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी थी। उस घटना के दौरान राजधानी के आसपास
विस्फोट की आवाजें सुनाई देने की रिपोर्टें सामने आई थीं ।
26 सितंबर की ताजा घटना में दो ड्रोन को रियाद की ओर बढ़ने वाला बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार रियाद के लिए उस रात सिविल डिफेंस अलर्ट जारी नहीं किया गया था।
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग
ताजा हमले ऐसे समय हुए हैं जब सऊदी अरब ने अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारी को मजबूत किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने पिछले महीने मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते के अनुसार, तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। 26 सितंबर को सऊदी, पाकिस्तान और तुर्किये के सैन्य प्रमुखों ने रियाद में सऊदी अरब के सामने मौजूद सुरक्षा खतरों की समीक्षा की।
तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इससे पहले कहा था कि सऊदी अरब को सैन्य और तकनीकी जरूरतें होने पर उनका देश समझौते के तहत मदद के लिए तैयार है। पाकिस्तान ने हालांकि कहा था कि हूती हमलों के जवाब में सैन्य प्रतिक्रिया पर उसके साथ कोई चर्चा नहीं हुई है।
ऊर्जा और शिपिंग पर बढ़ता दबाव
मिसाइल और ड्रोन हमलों का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में शामिल है और उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किसी भी बड़े हमले का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, हालिया तनाव ने लाल सागर के रास्ते सऊदी तेल निर्यात पर दबाव बढ़ाया है। वहीं होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी व्यवधान ने खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों की अहमियत और बढ़ा दी है।
इसलिए सऊदी शहरों की ओर आने वाले मिसाइल और ड्रोन खतरे को क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के नजरिये से भी देखा जा रहा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।