अमेरिका में सैन्य समाचार पत्र स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के 3 वरिष्ठ कर्मचारियों ने रक्षा विभाग और उसके अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनकी बर्खास्तगी अखबार की संपादकीय स्वतंत्रता को कमजोर करने और पत्रकारों के संवैधानिक अभिव्यक्ति अधिकारों पर अंकुश लगाने की कोशिश का हिस्सा है। मुकदमा 27 अगस्त को वॉशिंगटन डीसी की संघीय अदालत में दाखिल किया गया।
मामले में अखबार के प्रकाशक मैक्स लेडरर, प्रधान संपादक एरिक स्लाविन और मध्य पूर्व संवाददाता लारा कोर्टे शामिल हैं। तीनों का कहना है कि पेंटागन की कार्रवाई उनके फर्स्ट अमेंडमेंट अधिकारों का उल्लंघन करती है।
वॉशिंगटन डीसी, अमेरिका | 28 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
याचिका में आरोप लगाया गया है कि तीनों पत्रकारों को नौकरी से हटाने की कार्रवाई प्रतिशोधात्मक थी। पत्रकारों के मुताबिक उन्होंने स्टार्स एंड स्ट्राइप्स की संपादकीय स्वतंत्रता और सैन्य अभियानों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग के पक्ष में सार्वजनिक तौर पर अपनी स्थिति रखी थी। मुकदमे में रक्षा विभाग, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और पेंटागन के दूसरे अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। पत्रकारों ने अपनी बर्खास्तगी रोकने के लिए अदालत से तत्काल राहत और नौकरी बहाल करने की मांग की है। हालांकि, यह आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं। इन्हें न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
मामले की पृष्ठभूमि में जुलाई में सीबीएस न्यूज के कार्यक्रम में दिया गया एक इंटरव्यू अहम है। इसमें स्लाविन और कोर्टे ने सैन्य अखबार की संपादकीय स्वतंत्रता के बारे में बात की थी। स्लाविन ने कहा था कि स्टार्स एंड स्ट्राइप्स का मकसद सैन्यकर्मियों को स्वतंत्र खबर देना है। उनका तर्क था कि अगर अखबार को सरकारी जनसंपर्क तंत्र की तरह काम करना पड़े, तो उसकी मूल भूमिका प्रभावित होगी। मुकदमे में इसी इंटरव्यू को पेंटागन और पत्रकारों के बीच बढ़े विवाद की एक अहम कड़ी बताया गया है।
पेंटागन ने इस साल स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के कामकाज में बदलाव की योजना की घोषणा की थी। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने जनवरी में कहा था कि अखबार को उसकी मूल भूमिका, यानी सैन्यकर्मियों के लिए सैन्य मामलों की रिपोर्टिंग, की ओर वापस ले जाया जाएगा। सरकार की योजना में सैन्य अभियानों, हथियार प्रणालियों, फिटनेस, सैन्य क्षमता और सैनिकों की सुरक्षा जैसे विषयों पर ज्यादा ध्यान देने की बात कही गई थी। पेंटागन ने इसे अखबार के संचालन को आधुनिक बनाने और उसकी प्राथमिकताओं को दोबारा तय करने की प्रक्रिया बताया। आलोचकों ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए अखबार की कवरेज को सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने की कोशिश हो रही है। यह आलोचना और पेंटागन का पक्ष मामले की न्यायिक समीक्षा के दौरान अलग-अलग परखा जाएगा।
मुकदमे में अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन से जुड़ी स्टार्स एंड स्ट्राइप्स की रिपोर्टिंग का भी उल्लेख है।
अखबार ने लंबे समय से जारी तैनाती के दौरान जहाज पर आपूर्ति की कमी और नाविकों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। याचिका में दावा किया गया है कि इस रिपोर्टिंग के बाद पत्रकारों पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यूएसएस लिंकन पर खराब परिस्थितियों से जुड़ी रिपोर्टों को खारिज किया है। उन्होंने इन खबरों को गलत बताया था।
इसलिए इस विवाद में एक अहम सवाल यह है कि पत्रकारों की बर्खास्तगी वास्तव में संपादकीय असहमति का परिणाम थी या कर्मचारियों के खिलाफ अलग प्रशासनिक कार्रवाई। इसका अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया से होगा।
मुकदमे के अनुसार तीनों कर्मचारियों को 21 अगस्त को बर्खास्तगी के नोटिस दिए गए। इससे पहले उन पर कथित तौर पर अनुशासनहीनता यानी इंसबॉर्डिनेशन का आरोप लगाया गया था। प्रकाशक मैक्स लेडरर ने इससे पहले सितंबर में रिटायर होने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कर्मचारियों को भेजे एक ज्ञापन में रक्षा विभाग के नेतृत्व द्वारा संगठन को जिस दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही थी, उस पर असहमति का संकेत दिया था। इसके बाद उन्हें भी बर्खास्तगी का नोटिस मिला। अप्रैल में अखबार की ओम्बड्समैन जैकलीन स्मिथ को भी उनके पद से हटाया गया था। उनका काम अखबार की संपादकीय स्वतंत्रता की निगरानी से भी जुड़ा था।
स्टार्स एंड स्ट्राइप्स अमेरिकी सैन्य समुदाय के लिए लंबे समय से खबरों का प्रमुख स्रोत रहा है। इसकी ऐतिहासिक जड़ें अमेरिकी गृहयुद्ध के दौर तक जाती हैं और यह सैन्यकर्मियों से जुड़े मुद्दों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। अखबार को अमेरिकी रक्षा विभाग से सरकारी फंडिंग मिलती है, लेकिन इसकी संपादकीय पहचान स्वतंत्र समाचार संगठन के रूप में रही है। यही व्यवस्था मौजूदा विवाद को संवेदनशील बनाती है। एक तरफ सरकार के पास सार्वजनिक धन से चलने वाले संस्थान के संचालन और प्रशासन को लेकर अधिकार हैं। दूसरी तरफ पत्रकारों का तर्क है कि सरकारी फंडिंग संपादकीय सामग्री पर राजनीतिक नियंत्रण का आधार नहीं बननी चाहिए।
अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। इसी संवैधानिक संरक्षण को पत्रकारों ने अपनी याचिका का मुख्य आधार बनाया है। उनका आरोप है कि उन्हें सरकारी नीतियों या अखबार की स्वतंत्रता के पक्ष में बोलने के कारण प्रताड़ित किया गया। पेंटागन की तरफ से बर्खास्तगी के लिए इंसबॉर्डिनेशन जैसे प्रशासनिक आधार का इस्तेमाल किया गया है। अदालत के सामने अब यह सवाल होगा कि बर्खास्तगी के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या प्रशासनिक कार्रवाई संवैधानिक रूप से संरक्षित अभिव्यक्ति या प्रेस स्वतंत्रता से टकराती है।
यह कानूनी लड़ाई अमेरिकी सरकारी मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता पर चल रही व्यापक बहस से भी जुड़ रही है। मुकदमे की कानूनी टीम वॉयस ऑफ अमेरिका से जुड़े कर्मचारियों का भी प्रतिनिधित्व कर रही है। वहां भी ट्रंप प्रशासन और सरकारी मीडिया संस्थान के कर्मचारियों के बीच रोजगार और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े कानूनी विवाद चल रहे हैं। हालांकि दोनों मामलों की कानूनी परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए इन्हें एक ही विवाद मानना सही नहीं होगा।
मामला अब वॉशिंगटन डीसी की संघीय अदालत के सामने है। पत्रकारों ने अपनी बर्खास्तगी पर रोक और तत्काल राहत की मांग की है।
आने वाली सुनवाई में अदालत को बर्खास्तगी के प्रशासनिक आधार, पत्रकारों के सार्वजनिक बयानों, अखबार की संपादकीय स्वतंत्रता और फर्स्ट अमेंडमेंट के दावों पर विचार करना होगा। फिलहाल अदालत ने इन आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। इसलिए इस पूरे विवाद में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है।
स्टार्स एंड स्ट्राइप्स का मामला अमेरिकी मीडिया और प्रशासन के रिश्ते पर एक अहम बहस सामने लाता है। सरकारी संस्थान से वित्तीय समर्थन लेने वाले मीडिया संगठन की संपादकीय स्वतंत्रता किस सीमा तक सुरक्षित रहनी चाहिए, यह सवाल अब अदालत के सामने है। पत्रकारों का कहना है कि सैन्यकर्मियों को विश्वसनीय और स्वतंत्र सूचना देने के लिए संपादकीय स्वायत्तता जरूरी है। दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष का आधार यह है कि रक्षा विभाग अपने संसाधनों और संस्थागत ढांचे को अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यवस्थित कर सकता है। अब असली फैसला अदालत की जांच और कानूनी प्रक्रिया से होगा। यही प्रक्रिया तय करेगी कि तीनों पत्रकारों की बर्खास्तगी वैध प्रशासनिक कार्रवाई थी या प्रेस स्वतंत्रता के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कदम।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।