नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच राहत और बचाव अभियान से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। रसुवा जिले में अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे करीब 350 मजदूरों और स्थानीय लोगों को नेपाली सेना ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। बचाए गए लोगों में 63 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
रसुवा, नेपाल | 28 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
यह रेस्क्यू अभियान ऐसे वक्त में हुआ है जब भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रसुवा और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई है। खराब मौसम, तेज पानी के बहाव और क्षतिग्रस्त रास्तों के बीच सेना के सामने सुरंग तक पहुंचना और वहां फंसे लोगों को निकालना बड़ी चुनौती थी।
नेपाली सेना के मुताबिक अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में फंसे 350 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें परियोजना के मजदूर और स्थानीय लोग शामिल थे। सेना ने इसके अलावा रसुवा के दूसरे बाढ़ प्रभावित इलाकों से भी बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
नेपाली सेना ने गुरुवार को रसुवा के अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों से कुल 883 लोगों को सुरक्षित निकालने की जानकारी दी। इनमें त्रिशूली हाइड्रोपावर सुरंग से निकाले गए 350 लोग भी शामिल हैं। यह आंकड़ा केवल परियोजना में काम कर रहे मजदूरों का नहीं है। इसमें स्थानीय लोग और अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं।
भारत के लिए इस अभियान की सबसे बड़ी राहत 63 भारतीय नागरिकों का सुरक्षित निकलना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार ये सभी भारतीय त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े हुए थे। मंत्रालय ने इन 63 भारतीयों की सूची भी जारी की है। विदेश मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक नेपाल में बाढ़ के बाद भारत के कुल 84 नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें त्रिशूली-1 परियोजना के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 21 लोग शामिल हैं। भारत सरकार अभी भी नेपाल में मौजूद दूसरे भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ संपर्क में है।
350 लोगों के रेस्क्यू के बावजूद ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। नेपाली सेना के मुताबिक सुरंग के भीतर 100 से ज्यादा लोगों के अब भी फंसे होने की आशंका है। उनके लिए बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल सुरंग के प्रवेश मार्गों तक पहुंचने की है। बाढ़ ने परियोजना के आसपास के रास्तों और ढांचों को नुकसान पहुंचाया है। पानी का बहाव भी कई स्थानों पर तेज बना हुआ है। सेना के अधिकारी भकतजन बसनेट के नेतृत्व में एक सैन्य टीम लगातार अभियान में लगी हुई है। हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल भी बचाव और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया। बाढ़ के साथ पानी, चट्टान और मलबे का तेज बहाव निचले इलाकों तक पहुंचा। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक इस आपदा से जुड़ा मलबा प्रवाह करीब 100 किलोमीटर तक आगे बढ़ा और नदी घाटियों में मौजूद बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। रसुवा इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल है। कई जगहों पर सड़क संपर्क टूट गया है और स्थानीय आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान जारी है।
नेपाल अभी पहली बाढ़ की तबाही से उबर भी नहीं पाया है कि दोबारा बाढ़ का खतरा सामने आ गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में मलबे के कारण पानी जमा होने और संभावित प्राकृतिक अवरोध टूटने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल के अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रसुवा और नुवाकोट सहित कई इलाकों में बचाव टीमें अलर्ट पर रखी गई हैं। ऐसे हालात में सुरंग में फंसे लोगों का रेस्क्यू और मुश्किल हो गया है। बचावकर्मियों को एक तरफ फंसे लोगों तक पहुंचना है, दूसरी तरफ नदी और आसपास के इलाके में अचानक जलस्तर बढ़ने के जोखिम को भी ध्यान में रखना है।
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर और पर्यटक मौजूद थे। बाढ़ के बाद भारत के 290 नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी है। ऐसे में 63 भारतीय श्रमिकों का सुरक्षित निकाला जाना महत्वपूर्ण राहत है। भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों की स्थिति जानने के लिए नेपाल के अधिकारियों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय ने सहायता के लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी सक्रिय किया है। इसका मतलब है कि 63 भारतीयों का रेस्क्यू एक सकारात्मक खबर जरूर है, लेकिन नेपाल में फंसे या संपर्क से बाहर भारतीयों की तलाश अभी बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
त्रिशूली परियोजना की सुरंग में बचाव अभियान सामान्य परिस्थितियों वाला ऑपरेशन नहीं था। बाढ़ के बाद आसपास का भूगोल बदल गया, रास्ते बाधित हुए और तेज बहाव ने बचावकर्मियों की आवाजाही मुश्किल कर दी। नेपाली सेना ने रसुवा के स्याफ्रुबेसी, टिमुरे, मैलुंग, थुलो हाकु और हाकुबेसी जैसे इलाकों में भी अलग-अलग टीमें भेजीं। सेना के मुताबिक इन इलाकों से 533 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इस व्यापक अभियान से पता चलता है कि राहत कार्य केवल एक हाइड्रोपावर परियोजना तक सीमित नहीं है। पूरा रसुवा जिला आपदा के बाद बड़े मानवीय और लॉजिस्टिक संकट से गुजर रहा है।
फिलहाल प्राथमिकता सुरंग में मौजूद 100 से ज्यादा लोगों तक सुरक्षित पहुंच बनाना है। इसके साथ नदी के जलस्तर और संभावित दूसरी बाढ़ के खतरे की लगातार निगरानी जरूरी है। बचाए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद उनकी चिकित्सा जांच, भोजन, पानी और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। भारत के लिए इसके साथ दूसरी प्राथमिकता नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों की तलाश है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह प्रयास जारी है।
त्रिशूली हाइड्रोपावर साइट से 350 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू नेपाल की भयावह बाढ़ के बीच एक बड़ी राहत है। खास तौर पर 63 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी से उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है। लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। सुरंग में 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है और नेपाल के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा कायम है। अब अगले कुछ घंटे बचाव अभियान के लिए बेहद अहम हैं। नेपाली सेना को फंसे लोगों तक पहुंचने के साथ बदलते मौसम और नदी के जलस्तर पर भी नजर रखनी होगी। भारत की निगाहें भी उन नागरिकों की तलाश पर रहेंगी, जिनसे अभी संपर्क नहीं हो पाया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।