हिंद रजब की कार पर 335 गोलियां, इज़राइल ने जांच खोली
5 साल की हिंद रजब की मौत, 2 साल बाद इज़राइली जांच
गाज़ा की हिंद रजब केस में नया मोड़, सैनिकों पर जांच
5 साल की हिंद रजब जनवरी 2024 में गाज़ा में परिवार की कार में फंसी रही। फॉरेंसिक जांच में कार पर 335 बुलेट होल मिले। अब इज़राइली सेना ने पहली बार सैनिकों की गोलीबारी स्वीकार कर क्रिमिनल जांच शुरू की है। मामला नागरिकों की सुरक्षा और सैन्य जवाबदेही पर फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में है।
गाज़ा सिटी | 22 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स इंटरनेशनल डेस्क
गाज़ा में जनवरी 2024 में मारी गई 5 साल की हिंद रजब के मामले ने अगस्त 2026 में नया मोड़ लिया है। इज़राइली सेना ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसके सैनिकों ने उस कार पर गोलीबारी की थी जिसमें हिंद अपने परिवार के साथ मौजूद थी। सेना ने मामले में क्रिमिनल जांच शुरू करने का ऐलान भी किया है। इस मामले की अहमियत केवल एक बच्ची की मौत तक सीमित नहीं है। हिंद रजब की मौत से जुड़े ऑडियो, सैटेलाइट इमेजरी और फॉरेंसिक विश्लेषण ने सैन्य कार्रवाई में नागरिकों की सुरक्षा, रेस्क्यू टीमों की सुरक्षा और जवाबदेही के सवाल को अंतरराष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया था।
29 जनवरी 2024 को हिंद रजब अपने परिवार के साथ गाज़ा सिटी के तेल अल-हवा इलाके से निकल रही थी। जिस कार में परिवार सवार था, उस पर भारी गोलीबारी हुई। हिंद कार में जीवित बची, जबकि उसके परिवार के कई सदस्य मारे गए। इसके बाद हिंद ने फोन पर फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट के कर्मचारियों से मदद मांगी। वह कई घंटों तक कार के भीतर फंसी रही और लगातार बचाव दल से संपर्क में रही। बाद में उसे बचाने के लिए एक एंबुलेंस भेजी गई, लेकिन दो पैरामेडिक्स भी मारे गए। करीब 12 दिन बाद हिंद, उसके परिवार के सदस्यों और दोनों पैरामेडिक्स के शव बरामद किए गए। एंबुलेंस कार से करीब 50 मीटर की दूरी पर मिली थी।
हिंद रजब मामले की सबसे महत्वपूर्ण फॉरेंसिक कड़ियों में कार पर मिले बुलेट होल शामिल हैं। लंदन स्थित फॉरेंसिक आर्किटेक्चर ने कार की तस्वीरों और उपलब्ध विजुअल एविडेंस का विश्लेषण करते हुए कुल 335 बुलेट होल मैप किए थे। इसलिए इस रिपोर्ट में 355 गोलियों के बजाय 335 बुलेट होल का आंकड़ा इस्तेमाल किया जा रहा है। उपलब्ध प्राथमिक फॉरेंसिक अध्ययन 335 निशानों की पुष्टि करता है। कुछ बाद की रिपोर्टों में अलग संख्या दिखाई देती है, लेकिन उसके लिए समान स्तर का प्राथमिक फॉरेंसिक आधार सामने नहीं आया है।
फॉरेंसिक आर्किटेक्चर के विश्लेषण में कार की स्थिति, गोली के प्रवेश और निकास के निशान, सैटेलाइट इमेजरी और आसपास मौजूद सैन्य वाहनों के विजुअल एविडेंस का अध्ययन किया गया था। शोध समूह ने कहा था कि उपलब्ध साक्ष्य इलाके में इज़राइली सैन्य मौजूदगी के अनुरूप थे।
हिंद रजब की मौत के बाद इज़राइली सेना ने शुरुआती जांच में कहा था कि उसके सैनिक उस इलाके में मौजूद नहीं थे या कार की फायरिंग रेंज में नहीं थे। बाद में सैन्य पक्ष ने कार पर गोलीबारी को लेकर अलग दलीलें पेश कीं। अगस्त 2026 में स्थिति बदल गई। इज़राइली सेना ने स्वीकार किया कि उसके सैनिकों ने हिंद के परिवार को ले जा रही कार पर गोली चलाई थी। इसके साथ ही सैन्य जांच व्यवस्था ने इस मामले को क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन के लिए आगे बढ़ाया। यही इस मामले का सबसे अहम नया तथ्य है। पहले जहां सैन्य मौजूदगी और गोलीबारी की जिम्मेदारी पर इज़राइली पक्ष का इनकार था, अब सैनिकों द्वारा कार पर गोली चलाने की बात आधिकारिक तौर पर स्वीकार की गई है।
हिंद को बचाने के लिए फिलिस्तीन रेड क्रिसेंट के दो पैरामेडिक्स एंबुलेंस से रवाना हुए थे। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञों ने 2024 में कहा था कि एंबुलेंस पर भी इज़राइली फायरिंग हुई और दोनों पैरामेडिक्स मारे गए। फॉरेंसिक आर्किटेक्चर के अध्ययन में भी एंबुलेंस को हुए नुकसान और आसपास की सैन्य गतिविधियों का विश्लेषण किया गया था। शोध के मुताबिक उपलब्ध साक्ष्य इज़राइली सैन्य हथियारों और वाहनों के इस्तेमाल के साथ संगत थे। अगस्त 2026 की नई जांच में एंबुलेंस की आवाजाही और सैन्य समन्वय से जुड़े कथित फेल्योर को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने जुलाई 2024 में कहा था कि हिंद रजब और उसके परिवार की हत्या युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है। विशेषज्ञों ने उस समय इज़राइली सेना के इस दावे पर गंभीर सवाल उठाए थे कि उसके सैनिक उस इलाके में मौजूद नहीं थे।
बाद की संयुक्त राष्ट्र जांच में भी हिंद रजब के मामले को विस्तार से देखा गया। 2026 की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय कमीशन ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट में 401वीं ब्रिगेड पर हिंद रजब और उसके परिवार के सदस्यों की गोलीबारी तथा रेड क्रिसेंट एंबुलेंस पर हमले से जुड़ी जिम्मेदारी के आरोपों का उल्लेख किया गया। संयुक्त राष्ट्र का निष्कर्ष इज़राइली सैन्य जांच से अलग स्तर पर है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण हैं, दूसरी तरफ अब इज़राइल की अपनी सैन्य न्याय प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। दोनों प्रक्रियाओं के नतीजों को एक-दूसरे का विकल्प मानना सही नहीं होगा।
यहां एक अहम तथ्यात्मक फर्क समझना जरूरी है। 335 का आंकड़ा हिंद के शरीर पर लगी गोलियों की संख्या नहीं है। यह उस कार पर मैप किए गए बुलेट होल की संख्या है जिसमें हिंद और उसके परिवार के सदस्य मौजूद थे। इसलिए “हिंद को 335 गोलियां लगीं” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। अधिक सटीक भाषा है कि जिस कार में हिंद मौजूद थी, उस पर फॉरेंसिक जांच में 335 बुलेट होल दर्ज किए गए। यही अंतर इंटरनेशनल कॉन्फ्लिक्ट रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण है। किसी आंकड़े को संदर्भ से अलग करके पेश करने से खबर का इम्पैक्ट बढ़ सकता है, लेकिन उसकी क्रेडिबिलिटी कमजोर होती है।
फॉरेंसिक आर्किटेक्चर ने सैटेलाइट इमेजरी, ऑडियो और कार के नुकसान के पैटर्न का विश्लेषण किया। अध्ययन ने इलाके में इज़राइली मर्कावा टैंकों की मौजूदगी और इस्तेमाल किए गए हथियारों से मेल खाते संकेतों की ओर इशारा किया। 2026 में संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र कमीशन ने भी 401वीं ब्रिगेड का नाम अपने निष्कर्षों में शामिल किया। लेकिन आपराधिक जिम्मेदारी तय करना एक अलग कानूनी प्रक्रिया है। इसके लिए कमांड चेन, आदेश, नियमों के पालन, व्यक्तिगत भूमिका और इरादे जैसे सवालों की जांच जरूरी होती है। यही वजह है कि नई क्रिमिनल जांच का नतीजा महत्वपूर्ण होगा। जांच यह तय करने की कोशिश करेगी कि किन व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है।
इज़राइल का कहना है कि उसका सैन्य न्याय तंत्र सैनिकों के संभावित अपराधों की जांच करने की क्षमता रखता है। लेकिन मानवाधिकार संगठन और पीड़ित परिवार इस प्रक्रिया की स्वतंत्रता और प्रभावशीलता पर सवाल उठाते रहे हैं। हिंद रजब के मामले में भी यही विवाद सामने है। एक पक्ष के लिए क्रिमिनल जांच जवाबदेही की दिशा में कदम है। दूसरे पक्ष का कहना है कि इतनी देर से शुरू हुई आंतरिक जांच पर्याप्त नहीं है और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तंत्र की जरूरत है। यह विवाद केवल इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष तक सीमित नहीं है। युद्ध के दौरान नागरिकों की मौत, मेडिकल कर्मचारियों की सुरक्षा और सैन्य बलों की जवाबदेही इंटरनेशनल ह्यूमनिटेरियन लॉ के बुनियादी सवाल हैं।
हिंद रजब की कहानी ने दुनिया भर में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की। उसकी मदद की अपील का ऑडियो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आया और बाद में यह मामला डॉक्यूमेंट्री तथा सिनेमा का विषय भी बना। इस मामले ने एक और अहम बहस को जन्म दिया। अगर किसी सैन्य कार्रवाई में नागरिकों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन का आरोप हो, तो जांच किस संस्था को करनी चाहिए और जवाबदेही किस स्तर पर तय होनी चाहिए?
इज़राइल की नई जांच इन सवालों का अंतिम जवाब नहीं देती। लेकिन यह पहले के आधिकारिक रुख से महत्वपूर्ण बदलाव जरूर है।
अब मुख्य निगाह क्रिमिनल जांच की प्रक्रिया पर होगी। जांच में यह देखा जाएगा कि कार पर गोलीबारी किन परिस्थितियों में हुई, सैनिकों को कार में नागरिकों की मौजूदगी के बारे में क्या जानकारी थी, फायरिंग के आदेश क्या थे और रेड क्रिसेंट एंबुलेंस की आवाजाही में किस स्तर पर समन्वय हुआ।
इसके साथ यह भी अहम रहेगा कि जांच का परिणाम सार्वजनिक होता है या नहीं और क्या उसके आधार पर किसी सैनिक या अधिकारी के खिलाफ अभियोजन शुरू होता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की मांग स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की रही है।
हिंद रजब मामले में अब तीन तथ्य अलग-अलग स्तर पर स्थापित हैं। 2024 में 5 साल की हिंद रजब परिवार की कार में फंसी रही और बाद में मारी गई। फॉरेंसिक आर्किटेक्चर ने उस कार पर 335 बुलेट होल दर्ज किए। अगस्त 2026 में इज़राइली सेना ने पहली बार स्वीकार किया कि उसके सैनिकों ने कार पर गोलीबारी की थी और क्रिमिनल जांच शुरू की गई। इसके बावजूद कई सवाल अभी खुले हैं। गोलीबारी का पूरा कमांड स्ट्रक्चर क्या था, किसने आदेश दिया, किसे क्या जानकारी थी और व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी किसकी बनती है, इसका जवाब जांच से सामने आना बाकी है।
हिंद रजब केस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह युद्ध में नागरिक सुरक्षा और सैन्य जवाबदेही के बीच मौजूद सबसे कठिन सवालों को सामने रखता है। उपलब्ध साक्ष्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के बजाय उनकी सीमाओं के साथ देखना जरूरी है। यही इस मामले में निष्पक्ष रिपोर्टिंग की बुनियादी कसौटी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।