जेके पुलिस के 52 कर्मियों को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान
जम्मू-कश्मीर पुलिस के 52 कर्मियों को वीरता और सेवा पदक
स्वतंत्रता दिवस पर जेके पुलिस के 52 कर्मियों को बड़ा सम्मान
स्वतंत्रता दिवस 2026 से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस के 52 कर्मियों को गैलेंट्री, मेरिटोरियस और विशिष्ट सेवा पदक के लिए चुना गया है। इनमें 38 गैलेंट्री, 13 मेरिटोरियस और एक प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस शामिल है। यह सम्मान सुरक्षा ड्यूटी, बहादुरी और पेशेवर सेवा की सरकारी मान्यता को दर्शाता है।
📍 श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर
📰 14 अगस्त 2026
✍️Mohd Naved
स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के 52 अधिकारियों और कर्मियों को गैलेंट्री तथा सेवा पदकों के लिए चुना गया है। आधिकारिक बल-वार सूची के अनुसार इनमें 38 को मेडल फॉर गैलेंट्री, 13 को मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस दिया गया है।
इस सूची में एसएसपी शौकत हुसैन शाह जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस पाने वाले एकमात्र अधिकारी हैं। उनके साथ अलग-अलग रैंक के अधिकारी और कर्मचारी भी सम्मानित किए गए हैं। सूची में डीआईजी, एसएसपी, एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर, एएसआई, हेड कांस्टेबल, एसजीसीटी और कांस्टेबल स्तर के कर्मी शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए सबसे बड़ा हिस्सा गैलेंट्री मेडल का है। कुल 38 कर्मियों को यह सम्मान मिला है, जो पुलिस ड्यूटी के दौरान उल्लेखनीय बहादुरी के लिए दिया जाता है। सूची में कई ऐसे अधिकारी और जवान हैं जिन्हें पहले भी गैलेंट्री मेडल मिल चुका है और इस बार उन्हें बार के साथ दोबारा सम्मानित किया गया है।
गैलेंट्री सूची में डीआईजी शिव कुमार, एसएसपी शोभित डी. सक्सेना, एसपी नासिर अहमद, एसपी दिव्या डी, एसएसपी मुश्ताक अहमद और डीआईजी पांडे राजीव ओमप्रकाश जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सम्मान केवल वरिष्ठ कमांड स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग ऑपरेशनल और फील्ड रैंक के कर्मियों तक फैला हुआ है।
इस वर्ष की सूची में कुछ अधिकारियों और कर्मियों को बार के साथ गैलेंट्री सम्मान मिला है। डीएसपी सरफराज बशीर को गैलेंट्री मेडल का सेकेंड बार मिला है, जबकि हेड कांस्टेबल रईश अहमद रेशी, एसजीसीटी इश्तियाक अहमद खान और एएसआई मोहिंदर सिंह को फर्स्ट बार दिया गया है।
बार का मतलब ऐसे मामलों में पहले प्राप्त सम्मान के बाद उसी श्रेणी में दोबारा मान्यता से है। इसलिए इस सूची को केवल नए पदकों की संख्या के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। इसमें जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा माहौल में लंबे समय से सक्रिय पुलिस कर्मियों की निरंतर सेवा का पहलू भी शामिल है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के 13 कर्मियों को मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस दिया गया है। इनमें एसपी संदीप कुमार और अमित गुप्ता, डीएसपी शाकिर हसन, राजेश शर्मा, मुजफ्फर अहमद शाह, कुलजीत सिंह और शरत चंदर सिंह शामिल हैं।
इंस्पेक्टर स्तर पर शमीम अहमद, विक्रम सिंह और मुमिन अहमद राथर को सम्मान मिला है। एएसआई बोध राज और मुश्ताक अहमद, एसआई मंज़ूर अहमद गडा तथा कांस्टेबल अशरफ गुल भी इस श्रेणी में शामिल हैं। यह श्रेणी उन कर्मियों की पेशेवर सेवा को मान्यता देती है जिनका योगदान लंबे समय तक ड्यूटी, जिम्मेदारी और संस्थागत कामकाज से जुड़ा रहा है।
एसएसपी शौकत हुसैन शाह को प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस से सम्मानित किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह इस वर्ष जम्मू-कश्मीर पुलिस से इस श्रेणी में चुने गए एकमात्र अधिकारी हैं। उनका नाम आधिकारिक पुरस्कार सूची में प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस के लिए दर्ज है।
प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस पुलिस सेवा में विशेष रूप से उल्लेखनीय रिकॉर्ड को मान्यता देता है। वहीं मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस मूल्यवान सेवा, संसाधनशीलता और कर्तव्य के प्रति समर्पण को आधार बनाता है। मेडल फॉर गैलेंट्री असाधारण साहस और जोखिम उठाकर जीवन या संपत्ति की रक्षा, अपराध रोकने अथवा अपराधियों को पकड़ने जैसी कार्रवाई के लिए दिया जाता है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस लंबे समय से सामान्य कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा, दोनों स्तरों पर जिम्मेदारी निभाती रही है। क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस की भूमिका आतंकवाद विरोधी अभियानों, खुफिया सहयोग, भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और नागरिक कानून-व्यवस्था से जुड़ी रही है।
इसी व्यापक सुरक्षा संदर्भ में गैलेंट्री पदकों की संख्या को समझना जरूरी है। केवल पदकों की संख्या से किसी विशेष अभियान की सफलता या सुरक्षा स्थिति का आकलन करना उचित नहीं होगा। पुरस्कार एक निर्धारित अवधि में दर्ज सेवा और बहादुरी को मान्यता देते हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर की समग्र सुरक्षा तस्वीर अलग-अलग घटनाओं, अभियानों और प्रशासनिक परिस्थितियों से तय होती है।
2026 के स्वतंत्रता दिवस सम्मान में जम्मू-कश्मीर पुलिस के 52 नाम तीन अलग-अलग श्रेणियों में आए हैं। इनमें 38 गैलेंट्री, 13 मेरिटोरियस सर्विस और एक डिस्टिंग्विश्ड सर्विस मेडल शामिल है। एक अलग पुरस्कार जम्मू-कश्मीर होम गार्ड और सिविल डिफेंस के डिविजनल वार्डन विनोद कुमार शर्मा को मेरिटोरियस सर्विस के लिए मिला है। वह 52 सदस्यीय जेके पुलिस सूची का हिस्सा नहीं हैं।
इस अंतर को स्पष्ट रखना जरूरी है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े कुल पुरस्कारों की संख्या 53 बताई जा सकती है, लेकिन जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए आधिकारिक आंकड़ा 52 है। 53वां सम्मान होम गार्ड और सिविल डिफेंस श्रेणी से संबंधित है।
पुलिस पदकों की प्रक्रिया केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस-I डिवीजन के तहत संचालित होती है। मंत्रालय ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के लिए पुलिस, फायर सर्विस, होम गार्ड और सिविल डिफेंस तथा करेक्शनल सर्विस के कर्मियों से प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस और मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस के लिए सिफारिशें मांगी थीं।
गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर स्वतंत्रता दिवस 2026 के लिए पुरस्कार संबंधी अधिसूचनाएं और सिफारिश प्रक्रिया दर्ज है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सेवा पदक केवल स्थानीय स्तर का सम्मान नहीं हैं, बल्कि निर्धारित केंद्रीय प्रक्रिया के तहत चयनित किए जाते हैं।
इन पदकों को जम्मू-कश्मीर की पुलिस व्यवस्था के लिए संस्थागत मान्यता के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन पुरस्कारों की घोषणा को क्षेत्र में सुरक्षा हालात के अंतिम प्रमाण के रूप में देखना उचित नहीं होगा। एक अधिकारी या जवान की बहादुरी को सम्मान मिलना उसके व्यक्तिगत या यूनिट स्तर के प्रदर्शन को दर्शाता है, पूरे सुरक्षा परिदृश्य का पूर्ण आकलन नहीं।
इसी तरह गैलेंट्री मेडल की संख्या को आतंकवाद या अपराध में वृद्धि अथवा कमी से सीधे जोड़ना भी सही नहीं होगा। पुरस्कारों का संबंध विशिष्ट घटनाओं और आधिकारिक मूल्यांकन से होता है। व्यापक सुरक्षा स्थिति के लिए अलग-अलग आधिकारिक डेटा, घटनाक्रम और दीर्घकालीन रुझानों का अध्ययन जरूरी होता है।
जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस की भूमिका केवल सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं रहती। पुलिस बल को नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, आपात स्थितियों, संवेदनशील इलाकों में तैनाती और प्रशासनिक व्यवस्था में भी सक्रिय रहना पड़ता है।
इसलिए 13 मेरिटोरियस सर्विस पदक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने 38 गैलेंट्री मेडल। गैलेंट्री असाधारण जोखिम वाली कार्रवाई को मान्यता देता है, जबकि मेरिटोरियस सर्विस संस्थागत अनुशासन और लंबे समय की जिम्मेदार सेवा को रेखांकित करता है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के 52 कर्मियों में 38 को मेडल फॉर गैलेंट्री, 13 को मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस और एक अधिकारी को प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस मिला है।
एसएसपी शौकत हुसैन शाह को जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के 38 कर्मियों को मेडल फॉर गैलेंट्री मिला है। कुछ कर्मियों को बार के साथ दोबारा वीरता सम्मान भी दिया गया है।
हां। जम्मू-कश्मीर होम गार्ड और सिविल डिफेंस के डिविजनल वार्डन विनोद कुमार शर्मा को मेरिटोरियस सर्विस मेडल मिला है। लेकिन वह 52 सदस्यीय जेके पुलिस आंकड़े में शामिल नहीं हैं।
ये पदक पुलिस कर्मियों की बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और विशिष्ट सेवा को औपचारिक राष्ट्रीय मान्यता देते हैं। जम्मू-कश्मीर में पुलिस की सुरक्षा और नागरिक व्यवस्था से जुड़ी बहुस्तरीय भूमिका को देखते हुए इन सम्मानों का संस्थागत महत्व है।
स्वतंत्रता दिवस 2026 के इन सम्मानों के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए चुनौती यह रहेगी कि पुरस्कार से मिलने वाली संस्थागत पहचान को पेशेवर क्षमता और सार्वजनिक सुरक्षा में लगातार प्रदर्शन से जोड़ा जाए। गैलेंट्री पुरस्कार जहां जोखिमपूर्ण कार्रवाई को मान्यता देते हैं, वहीं मेरिटोरियस और डिस्टिंग्विश्ड सर्विस सम्मान प्रशासनिक तथा पेशेवर निरंतरता पर जोर देते हैं।
आने वाले समय में इन पदकों का वास्तविक असर इस बात से जुड़ा होगा कि पुलिस बल प्रशिक्षण, खुफिया समन्वय, तकनीकी क्षमता और नागरिकों के साथ भरोसेमंद संपर्क को किस तरह मजबूत करता है। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी उपलब्धि की स्थायी अहमियत तभी बनती है जब वह संस्थागत क्षमता में तब्दील हो।
जेके पुलिस मेडल की यह सूची सुरक्षा ड्यूटी में बहादुरी और लंबे समय की पेशेवर सेवा, दोनों को मान्यता देती है। हालांकि इन पुरस्कारों को जम्मू-कश्मीर की पूरी सुरक्षा स्थिति का अकेला पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। उनका महत्व इस बात में है कि विशिष्ट ड्यूटी और सेवा को आधिकारिक रिकॉर्ड में जगह मिली है, और आगे यही सम्मान पुलिस के पेशेवर मानकों तथा सार्वजनिक जवाबदेही को मजबूत करने की कसौटी बन सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।