फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक ऊंचाई घटने की घटना के बाद एयर इंडिया ने सभी ग्रुप पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग बढ़ाने का फैसला किया है। एक पायलट के कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना पॉजिटिव आने की रिपोर्ट है। एयरलाइन की नई स्क्रीनिंग ट्रेनिंग, उड़ान के बाद और निर्धारित बेस पर होगी। घटना की जांच जारी है।
फुकेत-दिल्ली उड़ान में हुई गंभीर एविएशन घटना के बाद एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों के लिए ड्रग स्क्रीनिंग व्यवस्था कड़ी करने का फैसला किया है। रॉयटर्स के मुताबिक एयरलाइन के एक आंतरिक मेमो में एयर इंडिया ग्रुप के पायलटों के लिए व्यापक टेस्टिंग व्यवस्था की जानकारी दी गई है। इसमें एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट भी शामिल हैं।
यह फैसला उस घटना के बाद आया है जिसमें 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली जा रहा एयर इंडिया का ए320नियो विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे चला गया था। घटना में कई यात्री और क्रू सदस्य घायल हुए थे तथा मामले की जांच जारी है।
एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में क्रूज़ के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक कमी आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विमान करीब 300 फीट नीचे गया और घटना में 17 लोग घायल हुए। मामले को गंभीर एविएशन घटना के तौर पर जांच के दायरे में रखा गया है।
शुरुआती रिपोर्टिंग में घटना को टर्बुलेंस से जोड़ा गया था, लेकिन इसके कारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ड्रग टेस्ट में सामने आई जानकारी ही विमान की ऊंचाई घटने का कारण थी।
यही वजह है कि इस मामले में दो अलग-अलग पहलुओं को अलग रखना जरूरी है। पहला, विमान से जुड़ी ऑपरेशनल घटना और उसकी तकनीकी जांच। दूसरा, पायलट के साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट का परिणाम।
घटना के बाद दोनों पायलटों का अनिवार्य पोस्ट-फ्लाइट साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग टेस्ट हुआ था। एक पायलट की शुरुआती स्क्रीनिंग रिपोर्ट नॉन-नेगेटिव आई थी, जिसके बाद आगे कन्फर्मेटरी टेस्ट कराया गया। बाद की रिपोर्टिंग में कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी सामने आई।
सूत्रों के हवाले से बताया कि फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से अभी यह स्थापित नहीं होता कि इस टेस्ट परिणाम का विमान की अचानक ऊंचाई घटने की घटना से सीधा संबंध था।
यह फर्क एविएशन सेफ्टी की जांच में बेहद अहम है। किसी टेस्ट का पॉजिटिव परिणाम अपने आप यह साबित नहीं करता कि उड़ान के दौरान पायलट की कार्यक्षमता प्रभावित थी या वही घटना का कारण था।
रॉयटर्स के मुताबिक एयर इंडिया ने अपनी ड्रग टेस्टिंग व्यवस्था को सभी पायलटों तक विस्तृत करने का फैसला किया है। टेस्ट ट्रेनिंग के दौरान, उड़ान के बाद और निर्धारित लोकेशन पर किए जाने की योजना है। इसमें गुरुग्राम स्थित एयरलाइन अकादमी और पायलटों के होम बेस जैसे स्थान शामिल हैं।
यह व्यवस्था मौजूदा रेगुलेटरी सिस्टम से आगे जाती है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा नियमों के तहत एयरलाइन को हर साल फ्लाइट क्रू के कम से कम 10 प्रतिशत का रैंडम साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट करना होता है। नई एयर इंडिया व्यवस्था इससे व्यापक स्क्रीनिंग की ओर बढ़ती है।
एयर इंडिया एक्सप्रेस भी इस विस्तारित स्क्रीनिंग दायरे में शामिल है। इसका मतलब है कि फैसला केवल एयर इंडिया की मेनलाइन ऑपरेशन तक सीमित नहीं रहेगा।
भारत के एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए के नियम पायलटों और अन्य ऑपरेशनल क्रू के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी रखते हैं। डीजीसीए के सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स के अनुसार लाइसेंसधारी व्यक्ति ऐसे साइकोएक्टिव सब्सटेंस के प्रभाव में उड़ान नहीं चला सकता जो उसकी सुरक्षित ड्यूटी निभाने की क्षमता को प्रभावित करे।
डीजीसीए के मौजूदा फ्रेमवर्क में एयर ऑपरेटरों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस की जांच की व्यवस्था रखना भी जरूरी है। 2026 में जारी डीजीसीए दस्तावेज में ऑपरेटर के लिए ऐसे परीक्षण की उपयुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता दर्ज है।
इसके अलावा इंटरनेशनल फ्लाइट्स के भारत में पहले लैंडिंग स्टेशन पर क्रू के पोस्ट-फ्लाइट ब्रीथ-एनालाइज़र टेस्ट का प्रावधान भी मौजूद है। यह शराब की जांच से संबंधित है और साइकोएक्टिव ड्रग टेस्ट से अलग प्रक्रिया है।
नहीं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
फुकेत-दिल्ली घटना की जांच अलग प्रक्रिया के तहत चल रही है। विमान की तकनीकी स्थिति, फ्लाइट डेटा, क्रू की गतिविधियां, मौसम, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और अन्य ऑपरेशनल पहलुओं की जांच से ही घटना का कारण स्पष्ट होगा। इंडियन एक्सप्रेस ने भी घटना की जांच में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की भूमिका की जानकारी दी है।
ड्रग टेस्ट का पॉजिटिव परिणाम जांच का एक महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है, लेकिन उसे अकेले घटना का कारण मानना जांच के निष्कर्ष से पहले फैसला सुनाने जैसा होगा।
एयर इंडिया का यह फैसला पैसेंजर सेफ्टी के लिहाज से अहम है। पायलटों की मेडिकल फिटनेस, अल्कोहल स्क्रीनिंग और साइकोएक्टिव सब्सटेंस की निगरानी एविएशन सेफ्टी सिस्टम के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
व्यापक स्क्रीनिंग से एयरलाइन को अपने इंटरनल सेफ्टी कंट्रोल की समीक्षा करने का अवसर भी मिलेगा। इससे यह देखा जा सकेगा कि मौजूदा टेस्टिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी है और किन चरणों पर अतिरिक्त जांच की जरूरत है।
हालांकि, ज्यादा टेस्टिंग अपने आप बेहतर सेफ्टी की गारंटी नहीं देती। टेस्ट की गुणवत्ता, लैब की विश्वसनीयता, रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल, गोपनीयता और पॉजिटिव परिणाम के बाद की कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
फुकेत-दिल्ली मामले में दोनों पायलटों को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से हटाए जाने की जानकारी पहले सामने आई थी।
किसी पायलट के खिलाफ अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई जांच और संबंधित रेगुलेटरी प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। मेडिकल या ड्रग टेस्ट के नतीजे के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया में कन्फर्मेटरी टेस्ट, मेडिकल मूल्यांकन और संबंधित नियमों का पालन अहम रहेगा।
इसलिए मौजूदा चरण में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना या यह कहना कि उसने नशे की हालत में विमान उड़ाया था, उपलब्ध सार्वजनिक साक्ष्यों से आगे जाना होगा।
एयर इंडिया पहले से ही सुरक्षा और रेगुलेटरी निगरानी के दबाव में है। फुकेत-दिल्ली घटना ने पायलट फिटनेस और ऑपरेशनल सेफ्टी से जुड़े सवालों को और प्रमुख बना दिया है।
अब एयरलाइन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे यात्रियों का भरोसा बनाए रखना है, दूसरी तरफ पायलटों की स्क्रीनिंग को ऐसा बनाना है जिससे सेफ्टी मजबूत हो और प्रक्रिया निष्पक्ष भी रहे।
एयर इंडिया की अपनी सेफ्टी सामग्री में पायलटों के लिए प्री-फ्लाइट मेडिकल और अल्कोहल चेक समेत सुरक्षा प्रक्रियाओं का उल्लेख है।
आने वाले दिनों में फुकेत-दिल्ली घटना की जांच से यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि विमान की अचानक ऊंचाई घटने के पीछे तकनीकी, मौसम संबंधी, मानवीय या अन्य कोई कारण था।
साथ ही एयर इंडिया की विस्तारित ड्रग स्क्रीनिंग व्यवस्था पर भी निगरानी रहेगी। यह देखा जाएगा कि सभी पायलटों की जांच कितनी नियमित रूप से होती है, टेस्टिंग किस प्रोटोकॉल के तहत होती है और पॉजिटिव परिणाम आने पर एयरलाइन और रेगुलेटर किस तरह कार्रवाई करते हैं।
एयर इंडिया पायलट ड्रग टेस्ट को लेकर मौजूदा घटनाक्रम को केवल एक पायलट की जांच के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह एयरलाइन के सेफ्टी कल्चर, रेगुलेटरी अनुपालन और यात्रियों के भरोसे से जुड़ा व्यापक मुआमला बन चुका है।
जब तक फुकेत-दिल्ली घटना की जांच पूरी नहीं होती, ड्रग टेस्ट और विमान की अचानक ऊंचाई घटने के बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित करना उचित नहीं होगा। फिलहाल पुष्टि की गई बात यह है कि स्क्रीनिंग के बाद एक पायलट का कन्फर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव आया और इसके बाद एयर इंडिया ने अपने पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।