फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट पर कार्रवाई की तैयारी
एयर इंडिया पायलट के डोप टेस्ट से एविएशन सिस्टम पर सवाल
फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया उड़ान के पायलट का कन्फर्मेटरी डोप टेस्ट पॉजिटिव आया है और रिपोर्ट के मुताबिक मारिजुआना की पुष्टि हुई है। 4 अगस्त की उड़ान में अचानक ऊंचाई घटने के बाद दोनों पायलटों की जांच हुई थी। एएआईबी घटना की जांच कर रहा है और डीजीसीए नियमों की समीक्षा कर रहा है।
नई दिल्ली | 12 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान एआई 2379 से जुड़े मामले में पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी डोप टेस्ट पॉजिटिव आया है। रिपोर्ट के मुताबिक लैब टेस्ट में मारिजुआना के सेवन की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मामले को लेकर एयर इंडिया के केबिन क्रू ने पायलट के व्यवहार की शिकायत की है।
यह मामला 4 अगस्त की उस उड़ान से जुड़ा है, जिसमें क्रूज के दौरान विमान की ऊंचाई अचानक घट गई थी। घटना के बाद दोनों पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग कराई गई थी। पायलट-इन-कमांड का शुरुआती टेस्ट आगे कन्फर्मेशन के लिए भेजा गया और अब उसका नतीजा पॉजिटिव बताया गया है।
एआई 2379 फुकेत से दिल्ली आ रही थी। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक गिरावट हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक विमान कुछ समय के लिए नेगेटिव-जी स्थिति में भी गया।
इस घटना में यात्रियों और क्रू के लोग घायल हुए थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट में 20 यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने का जिक्र है। शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी, इसलिए जांच पूरी होने तक आंकड़ों को सावधानी से देखना जरूरी है।
एयर इंडिया ने घटना के बाद कहा था कि विमान सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया था और मामले की जांच में वह संबंधित एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पायलटों की अनिवार्य साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग की गई थी। पायलट-इन-कमांड का शुरुआती नतीजा ऐसा था जिसे कन्फर्मेशन की जरूरत थी।
बाद में सैंपल को निर्धारित लैब भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक कन्फर्मेटरी टेस्ट में मारिजुआना पॉजिटिव पाया गया।
यहां एक अहम पत्रकारिता संबंधी फर्क समझना जरूरी है। पॉजिटिव डोप टेस्ट से शरीर में पदार्थ की मौजूदगी की पुष्टि होती है। इससे अकेले यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पायलट उड़ान के दौरान निश्चित रूप से नशे की हालत में था। उड़ान के दौरान उसके व्यवहार और उसकी फिटनेस को लेकर अलग साक्ष्य की जांच एएआईबी कर रहा है।
कई सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि पायलट उड़ान के दौरान सामान्य स्थिति में नहीं था।
रिपोर्ट में एक व्यक्ति के हवाले से कहा गया है कि पायलट कथित तौर पर फ्लाइट डेक के फर्श पर बैठा था, उसने धूम्रपान करने की कोशिश की और उसे सीट तक वापस लाने में केबिन क्रू को मदद करनी पड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक वह विमान से उतरने के बाद भी ठीक से चल नहीं पा रहा था।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि एएआईबी की जांच का महत्व बढ़ जाता है।
घटना के दौरान को-पायलट की भूमिका भी जांच के केंद्र में है।
रिपोर्ट के मुताबिक अचानक ऊंचाई घटने के बाद युवा को-पायलट ने विमान को स्थिर किया और बाद में सुरक्षित दिल्ली में लैंड कराया। रिपोर्ट के अनुसार विमान के पायलट-इन-कमांड उस समय को-पायलट की सीट के पीछे खड़े होकर झुके हुए थे।
हालांकि यह अभी जांच का विषय है कि विमान की ऊंचाई में अचानक गिरावट तकनीकी खराबियों की वजह से हुई या पायलट के व्यवहार ने इसमें कोई भूमिका निभाई।
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगा।
रिपोर्टके मुताबिक को-पायलट की रिपोर्ट में कई दुर्लभ और संभावित तकनीकी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। एएआईबी अब तकनीकी, ऑपरेशनल, मेडिकल और ह्यूमन-फैक्टर से जुड़े सभी साक्ष्यों की जांच कर रहा है।
इसलिए फिलहाल दो तथ्य अलग रखने होंगे। पायलट का कन्फर्मेटरी डोप टेस्ट पॉजिटिव होने की रिपोर्ट सामने आई है। दूसरी तरफ विमान की अचानक ऊंचाई घटने का कारण अभी आधिकारिक जांच से तय होना बाकी है।
नागर विमानन मंत्रालय ने कहा है कि एएआईबी मामले की व्यवस्थित जांच कर रहा है।
मंत्रालय के मुताबिक जांच के दौरान जुटाए गए रिकॉर्ड, बयान, मेडिकल जानकारी और अन्य सामग्री गोपनीय हैं। एएआईबी ने संबंधित पक्षों से जांच प्रक्रिया का सम्मान करने और निष्कर्ष निकालने से बचने की अपील की है।
एजेंसी तकनीकी और ऑपरेशनल पहलुओं के साथ मेडिकल तथा ह्यूमन-फैक्टर साक्ष्यों की भी समीक्षा कर रही है।
घटना के बाद डीजीसीए ने एविएशन कर्मियों में साइकोएक्टिव सब्सटेंस की जांच से जुड़े नियमों की समीक्षा शुरू की है।
रिपोर्ट के मुताबिक नियामक इन नियमों को ज्यादा सख्त बनाने के विकल्प देख रहा है। नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने भी कहा है कि मंत्रालय मामले को गंभीरता से ले रहा है और डीजीसीए से मौजूदा टेस्टिंग व्यवस्था की समीक्षा करने को कहा गया है।
यह समीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमानन में पायलट की मेडिकल और साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग सीधे यात्री सुरक्षा से जुड़ी होती है।
भारतीय विमानन नियमों के मुताबिक साइकोएक्टिव सब्सटेंस के लिए पॉजिटिव टेस्ट आने पर संबंधित कर्मी को ड्यूटी से हटाने और कन्फर्मेटरी टेस्ट की प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान है।
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अगर कन्फर्मेटरी टेस्ट भी पॉजिटिव आता है, तो कर्मचारी को डी-एडिक्शन और रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया के लिए भेजा जाता है। दोबारा सक्रिय ड्यूटी पर लौटने के लिए निगेटिव टेस्ट और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट की जरूरत होती है।
इस मामले में अंतिम कार्रवाई जांच और नियामकीय प्रक्रिया के बाद तय होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पायलट को डीजीसीए के नियमों के तहत कार्रवाई के अलावा आपराधिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।
लेकिन आपराधिक जिम्मेदारी तय होना अलग कानूनी प्रक्रिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर अभी यह कहना सही नहीं होगा कि पायलट किसी अपराध में दोषी साबित हो चुका है।
जांच एजेंसियों को यह तय करना होगा कि कौन से कानून लागू होते हैं और उपलब्ध साक्ष्य किस स्तर तक आरोप को साबित करते हैं।
यह घटना एयर इंडिया के लिए ऐसे समय आई है जब कंपनी पहले से ऑपरेशनल और सुरक्षा से जुड़े दबावों से गुजर रही है।
हालांकि किसी एक घटना के आधार पर पूरे एयर इंडिया ऑपरेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर अंतिम फैसला देना उचित नहीं होगा। जांच से यह पता चलेगा कि इस मामले में व्यक्तिगत चूक, सिस्टम की कमी या तकनीकी कारणों में से किसकी कितनी भूमिका थी।
इस मामले का सबसे बड़ा सवाल केवल एक पायलट का डोप टेस्ट नहीं है। सवाल यह भी है कि किसी पायलट की फिटनेस को लेकर शुरुआती संकेत मिलने के बाद सिस्टम कितनी तेजी और प्रभावशीलता से प्रतिक्रिया करता है।
एविएशन में सुरक्षा की पूरी व्यवस्था कई स्तरों पर काम करती है। मेडिकल जांच, ड्यूटी से पहले स्क्रीनिंग, पोस्ट-इंसिडेंट टेस्टिंग, क्रू रिपोर्टिंग और रेगुलेटरी निगरानी, सभी एक दूसरे से जुड़े होते हैं।
अगर जांच में किसी प्रक्रिया की कमजोरी सामने आती है, तो डीजीसीए को नियमों में बदलाव के साथ उनके अमल की निगरानी भी मजबूत करनी होगी।
मारिजुआना पॉजिटिव रिपोर्ट को सीधे उड़ान के समय नशे की हालत का प्रमाण मानना वैज्ञानिक और पत्रकारिता दोनों स्तर पर सावधानी मांगता है।
डोप टेस्ट का उद्देश्य प्रतिबंधित या साइकोएक्टिव पदार्थ की मौजूदगी का पता लगाना है। लेकिन पदार्थ शरीर में कब गया और उड़ान के समय उसका तत्काल प्रभाव कितना था, यह अलग सवाल है।
इसी वजह से एएआईबी की जांच में मेडिकल रिकॉर्ड, टेस्ट की प्रकृति, समय, पायलट का व्यवहार और उड़ान के तकनीकी डेटा महत्वपूर्ण होंगे।
अभी तक उपलब्ध पुष्ट जानकारी और रिपोर्टेड दावों को अलग रखना जरूरी है।
कन्फर्मेटरी डोप टेस्ट में मारिजुआना पॉजिटिव आने की रिपोर्ट टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रकाशित की है। सरकार ने एएआईबी जांच और रिकॉर्ड की गोपनीयता की पुष्टि की है। डीजीसीए नियमों की समीक्षा कर रहा है।
लेकिन विमान की ऊंचाई घटने का कारण, पायलट की उस समय वास्तविक मानसिक और शारीरिक स्थिति और डोप टेस्ट तथा उड़ान घटना के बीच सीधा संबंध अभी जांच का विषय हैं।
अब तीन स्तरों पर कार्रवाई अहम होगी।
एएआईबी यह तय करेगा कि 4 अगस्त की घटना में तकनीकी और मानवीय कारकों की क्या भूमिका थी।
डीजीसीए पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग के मौजूदा नियमों की समीक्षा करेगा।
एयर इंडिया को अपने इंटरनल सेफ्टी और क्रू रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल की भी समीक्षा करनी होगी।
इन जांचों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला व्यक्तिगत चूक तक सीमित था या सिस्टम में भी सुधार की जरूरत है।
फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया उड़ान एआई 2379 के पायलट के कन्फर्मेटरी डोप टेस्ट में मारिजुआना पॉजिटिव पाए जाने की रिपोर्ट ने मामले को गंभीर मोड़ दिया है। घटना 4 अगस्त की है, जब विमान ने उड़ान के दौरान अचानक ऊंचाई खोई और यात्रियों तथा क्रू के लोग घायल हुए।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि डोप टेस्ट के पॉजिटिव नतीजे और विमान की ऊंचाई घटने के बीच सीधा कारणात्मक संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है। एएआईबी तकनीकी, मेडिकल और ह्यूमन-फैक्टर साक्ष्यों की जांच कर रहा है।
मामले का अगला अहम पड़ाव जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट और डीजीसीए की नियामकीय समीक्षा होगी। तब पता चलेगा कि इस घटना से भारतीय एविएशन सिक्योरिटी सिस्टम में कौन से बदलाव जरूरी माने जाते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।