सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सहारनपुर जाने का ऐलान किया था। लखनऊ में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
लोकेशन
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
तारीख
7 सितंबर 2026
बाय
Wasi Siddiqui
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को लखनऊ में पुलिस ने हिरासत में लिया है। वह सहारनपुर जाने की तैयारी में थे, जहां कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद गहरा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई के दौरान अजय राय धरने पर बैठ गए, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
अजय राय ने रविवार को कहा था कि कांग्रेस का एक फैक्ट-फाइंडिंग दल ७ सितंबर को सहारनपुर पहुंचेगा। उनका कहना था कि दल घटनाक्रम की जानकारी लेगा और अधिकारियों से मुलाकात करेगा।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने अदालत के आदेश के बाद हटाया। प्रशासन के मुताबिक, यह ढांचा सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण से जुड़ा था और मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई की गई।
जिला अदालत ने ४ सितंबर को मस्जिद कमेटी की अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद शनिवार को परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। अधिकारियों ने कार्रवाई को अदालत के निर्देशों के अनुरूप बताया है।
मस्जिद कमेटी और कुछ विपक्षी नेताओं की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन का पक्ष इससे अलग है। इसलिए पूरे मामले में अदालत के आदेश, प्रशासनिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
अजय राय ने मस्जिद ध्वस्तीकरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करेगा और हालात की जानकारी जुटाएगा।
राय के मुताबिक, मस्जिद करीब एक सदी पुरानी बताई जाती है और कलेक्ट्रेट परिसर के निर्माण से पहले से वहां मौजूद होने का दावा किया जाता रहा है। यह दावा संबंधित ऐतिहासिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर अलग से जांच का विषय है।
सहारनपुर जाने के कार्यक्रम के बीच लखनऊ में पुलिस की कार्रवाई हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, अजय राय को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान उनके धरने पर बैठने की भी जानकारी सामने आई है।
हिरासत की वजह और पुलिस की ओर से लागू की गई कानूनी प्रक्रिया को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे किसी विशेष कानूनी कार्रवाई के रूप में पेश करने के बजाय पुलिस हिरासत के रूप में ही देखा जाना उचित है।
कांग्रेस ने सहारनपुर की घटना पर प्रशासनिक कार्रवाई और उसके तौर-तरीके पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि उसके प्रतिनिधिमंडल का मकसद मौके की स्थिति समझना और संबंधित पक्षों से बातचीत करना है।
कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को धार्मिक अधिकारों, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के तहत प्रक्रिया से जोड़कर देख रहा है। हालांकि, पार्टी के राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
प्रशासन का कहना है कि मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शहर मजिस्ट्रेट की अदालत ने पहले ढांचे को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ सरकारी जमीन के कथित अतिक्रमण और इस्तेमाल से संबंधित आर्थिक दायित्व भी तय किया गया था।
सहारनपुर के पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए थे। सोशल मीडिया पर अफवाहों की रोकथाम के लिए निगरानी की बात भी अधिकारियों की ओर से कही गई।
मामले में राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया की विस्तृत जांच की मांग की है।
७ सितंबर को सहारनपुर पहुंचने वाले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का घोषित उद्देश्य घटनाक्रम की जानकारी जुटाना और अधिकारियों से मुलाकात करना था। इसी सिलसिले में अजय राय के कार्यक्रम को लेकर लखनऊ में पुलिस कार्रवाई सामने आई।
अब इस पूरे घटनाक्रम में तीन स्तर महत्वपूर्ण होंगे। पहला, अदालत के आदेश और उससे जुड़े रिकॉर्ड। दूसरा, प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया। तीसरा, राजनीतिक दलों और स्थानीय पक्षों की आगे की प्रतिक्रिया।
सहारनपुर में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ राजनीतिक और सामाजिक तनाव को नियंत्रित करने की चुनौती है। वहीं विपक्ष इस मामले को लोकतांत्रिक विरोध और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे के तौर पर उठा रहा है।
अजय राय की हिरासत के बाद कांग्रेस की ओर से आगे की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचता है, तो उसकी रिपोर्ट से विवाद के विभिन्न पक्षों पर नया राजनीतिक विमर्श शुरू हो सकता है।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामला अब अदालत के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। अजय राय का सहारनपुर जाने का ऐलान और उससे पहले लखनऊ में हिरासत में लिया जाना इस तनाव को और चर्चा में ले आया है।
मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के आदेश, प्रशासनिक दस्तावेज और संबंधित पक्षों के प्रमाणित बयानों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। राजनीतिक आरोपों और प्रशासन के दावों के बीच तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करना ही इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।