बदलते मौसम में बार-बार क्यों होता है सर्दी-जुकाम?
मौसम बदलते ही कई लोगों को छींक, नाक बहना, नाक बंद होना, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। खासकर गर्मी से बारिश, बारिश से सर्दी या तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव के दौरान यह शिकायत ज्यादा महसूस हो सकती है। हालांकि, आम सर्दी-जुकाम का सीधा कारण केवल मौसम बदलना नहीं है। यह मुख्य रूप से विभिन्न श्वसन वायरस के संक्रमण से होता है।
सर्दी-जुकाम आखिर होता क्यों है?
आम सर्दी-जुकाम ऊपरी श्वसन तंत्र का वायरल संक्रमण है। इसके लिए दो सौ से अधिक तरह के श्वसन वायरस जिम्मेदार हो सकते हैं, जबकि राइनोवायरस इसके सबसे आम कारणों में शामिल है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों, नजदीकी संपर्क या दूषित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से संक्रमण फैल सकता है। यानी मौसम बदलने पर होने वाली हर सर्दी-जुकाम की समस्या को सिर्फ ठंड लगने से जोड़ना सही नहीं है।
क्या ठंड या मौसम बदलने से सीधे जुकाम हो जाता है?
यह एक आम धारणा है कि ठंडी हवा में निकलने, ठंडा पानी पीने या मौसम बदलने से सीधे जुकाम हो जाता है। लेकिन आम सर्दी-जुकाम का मूल कारण वायरस हैं। ठंडा मौसम स्वयं संक्रमण पैदा नहीं करता। हालांकि, मौसम और तापमान में बदलाव ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं जिनमें श्वसन संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ सकती है। ठंड के दौरान लोग अधिक समय बंद जगहों में एक-दूसरे के करीब बिताते हैं, जिससे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की संभावना बढ़ सकती है।
बदलते मौसम में बार-बार क्यों हो सकता है जुकाम?
बदलते मौसम में तापमान और वातावरण में बदलाव के साथ लोगों की दिनचर्या भी बदलती है। कुछ मौसमों में श्वसन वायरस अधिक सक्रिय या व्यापक रूप से प्रसारित हो सकते हैं। इसके अलावा घर, स्कूल, कार्यालय या अन्य बंद स्थानों में नजदीकी संपर्क संक्रमण के प्रसार में योगदान कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति एक जुकाम से ठीक होने के बाद किसी दूसरे वायरस के संपर्क में आ जाता है, तो उसे दोबारा सर्दी-जुकाम जैसा संक्रमण हो सकता है। चूंकि कई अलग-अलग वायरस जुकाम पैदा कर सकते हैं, एक संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद दूसरे वायरस से सुरक्षा जरूरी नहीं मिलती।
सर्दी-जुकाम के सामान्य लक्षण क्या हैं?
सर्दी-जुकाम के लक्षण आम तौर पर संक्रमण के कुछ दिनों बाद दिखाई देते हैं। इनमें मुख्य रूप से—
* छींक आना
* नाक बहना
* नाक बंद होना
* गले में खराश
* खांसी
* आवाज में भारीपन
* थकान या कमजोरी महसूस होना
* हल्का सिरदर्द
* हल्का बुखार
शामिल हो सकते हैं। लक्षण व्यक्ति और संक्रमण पैदा करने वाले वायरस के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। आम सर्दी-जुकाम के लक्षण अक्सर कुछ दिनों में अधिक महसूस होते हैं और ज्यादातर लोगों में धीरे-धीरे ठीक होने लगते हैं।
सर्दी-जुकाम और एलर्जी में क्या अंतर है?
मौसम बदलने के दौरान नाक बहना और छींक आना केवल वायरल संक्रमण की वजह से नहीं होता। कई लोगों में मौसमी एलर्जी भी इन दिनों परेशानी पैदा कर सकती है। वायरल सर्दी-जुकाम में खांसी, गले में खराश और कभी-कभी बुखार जैसे लक्षण हो सकते हैं। वहीं मौसमी एलर्जी में छींक, नाक बहना या बंद होना और आंखों में खुजली जैसी शिकायतें अधिक प्रमुख हो सकती हैं। एलर्जी आम तौर पर किसी वायरस के संक्रमण की वजह से नहीं होती, बल्कि परागकण जैसे एलर्जेन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से होती है। इसलिए हर बार नाक बहने या छींक आने को सर्दी-जुकाम मानकर दवा लेना उचित नहीं है।
संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?
सर्दी-जुकाम और अन्य श्वसन संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई की आदतें महत्वपूर्ण हैं। नियमित रूप से हाथ धोना, खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढंकना तथा बार-बार छुई जाने वाली सतहों की सफाई संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। घर या काम की जगह पर संभव हो तो ताजी हवा का आवागमन बनाए रखना भी श्वसन संक्रमणों के जोखिम को कम करने की प्रमुख रोकथाम रणनीतियों में शामिल है। अगर कोई व्यक्ति बीमार है तो दूसरों के बहुत नजदीक रहने से बचना और संक्रमण फैलने की संभावना को कम करने के लिए उचित सावधानी बरतना जरूरी है।
क्या हर बार एंटीबायोटिक लेना जरूरी है?
आम सर्दी-जुकाम अधिकतर वायरल संक्रमण के कारण होता है। एंटीबायोटिक दवाएं वायरस पर काम नहीं करतीं, इसलिए सामान्य जुकाम में इन्हें अपने आप लेना उचित नहीं है। कुछ मामलों में वायरल संक्रमण के बाद बैक्टीरियल संक्रमण जैसी जटिलता हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर जांच के बाद उपचार तय करते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं माना जाता।
आराम और पानी क्यों जरूरी है?
आम सर्दी-जुकाम में अधिकांश स्वस्थ लोगों को विशेष उपचार की जरूरत नहीं पड़ती और शरीर संक्रमण से खुद उबर सकता है। पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देना लक्षणों के दौरान मददगार हो सकता है। दवा लेने से पहले उसकी जरूरत और सही मात्रा के बारे में चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के मामले में।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
आमतौर पर सर्दी-जुकाम गंभीर बीमारी नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, शरीर में पानी की कमी, कई दिनों तक बना रहने वाला बुखार, दस दिनों से अधिक समय तक लक्षणों में सुधार न होना या ठीक होने के बाद दोबारा लक्षणों का बढ़ जाना चिकित्सकीय सलाह लेने का कारण हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर या पुरानी बीमारी है और उसके श्वसन संबंधी लक्षण बढ़ रहे हैं, तो भी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
फ्लू और अन्य संक्रमणों को लेकर भी रहें सावधान
नाक बहना, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसे लक्षण सिर्फ सामान्य सर्दी-जुकाम में ही नहीं दिखाई देते। फ्लू और कुछ अन्य श्वसन संक्रमणों में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर अलग-अलग संक्रमणों की पहचान हमेशा आसान नहीं होती। खास तौर पर अधिक जोखिम वाले लोगों में कोविड-१९ या फ्लू की आशंका होने पर चिकित्सकीय सलाह और जरूरत के अनुसार जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
निष्कर्ष
बदलते मौसम में बार-बार सर्दी-जुकाम होने का मतलब यह नहीं है कि मौसम ने सीधे संक्रमण पैदा कर दिया। आम सर्दी-जुकाम मुख्य रूप से वायरस के कारण होता है और संक्रमण संक्रमित व्यक्ति, उसकी सांस की बूंदों, नजदीकी संपर्क या दूषित सतहों के माध्यम से फैल सकता है। मौसम में बदलाव के दौरान संक्रमण फैलने की परिस्थितियां बदल सकती हैं, इसलिए इस समय स्वच्छता और सावधानी पर विशेष ध्यान देना उपयोगी है। यदि लक्षण सामान्य हैं तो आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और संक्रमण फैलने से रोकने वाली सावधानियां मददगार हो सकती हैं। लेकिन सांस लेने में परेशानी, लंबे समय तक बुखार या लगातार बिगड़ते लक्षणों को सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।