सुबह खाली पेट चाय पीने की आदत कुछ लोगों में एसिडिटी, सीने में जलन या पेट की परेशानी बढ़ा सकती है। खासकर रिफ्लक्स की समस्या वालों को सावधानी बरतनी चाहिए।
सुबह खाली पेट चाय पीना सही या गलत? जानिए विशेषज्ञों की राय
सुबह उठते ही चाय पीना भारत के लाखों लोगों की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा है। कुछ लोगों के लिए चाय दिन की शुरुआत करने का जरिया है, जबकि कई लोगों को लगता है कि इसके बिना सुबह की शुरुआत अधूरी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या खाली पेट चाय पीना सेहत के लिए सही है? वैज्ञानिक जानकारी के मुताबिक, चाय अपने आप में जरूरी तौर पर नुकसानदायक पेय नहीं है। चाय में कैफीन और पॉलीफेनॉल जैसे यौगिक पाए जाते हैं और इसके स्वास्थ्य प्रभावों पर काफी शोध हुआ है। हालांकि, खाली पेट चाय पीने का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। खासकर जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स या सीने में जलन की शिकायत रहती है, उन्हें अपनी प्रतिक्रिया पर ध्यान देना चाहिए।
खाली पेट चाय पीने से क्या समस्या हो सकती है?
चाय में कैफीन मौजूद होता है। कुछ लोगों में कैफीन पेट से जुड़ी परेशानी या एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकता है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार चाय और अन्य कैफीन वाले पेय कुछ लोगों में पेट के अम्ल के उत्पादन और सीने में जलन से जुड़े लक्षणों को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि यदि किसी व्यक्ति को सुबह खाली पेट चाय पीने के बाद पेट में जलन, खट्टी डकार, सीने में जलन, मितली या पेट में असहजता महसूस होती है, तो उसके लिए इस आदत को बदलना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को खाली पेट चाय पीने से निश्चित रूप से नुकसान होगा। शरीर की प्रतिक्रिया व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकती है।
एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स वालों को क्यों रहना चाहिए सावधान?
गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स में पेट की सामग्री वापस भोजन नली की ओर आने लगती है। इससे सीने में जलन और मुंह में खट्टा स्वाद जैसे लक्षण हो सकते हैं। राष्ट्रीय मधुमेह, पाचन एवं गुर्दा रोग संस्थान के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थ और पेय, जिनमें कैफीन भी शामिल है, कुछ लोगों में रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ा सकते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पहले से एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या है और उसे चाय पीने के बाद परेशानी बढ़ती महसूस होती है, तो चाय की मात्रा कम करना या उसे खाली पेट न पीना बेहतर विकल्प हो सकता है।
क्या चाय पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?
जरूरी नहीं। चाय को पूरी तरह नुकसानदायक पेय मानना भी सही नहीं होगा। हार्वर्ड हेल्थ में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक चाय पर हुए कई अध्ययनों में संभावित स्वास्थ्य लाभों के संकेत मिले हैं, हालांकि उपलब्ध शोध अभी इतने निर्णायक नहीं हैं कि चाय को किसी बीमारी से बचाव या इलाज का साधन माना जाए। चाय में पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। वहीं कैफीन सतर्कता और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकता है। लेकिन कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों में कम मात्रा भी बेचैनी या नींद में परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए चाय पीने का सही तरीका व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, चाय की मात्रा और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर कर सकता है।
चाय में ज्यादा चीनी डालना भी हो सकता है परेशानी
सुबह की चाय में कई लोग दो-तीन चम्मच या उससे भी अधिक चीनी डालते हैं। ऐसे में समस्या सिर्फ चाय की नहीं बल्कि अतिरिक्त चीनी के सेवन की भी हो सकती है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार ज्यादा मीठी चाय अतिरिक्त कैलोरी और चीनी का सेवन बढ़ा सकती है। इसलिए चाय को जरूरत से ज्यादा मीठा बनाने से बचना बेहतर है। यदि कोई व्यक्ति दिन में कई कप चाय पीता है और हर कप में पर्याप्त मात्रा में चीनी डालता है, तो पूरे दिन में अतिरिक्त चीनी की मात्रा काफी बढ़ सकती है।
क्या चाय पीने से पहले कुछ खाना जरूरी है?
हर व्यक्ति के लिए कोई एक अनिवार्य नियम तय नहीं किया जा सकता कि चाय पीने से पहले निश्चित रूप से कौन-सा भोजन करना चाहिए। लेकिन जिन लोगों को खाली पेट चाय से परेशानी होती है, वे इसे नाश्ते के साथ या नाश्ते के बाद लेने की कोशिश कर सकते हैं।अगर खाली पेट चाय पीने के बाद लगातार जलन या पेट की समस्या होती है, तो अपनी दिनचर्या में बदलाव करना बेहतर है। सिर्फ इसलिए आदत जारी रखना उचित नहीं कि सुबह चाय पीना लंबे समय से दिनचर्या का हिस्सा रहा है।
कितनी चाय पीना ठीक है?
चाय की सुरक्षित मात्रा हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होती क्योंकि अलग-अलग चाय में कैफीन की मात्रा अलग हो सकती है। हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार सामान्य तौर पर स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन कुल कैफीन की मात्रा चार सौ मिलीग्राम तक सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन कुछ लोगों में इससे काफी कम मात्रा भी बेचैनी या नींद में बाधा पैदा कर सकती है। इसलिए केवल कपों की संख्या देखकर कैफीन की मात्रा का अंदाजा लगाना उचित नहीं है। चाय की किस्म, उसे बनाने का तरीका और कप का आकार भी महत्वपूर्ण होता है।
बहुत गर्म चाय से भी बचें
चाय पीते समय सिर्फ खाली पेट होने की बात ही महत्वपूर्ण नहीं है। चाय को बहुत ज्यादा गर्म पीना भी उचित नहीं माना जाता। हार्वर्ड हेल्थ ने बहुत गर्म पेय पदार्थों के सेवन को भोजन नली के लिए संभावित जोखिम से जोड़ा है। इसलिए चाय को अत्यधिक गर्म अवस्था में पीने के बजाय कुछ देर ठंडा होने देना बेहतर आदत हो सकती है।
किन लोगों को खास सावधानी रखनी चाहिए?
जिन लोगों को बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार या एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है, उन्हें चाय सहित कैफीन वाले पेय अपनी समस्या बढ़ाते हैं या नहीं, इस पर ध्यान देना चाहिए। राष्ट्रीय मधुमेह, पाचन एवं गुर्दा रोग संस्थान भी रिफ्लक्स के मरीजों को उन खाद्य पदार्थों और पेय की पहचान करने की सलाह देता है जो उनके लक्षणों को बढ़ाते हैं। अगर चाय पीने के बाद लगातार पेट की परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। लगातार सीने में दर्द, निगलने में परेशानी, बार-बार उल्टी, खून आना या बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सुबह की चाय को कैसे बनाएं बेहतर आदत?
सुबह चाय पीने वालों के लिए कुछ सामान्य सावधानियां उपयोगी हो सकती हैं।
* अगर खाली पेट चाय से परेशानी होती है तो इसे नाश्ते के बाद लें।
* चाय में चीनी की मात्रा कम रखें।
* बहुत ज्यादा गर्म चाय न पिएं।
* दिनभर में बार-बार चाय पीने की आदत से बचें।
* अगर चाय से एसिडिटी या रिफ्लक्स बढ़ता है तो मात्रा कम करें।
* रात में कैफीन लेने से नींद प्रभावित होती है तो शाम के बाद चाय सीमित करें।
तो क्या खाली पेट चाय सही है या गलत?
इस सवाल का जवाब बिल्कुल सीधा सही या गलत में देना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। स्वस्थ व्यक्ति को चाय से कोई विशेष परेशानी नहीं होती तो सामान्य मात्रा में चाय उसके संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है। लेकिन खाली पेट चाय पीने के बाद यदि एसिडिटी, सीने में जलन या पेट की दूसरी परेशानी होती है, तो इस आदत को बदलना समझदारी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चाय को लेकर सोशल मीडिया पर चलने वाले हर दावे को वैज्ञानिक तथ्य न माना जाए। चाय के संभावित स्वास्थ्य लाभों पर शोध जारी है और उपलब्ध प्रमाणों की अपनी सीमाएं हैं।
निष्कर्ष
सुबह खाली पेट चाय पीना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य रूप से नुकसानदायक है, ऐसा मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेकिन कैफीन कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन जैसे लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए अगर आपको खाली पेट चाय पीने के बाद कोई परेशानी नहीं होती तो मात्रा और कैफीन सेवन पर ध्यान देते हुए इसका आनंद लिया जा सकता है। वहीं बार-बार एसिडिटी या रिफ्लक्स की शिकायत होने पर चाय का समय और मात्रा बदलना बेहतर है। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।