जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी हो सकता है नुकसानदायक, जानिए शरीर पर क्या पड़ता है असर।
पानी को अच्छी सेहत और शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, पोषक तत्वों के परिवहन और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। हालांकि, यह मानना सही नहीं है कि जितना ज्यादा पानी पिया जाए, सेहत को उतना ही अधिक फायदा होगा। कम समय में जरूरत से बहुत ज्यादा पानी पीने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। गंभीर स्थिति में यह समस्या जानलेवा भी हो सकती है।
शरीर में पानी की क्या भूमिका है?
पानी शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल है। यह शरीर का तापमान नियंत्रित करने, जोड़ों को चिकनाई देने, पाचन में मदद करने और पेशाब के जरिए अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में भूमिका निभाता है। शरीर को पानी की जरूरत उम्र, शारीरिक गतिविधि, मौसम, खानपान और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। गर्मी, बुखार, उल्टी-दस्त या अधिक पसीना आने पर शरीर में पानी की जरूरत बढ़ सकती है। वहीं, कुछ लोगों को हृदय, गुर्दे या अन्य बीमारियों के कारण डॉक्टर की सलाह के अनुसार तरल पदार्थों का सेवन सीमित रखना पड़ सकता है।
जरूरत से ज्यादा पानी पीने पर क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति कम समय में बहुत अधिक पानी पी लेता है, तो शरीर के लिए अतिरिक्त पानी को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है। इससे रक्त में सोडियम की सांद्रता कम हो सकती है। इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया (Hyponatremia) कहा जाता है।
सोडियम शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने और तंत्रिकाओं तथा मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है। इसका स्तर बहुत कम हो जाने पर कोशिकाओं में पानी का असामान्य जमाव हो सकता है। गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी आपात स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, हाइपोनेट्रेमिया केवल ज्यादा पानी पीने से ही नहीं होता। कुछ बीमारियां, दवाएं और शरीर में पानी-सोडियम के संतुलन को प्रभावित करने वाली अन्य स्थितियां भी इसका कारण बन सकती हैं।
ज्यादा पानी पीने के लक्षण क्या हो सकते हैं?
शरीर में पानी की अधिकता और रक्त में सोडियम की कमी होने पर लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआती संकेतों में मतली, सिरदर्द और असामान्य थकान शामिल हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में भ्रम, मांसपेशियों में ऐंठन, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
इन लक्षणों को केवल ज्यादा पानी पीने का परिणाम मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इनके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। फिर भी, बहुत अधिक पानी पीने के बाद भ्रम, दौरे या चेतना में बदलाव हो तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
कुछ लोगों में शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में तरल पदार्थों का अत्यधिक सेवन जोखिम बढ़ा सकता है।
गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे लोग: गुर्दों की कार्यक्षमता कम होने पर अतिरिक्त पानी बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
हृदय या लिवर की कुछ बीमारियों से पीड़ित लोग: शरीर में तरल पदार्थ जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ दवाएं लेने वाले लोग: विशेष रूप से कुछ मूत्रवर्धक दवाएं और शरीर में पानी के नियमन को प्रभावित करने वाली दवाएं सोडियम के स्तर पर असर डाल सकती हैं।
खेल या व्यायाम करने वाले लोग
लंबे समय तक गतिविधि के दौरान जरूरत से ज्यादा सादा पानी पीना, खासकर जब पसीने से सोडियम भी निकल रहा हो, जोखिम पैदा कर सकता है। इन स्थितियों में पानी की मात्रा व्यक्ति की बीमारी, दवाओं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार तय की जानी चाहिए।
दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए पानी की एक जैसी मात्रा तय करना सही नहीं है। जरूरत मौसम, शारीरिक मेहनत, भोजन, उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर बदलती है। इसके अलावा, शरीर को मिलने वाले तरल पदार्थों में केवल सादा पानी ही नहीं, बल्कि अन्य पेय और भोजन में मौजूद पानी भी शामिल होता है।
स्वस्थ वयस्कों के लिए प्यास के संकेतों पर ध्यान देना और दिनभर नियमित रूप से तरल पदार्थ लेना एक व्यावहारिक तरीका है। हालांकि, गर्मी, अधिक पसीना, बीमारी या व्यायाम के दौरान जरूरत बदल सकती है। वहीं, डॉक्टर ने यदि तरल पदार्थ सीमित रखने की सलाह दी है, तो उसी का पालन करना चाहिए।
ध्यान रखें: किसी एक निश्चित संख्या को सभी लोगों के लिए अनिवार्य नियम न मानें। बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में पानी पीने की चुनौती या प्रतियोगिता से बचें।
ज्यादा प्यास लगना भी हो सकता है संकेत
यदि पर्याप्त पानी पीने के बावजूद लगातार बहुत ज्यादा प्यास लगती है या बार-बार पेशाब आता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कभी-कभी इसके पीछे मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।
बचाव के लिए क्या करें?
दिनभर जरूरत के अनुसार नियमित अंतराल पर पानी पिएं।
थोड़े समय में बहुत अधिक पानी पीने से बचें।
लंबे व्यायाम या खेल के दौरान तरल पदार्थों की जरूरत को गतिविधि और मौसम के अनुसार समझें।
गुर्दे, हृदय या लिवर की बीमारी होने पर डॉक्टर की बताई तरल सीमा का पालन करें।
लगातार अत्यधिक प्यास, असामान्य सिरदर्द या मतली होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
भ्रम, दौरे या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण होने पर तुरंत आपातकालीन सहायता लें।
निष्कर्ष
पानी शरीर की जरूरत है, लेकिन इसका सेवन संतुलित होना चाहिए। जरूरत से बहुत ज्यादा पानी, खासकर कम समय में पीने से रक्त में सोडियम का स्तर कम हो सकता है और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए किसी लोकप्रिय सलाह या तय संख्या के पीछे भागने के बजाय अपनी शारीरिक जरूरत, मौसम और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख सामान्य जन-जागरूकता के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं। पानी की मात्रा को लेकर कोई विशेष चिकित्सकीय निर्देश मिला है, तो उसका पालन करें।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।