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न्यूयॉर्क में भागवत कार्यक्रम के बाहर तिरंगे को लेकर विवाद,रिजिजू ने जताई कड़ी आपत्ति
Asif Khan
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2026-08-31 07:59:24
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फाड़े जाने की तस्वीरें सामने आईं। किरेन रिजिजू ने राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर कड़ी आपत्ति जताई।
📍 Newyork 🗓️ 31 August 2026 ✍️ Asif Khan
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के दौरान बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और उसे फाड़े जाने की तस्वीरें सामने आई हैं। इस घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि किसी संगठन या सरकार का विरोध लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन भारत और उसके राष्ट्रीय ध्वज का अपमान स्वीकार्य नहीं है।
मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन के बाहर क्या हुआ
२९ अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में मोहन भागवत ने एक बड़े भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकी हिंदू संगठनों से जुड़े मंच द्वारा किया गया था और इसमें करीब पांच हजार लोगों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है। कार्यक्रम को लेकर पहले से ही अमेरिका में कई संगठनों की ओर से विरोध दर्ज कराया जा रहा था।
कार्यक्रम के बाहर सिख प्रदर्शनकारियों के साथ कई अन्य समूहों ने भी विरोध किया। एसोसिएटेड प्रेस की तस्वीरों में प्रदर्शन के दौरान भारतीय ध्वज को फाड़ते और जमीन पर पैरों तले आते हुए दिखाया गया है। इन तस्वीरों के आधार पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला सामने आया है।
इंटरनेशनल रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की ओर से खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए गए। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों को एक ही संगठन या विचारधारा से जोड़ना उचित नहीं होगा, क्योंकि विरोध में धार्मिक, नागरिक अधिकार और अन्य संगठन भी मौजूद थे।
प्रदर्शनकारियों की आपत्ति क्या थी
विरोध करने वाले समूहों का मुख्य निशाना आरएसएस की विचारधारा और भारत में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे रहे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस और बीजेपी पर भारत को हिंदू राष्ट्र की दिशा में ले जाने का आरोप लगाया।
आरएसएस इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और स्वयं को हिंदू समाज को संगठित करने वाला सांस्कृतिक संगठन बताता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरएसएस की विचारधारा और भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को लेकर अमेरिका में पहले से सार्वजनिक बहस जारी है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि कार्यक्रम का विरोध केवल खालिस्तान समर्थक समूहों तक सीमित नहीं था। धार्मिक, नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भी कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसलिए पूरे विरोध-प्रदर्शन को केवल एक संगठन की गतिविधि के रूप में देखना घटनाक्रम की पूरी तस्वीर नहीं देता।
तिरंगे को लेकर सामने आई तस्वीरों ने बढ़ाया विवाद
घटना का सबसे संवेदनशील पहलू भारतीय राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ा है। एसोसिएटेड प्रेस की तस्वीरों में एक प्रदर्शनकारी को भारतीय ध्वज फाड़ते हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरी तस्वीर में प्रदर्शनकारियों के पैरों के नीचे भारतीय ध्वज दिखाई देता है।
इस घटनाक्रम के बाद भारत में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि सरकार, आरएसएस या बीजेपी की आलोचना करने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज और देश का अपमान अलग विषय है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी।
रिजिजू की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने इस घटना को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं देखा, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीक के सम्मान से जुड़े मुद्दे के तौर पर उठाया है।
न्यूयॉर्क प्रशासन और जोहरान ममदानी की भूमिका
इस विवाद का एक दूसरा पहलू न्यूयॉर्क शहर के प्रशासन से जुड़ा है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भागवत के कार्यक्रम का समर्थन नहीं किया था। आधिकारिक मेयर कार्यालय की बातचीत के रिकॉर्ड में ममदानी ने आरएसएस की कथित बहिष्कारी विचारधारा का विरोध किया और कहा कि उन्हें निजी कार्यक्रम रद्द करने के लिए शहर के अधिकार क्षेत्र को लेकर संदेह है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ममदानी ने प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किया। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड इसके बजाय यह दिखाता है कि उन्होंने कार्यक्रम के प्रति अपनी राजनीतिक असहमति व्यक्त की थी, जबकि निजी कार्यक्रम को रद्द करने के लिए शहर के अधिकार पर सवाल उठाया था।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजनीतिक विरोध और किसी प्रदर्शन में प्रत्यक्ष भागीदारी दो अलग-अलग बातें हैं।
कार्यक्रम के भीतर भागवत ने क्या कहा
विरोध के बीच मोहन भागवत ने मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित किया। उनके भाषण का केंद्रीय विषय विविधता, एकता और मानवता रहा।
भागवत ने भारत की विविधता में एकता को उसकी मूल विशेषता बताते हुए कहा कि अलग-अलग धर्म, भाषा और जीवन-पद्धतियों के बावजूद समाज में एकता की भावना कायम रहनी चाहिए। उनके भाषण में भारतीय प्रवासियों से अमेरिका में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भारतीय सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की बात भी सामने आई।
यह उल्लेखनीय है कि जिस कार्यक्रम के बाहर आरएसएस की विचारधारा को लेकर तीखा विरोध हो रहा था, उसी मंच से भागवत ने एकता और विविधता का संदेश दिया।
विरोध का व्यापक राजनीतिक संदर्भ
मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा ऐसे समय हुई है जब आरएसएस की वैश्विक भूमिका, भारत में उसकी विचारधारा और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।
न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी के अलावा कुछ अमेरिकी संगठनों और अधिकार समूहों ने भी कार्यक्रम पर आपत्ति जताई थी। दूसरी तरफ, कार्यक्रम के आयोजकों और समर्थक संगठनों ने इसे भारतीय संस्कृति, संवाद और वैश्विक एकता को सामने रखने वाला आयोजन बताया।
इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी एकरूप नजर नहीं आया। समुदाय के भीतर आरएसएस के समर्थन और विरोध, दोनों तरह की आवाजें मौजूद हैं। यही वजह है कि न्यूयॉर्क का यह आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रवासी भारतीय समुदाय के भीतर चल रही वैचारिक बहस का भी केंद्र बन गया।
तिरंगे के अपमान पर आगे क्या
राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े किसी भी विवाद में तस्वीरों और वीडियो की प्रामाणिकता, घटना की पूरी परिस्थितियों और स्थानीय कानून के तहत कार्रवाई जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। उपलब्ध तस्वीरों में ध्वज फाड़े जाने और पैरों तले आने की घटना दिखाई देती है, लेकिन इस रिपोर्ट में किसी संभावित आपराधिक कार्रवाई या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की जा रही है।
न्यूयॉर्क प्रशासन या स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से घटना को लेकर आगे कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने आती है तो उसकी अलग से पुष्टि जरूरी होगी।
विरोध और राष्ट्रीय सम्मान के बीच सवाल
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति, संगठन या सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है। इसी तरह राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान भी सार्वजनिक जीवन का संवेदनशील हिस्सा है।
मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन के बाहर का घटनाक्रम इसी दोहरे सवाल को सामने लाता है। आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ राजनीतिक या वैचारिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन विरोध के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के साथ कथित दुर्व्यवहार ने बहस को एक अलग दिशा दे दी है।
बॉटम लाइन: न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शन ने आरएसएस की विचारधारा, प्रवासी भारतीय राजनीति और खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर बहस तेज कर दी है। लेकिन इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पक्ष भारतीय तिरंगे से जुड़ी तस्वीरें हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया ने इसे भारत के राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दे के रूप में रेखांकित किया है। आगे की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या कानून प्रवर्तन की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।