उत्तरी इराक में ड्रोन हमले, एरबिल समेत कई इलाके निशाने पर
एरबिल के पास ड्रोन हमलों से बढ़ी इराक की सुरक्षा चिंता
उत्तरी इराक में कई ड्रोन, गठबंधन ने कुछ हमले नाकाम किए
उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में एरबिल, सोरान और खलीफान समेत कई इलाकों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई। अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयर डिफेंस ने एरबिल के ऊपर एक और सोरान सीमा क्षेत्र में तीन ड्रोन मार गिराए। हताहतों और नुकसान की आधिकारिक पुष्टि तत्काल नहीं हुई थी।
एरबिल, उत्तरी इराक | 28 जुलाई 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में कई ड्रोन हमलों की रिपोर्ट सामने आई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक एरबिल, सोरान और खलीफान को निशाना बनाया गया। धमाकों की आवाजें कुर्दिस्तान क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में सुनी गईं।
अनादोलु एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयर डिफेंस ने एरबिल के ऊपर एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, जबकि ईरान की सीमा से लगे सोरान इलाके में तीन अन्य ड्रोन मार गिराए गए। शुरुआती रिपोर्टों में हमलों के बाद किसी मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई थी।
एरबिल इराक के कुर्दिस्तान रीजन की राजधानी है और यहां अमेरिकी तथा गठबंधन से जुड़ी सैन्य मौजूदगी रही है। शहर में अमेरिकी कॉन्सुलेट और एरबिल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास संवेदनशील सुरक्षा प्रतिष्ठान भी मौजूद हैं।
सोरान और खलीफान एरबिल के उत्तर-पूर्व में स्थित क्षेत्र हैं। इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति ईरान की सीमा के करीब होने के कारण मौजूदा क्षेत्रीय तनाव में इन्हें खास सिक्योरिटी संवेदनशीलता हासिल है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इसी घटनाक्रम में एरबिल के आसपास कम से कम सात धमाकों की आवाजें सुनी गई थीं। कुछ धमाके अमेरिकी कॉन्सुलेट के आसपास के क्षेत्र में भी बताए गए।
हमलों में शामिल कुल ड्रोन की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में पूरी तरह एक समान जानकारी नहीं थी।
अनादोलु एजेंसी ने स्थानीय रिपोर्टों के हवाले से बताया कि गठबंधन ने एरबिल के ऊपर एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया और सोरान के पास तीन अन्य ड्रोन गिराए।
रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस सूत्रों के मुताबिक कम से कम चार ईरानी ड्रोन ने खलीफान और सोरान इलाकों को निशाना बनाया था।
इसलिए उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सुरक्षित है कि कई ड्रोन ऑपरेशन में शामिल थे, लेकिन सभी ड्रोन की संख्या और उनकी अंतिम स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।
यह इस घटनाक्रम का सबसे अहम अनसुलझा सवाल है।
उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में ड्रोन को ईरान से जुड़ा बताया गया। एनडीटीवी ने अल जज़ीरा के पुलिस सूत्रों के हवाले से इन्हें ईरानी ड्रोन बताया।
लेकिन हमले की जिम्मेदारी का कोई स्वतंत्र और निर्णायक सबूत सामने नहीं आया था। इसलिए इसे सीधे ईरान का आधिकारिक हमला घोषित करना सावधानी के खिलाफ होगा।
यह फर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तरी इराक में ईरान, ईरानी कुर्द विपक्षी संगठनों, स्थानीय मिलिशिया और अमेरिकी सैन्य मौजूदगी से जुड़े कई अलग-अलग सुरक्षा समीकरण मौजूद हैं।
कुर्दिस्तान रीजन लंबे समय से ईरान की सुरक्षा चिंताओं के केंद्र में रहा है। उत्तरी इराक में ईरानी कुर्द विपक्षी संगठनों के कैंप मौजूद हैं, जिन्हें तेहरान अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
अनादोलु एजेंसी के मुताबिक ईरान पहले भी एरबिल और सुलेमानिया में ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों के ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। इन हमलों के साथ-साथ अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और एरबिल में अमेरिकी कॉन्सुलेट के आसपास भी सुरक्षा घटनाएं हुई हैं।
यानी मौजूदा ड्रोन घटनाक्रम किसी बिल्कुल नए सिक्योरिटी पैटर्न की शुरुआत नहीं है। यह उस व्यापक क्षेत्रीय तनाव की कड़ी है, जिसमें ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का असर इराक के कुर्दिस्तान रीजन तक पहुंचता रहा है।
इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से ईरान समर्थक समूहों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रही है।
एरबिल में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान और एयरपोर्ट के आसपास का क्षेत्र पहले भी ड्रोन और रॉकेट हमलों का सामना कर चुका है। मार्च 2026 में भी एरबिल एयरपोर्ट के पास अमेरिकी-संबद्ध सैन्य साइट को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया था। हमले के बाद आग लगने की सूचना मिली थी।
मार्च में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयर डिफेंस ने एरबिल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक अज्ञात ड्रोन को भी नष्ट किया था। उस घटना में किसी के हताहत होने की रिपोर्ट नहीं थी।
इससे स्पष्ट होता है कि एरबिल के आसपास ड्रोन खतरा लगातार सिक्योरिटी एजेंडा का हिस्सा बना हुआ है।
कुर्दिस्तान रीजन की समस्या यह है कि उसे एक साथ कई सुरक्षा दबावों का सामना करना पड़ता है।
एक तरफ अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की सैन्य मौजूदगी है। दूसरी तरफ ईरानी कुर्द संगठनों के ठिकाने हैं। इसके अलावा तुर्की भी इराकी कुर्दिस्तान में पीकेके के खिलाफ नियमित सैन्य कार्रवाई करता रहा है।
इस वजह से क्षेत्र की स्थानीय आबादी को अलग-अलग दिशाओं से सैन्य दबाव का सामना करना पड़ता है।
कुर्दिस्तान रीजन में फरवरी से मई 2026 के बीच ईरान से जुड़े हमलों को लेकर कम्युनिटी पीसमेकर टीम्स ने 751 हमलों का दस्तावेजीकरण किया था। इसमें ड्रोन, रॉकेट, मिसाइल, आर्टिलरी और गोलीबारी की घटनाएं शामिल थीं। यह आंकड़ा एक स्वतंत्र निगरानी संगठन की रिपोर्ट है, इसलिए इसे आधिकारिक इराकी आंकड़े के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
नहीं।
हाल के महीनों में उत्तरी इराक में ड्रोन हमलों का दायरा सैन्य और राजनीतिक लक्ष्यों से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे तक भी पहुंचा है।
जून 2026 में कुर्दिस्तान रीजनल गवर्नमेंट ने बताया था कि एरबिल प्रांत के कुश्तापा जिले में एक नागरिक सुविधा को दो विस्फोटक ड्रोन से निशाना बनाया गया। उस हमले में किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
इसी तरह उत्तरी इराक के कोरमोर गैस फील्ड पर ड्रोन हमले ने गैस सप्लाई को प्रभावित किया था और एरबिल तथा सुलेमानिया में बिजली संकट पैदा हुआ था।
इससे मामला केवल सैन्य सुरक्षा का नहीं रहता। ऊर्जा, बिजली, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी सीधे प्रभावित होती है।
उत्तरी इराक में लगातार विदेशी ड्रोन और मिसाइल हमले बगदाद के सामने संप्रभुता का गंभीर सवाल भी खड़ा करते हैं।
इराकी सरकार के लिए चुनौती यह है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रीय ताकतों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हो रहा है। ईरान अपने विरोधी कुर्द संगठनों को निशाना बनाता है। तुर्की पीकेके के खिलाफ कार्रवाई करता है। अमेरिका और गठबंधन अपने सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है।
इस तरह इराक का उत्तरी इलाका क्षेत्रीय जियोपॉलिटिक्स में एक सक्रिय सिक्योरिटी थिएटर बन गया है।
मौजूदा घटनाक्रम में एयर डिफेंस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एरबिल के ऊपर एक ड्रोन को इंटरसेप्ट करना और सोरान इलाके में तीन अन्य ड्रोन को मार गिराना इस बात का संकेत है कि अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन और स्थानीय सुरक्षा बल ड्रोन खतरे को लगातार ट्रैक कर रहे हैं।
लेकिन ड्रोन डिफेंस आसान चुनौती नहीं है। छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को पहचानना और उन्हें कम लागत में रोकना महंगा और तकनीकी रूप से कठिन हो सकता है।
इसी वजह से लंबे समय तक चलने वाले ड्रोन हमले किसी क्षेत्र की एयर डिफेंस क्षमता पर लगातार दबाव डालते हैं।
उत्तरी इराक में हर नया ड्रोन हमला अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक टकराव के संदर्भ में देखा जाता है।
अगर किसी हमले में अमेरिकी सैनिक या महत्वपूर्ण अमेरिकी प्रतिष्ठान सीधे प्रभावित होते हैं, तो वॉशिंगटन पर जवाब देने का दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ ईरान या उसके समर्थक समूह अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को अपनी कार्रवाई का कारण बताते रहे हैं।
इसलिए एरबिल और आसपास के इलाकों में कोई भी बड़ी घटना स्थानीय सीमा से बाहर जाकर व्यापक क्षेत्रीय प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है।
हालांकि मौजूदा घटनाक्रम में तत्काल अमेरिकी सैन्य जवाब की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं थी। इसलिए किसी बड़े प्रतिशोध की भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।
ड्रोन हमलों का सबसे बड़ा जोखिम तब पैदा होता है जब सैन्य लक्ष्य घनी आबादी वाले इलाकों के करीब हों।
एरबिल एक बड़ा शहरी केंद्र है। एयरपोर्ट, कॉन्सुलेट और सैन्य प्रतिष्ठान शहर के आसपास स्थित हैं। ऐसे में इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन का मलबा भी नुकसान पैदा कर सकता है।
हालिया घटनाक्रम में तत्काल बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों की पुष्टि नहीं हुई थी। लेकिन लगातार हवाई हमलों से स्थानीय आबादी में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
उत्तरी इराक की मौजूदा स्थिति को केवल “ड्रोन हमला” कहकर समझना पर्याप्त नहीं होगा।
यह क्षेत्र ईरान-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता, ईरानी कुर्द विपक्ष, तुर्की-पीकेके संघर्ष और इराकी संघीय सरकार तथा कुर्दिस्तान रीजनल गवर्नमेंट के बीच सुरक्षा समीकरणों से प्रभावित है।
यही वजह है कि किसी एक हमले के पीछे जिम्मेदार पक्ष की पहचान भी कई बार तुरंत स्पष्ट नहीं होती।
उपलब्ध रिपोर्टों में मौजूदा हमलों के लिए ईरानी ड्रोन का जिक्र है, लेकिन जिम्मेदारी और लक्ष्य के बारे में स्वतंत्र पुष्टि सीमित थी। इसलिए खबर का केंद्र घटना और उपलब्ध सुरक्षा जानकारी पर रहना चाहिए, न कि अपुष्ट आरोपों पर।
आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह होगा कि क्या एरबिल और आसपास के इलाकों में ड्रोन हमले दोहराए जाते हैं।
अगर हमले जारी रहते हैं, तो कुर्दिस्तान रीजन में एयर डिफेंस, अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और स्थानीय सुरक्षा बलों पर दबाव बढ़ेगा।
अगर किसी हमले में अमेरिकी या इराकी सुरक्षा कर्मियों की बड़ी संख्या में मौत होती है, तो प्रतिक्रिया का स्तर बदल सकता है। दूसरी तरफ हमलों में कमी आती है तो क्षेत्रीय तनाव सीमित रखने की गुंजाइश बनी रहेगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से किसी बड़े नए युद्ध की शुरुआत का निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगा।
उत्तरी इराक में एरबिल, सोरान और खलीफान को निशाना बनाए गए ड्रोन हमलों ने एक बार फिर कुर्दिस्तान रीजन की नाज़ुक सिक्योरिटी स्थिति को सामने ला दिया है।
अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयर डिफेंस ने कई ड्रोन को इंटरसेप्ट या नष्ट किया। तत्काल बड़े पैमाने पर हताहतों की पुष्टि नहीं हुई थी।
मामले की सबसे अहम बात यह है कि उत्तरी इराक अब भी अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्रीय प्रॉक्सी संघर्ष का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। यहां होने वाला एक ड्रोन हमला केवल स्थानीय घटना नहीं रहता। इसका असर इराक की संप्रभुता, कुर्दिस्तान की सुरक्षा और पूरे मिडिल ईस्ट के जियोपॉलिटिकल संतुलन पर पड़ सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।