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नेपाल के पूर्व PM शेर बहादुर देउबा पांच महीने बाद स्वदेश लौटे

Shah Times 2026-08-13 16:02:02
नेपाल के पूर्व PM शेर बहादुर देउबा पांच महीने बाद स्वदेश लौटे
  1. नेपाल लौटे पूर्व PM शेर बहादुर देउबा, जांच के बीच वापसी
  2. पांच महीने बाद नेपाल पहुंचे देउबा, मनी लॉन्ड्रिंग जांच जारी
  3. विदेश प्रवास खत्म कर नेपाल लौटे देउबा, जांच पर सबकी नज़र

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा करीब पांच महीने विदेश में रहने के बाद स्वदेश लौट आए हैं। उनकी वापसी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बीच हुई है। देउबा और उनकी पत्नी आरज़ू राणा ने पहले जांच में सहयोग का भरोसा दिया था। अब उनकी वापसी के बाद जांच की अगली कार्रवाई अहम होगी।


काठमांडू, नेपाल | 13 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स

By Mohd Haris


पांच महीने बाद नेपाल लौटे शेर बहादुर देउबा

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा करीब पांच महीने विदेश में रहने के बाद नेपाल लौट आए हैं। उनकी वापसी ऐसे वक्त हुई है जब नेपाल में उनके और उनकी पत्नी आरज़ू राणा देउबा से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच को लेकर सियासी और कानूनी निगाहें टिकी हुई हैं। 13 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक देउबा स्वदेश लौट आए हैं।

देउबा फरवरी 2026 में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए सिंगापुर गए थे। बाद में वह हांगकांग पहुंचे। लंबे विदेश प्रवास के दौरान उनकी गैरमौजूदगी को लेकर नेपाल की सियासत में सवाल उठते रहे। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक देउबा और आरज़ू राणा ने जून में मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग को पत्र भेजकर नेपाल लौटने और जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई थी।

मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बीच वापसी

देउबा की स्वदेश वापसी का सबसे अहम पहलू मौजूदा जांच है। नेपाल के Department of Money Laundering Investigation ने देउबा परिवार से जुड़े वित्तीय मामलों की तहक़ीक़ात आगे बढ़ाई है। जांच में देउबा परिवार के सदस्यों और कुछ कथित वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की गई है।

जुलाई में काठमांडू पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि जांच एजेंसी की चार्जशीट में देउबा के बेटे जयबीर देउबा से जुड़ी कंपनियों को 26 मिलियन नेपाली रुपये के ट्रांसफर का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार यह रकम कारोबारी दीपक भट्ट से जुड़ी कंपनी से जयबीर देउबा की कंपनियों तक पहुंची थी। यह आरोप और जांच का हिस्सा है, इसे अदालत द्वारा स्थापित दोष के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

देउबा दंपती ने क्या कहा था

जून में देउबा और आरज़ू राणा ने जांच विभाग को बताया था कि वे विदेश में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए मौजूद हैं और जांच से बचने के लिए नेपाल से फरार नहीं हुए हैं। उन्होंने दो महीने के भीतर नेपाल लौटने और जांच में सहयोग करने की बात कही थी।

काठमांडू पोस्ट के अनुसार दंपती ने अधिकारियों से ऐसा माहौल बनाने का अनुरोध किया था जिसमें उनकी स्वदेश वापसी के दौरान अनावश्यक कानूनी बाधा न आए। उन्होंने निष्पक्ष और सबूत आधारित जांच में सहयोग करने की बात कही थी।

गिरफ्तारी वारंट और इंटरपोल विवाद

देउबा और आरज़ू राणा के विदेश में रहने के दौरान मामला कानूनी तौर पर भी संवेदनशील हुआ। अप्रैल 2026 में काठमांडू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद उन्हें नेपाल के बाहर तलाशने और इंटरपोल के जरिए कार्रवाई की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

हालांकि मई में काठमांडू पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि इंटरपोल ने देउबा दंपती के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने से इनकार किया। रिपोर्ट के मुताबिक इंटरपोल ने मामले में विशिष्ट आरोपों और जांच की मौजूदा स्थिति से जुड़े अतिरिक्त विवरण मांगे थे।

इसलिए देउबा की नेपाल वापसी को सीधे गिरफ्तारी या दोषसिद्धि से जोड़ना उचित नहीं होगा। मौजूदा स्थिति में जांच, कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध सबूत अलग-अलग स्तर के मुआमले हैं।

लंबा विदेश प्रवास क्यों बना सियासी मुद्दा

देउबा के लंबे विदेश प्रवास ने नेपाली कांग्रेस और नेपाल की सियासत में कई सवाल पैदा किए। मई की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि वह फरवरी में सिंगापुर जाने के बाद हांगकांग पहुंच गए थे और कई महीनों तक वापस नहीं लौटे।

इस दौरान आलोचकों ने आरोप लगाया कि वह जांच से बचने के लिए विदेश में रह रहे हैं। दूसरी तरफ देउबा पक्ष ने मेडिकल ट्रीटमेंट को विदेश में रहने की प्रमुख वजह बताया और जांच में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई। यही विरोधाभासी नैरेटिव इस पूरे मामले को सियासी तौर पर संवेदनशील बनाता रहा।

बेटे से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू देउबा परिवार की संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक जुलाई में दाखिल चार्जशीट में जयबीर देउबा की कंपनियों को 26 मिलियन नेपाली रुपये के ट्रांसफर का विवरण सामने आया।

जुलाई में नेपाल न्यूज़ ने यह भी रिपोर्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग ने जयबीर देउबा को पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस जारी किया था। नोटिस में उन्हें निर्धारित समय के भीतर जांच अधिकारियों के सामने उपस्थित होने को कहा गया था।

इन मामलों में आरोप, जांच और अदालत में साबित तथ्य के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों से जांच की मौजूदगी स्थापित होती है, लेकिन इससे देउबा या उनके परिवार के किसी सदस्य की अंतिम कानूनी दोषसिद्धि साबित नहीं होती।

देउबा की वापसी के बाद क्या बदलेगा

देउबा की वापसी के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि नेपाली जांच एजेंसियां उनके साथ किस तरह आगे बढ़ती हैं। जांच विभाग के सामने उनके बयान, दस्तावेज़ और वित्तीय रिकॉर्ड अहम हो सकते हैं।

उनकी वापसी इस वजह से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने पहले स्वयं जांच में सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई थी। अब उनके नेपाल पहुंचने के बाद जांच एजेंसियों को उस प्रतिबद्धता को औपचारिक जांच प्रक्रिया में बदलने का अवसर मिलेगा।

दूसरी तरफ नेपाली कांग्रेस की सियासत पर भी इसका असर पड़ सकता है। देउबा लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे हैं। जांच की दिशा और उनके खिलाफ आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पार्टी की आंतरिक राजनीति और उनकी सार्वजनिक भूमिका दोनों को प्रभावित कर सकती है।

क्या वापसी का मतलब आरोप साबित होना है?

नहीं। यह फर्क महत्वपूर्ण है। मनी लॉन्ड्रिंग जांच चलना और अदालत में अपराध साबित होना दो अलग कानूनी स्थितियां हैं।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक देउबा और उनकी पत्नी ने आरोपों से इनकार किया है और जांच में सहयोग की बात कही है। इंटरपोल से जुड़े घटनाक्रम ने भी दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी व्यक्ति के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने के लिए अलग कानूनी मानदंड लागू होते हैं।

इसलिए देउबा की वापसी को जांच में एक अहम पेशरफ़्त के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे दोषसिद्धि के संकेत के तौर पर पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

नेपाल की सियासत पर असर

देउबा की वापसी ऐसे दौर में हुई है जब नेपाल की राजनीति में पुरानी राजनीतिक ताकतों और नई सियासी ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज है। उनके विदेश प्रवास ने पहले ही नेपाली कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति को लेकर बहस बढ़ाई थी।

अब उनकी वापसी के बाद पार्टी के भीतर उनकी भूमिका, जांच पर उनका रुख और सरकार के साथ उनका कानूनी मुआमला महत्वपूर्ण रहेगा। अगर जांच आगे बढ़ती है तो इसका असर नेपाली कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।

आगे की तस्वीर

अब तीन चीजों पर सबसे ज्यादा नज़र रहेगी। पहली, मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग देउबा से किस स्तर पर पूछताछ करता है। दूसरी, जांच में सामने आए वित्तीय दस्तावेज़ों की कानूनी स्थिति क्या बनती है। तीसरी, क्या मामला आगे चलकर विशेष अदालत या किसी अन्य न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचता है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि देउबा विदेश में करीब पांच महीने रहने के बाद नेपाल लौट आए हैं और उनकी वापसी उस जांच के बीच हुई है जिसमें उनके परिवार से जुड़े वित्तीय मामलों की तहक़ीक़ात चल रही है।

निष्कर्ष

शेर बहादुर देउबा की नेपाल वापसी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के लिहाज़ से अहम घटनाक्रम है। जून में उन्होंने और आरज़ू राणा ने जांच में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई थी और अब देउबा स्वदेश लौट चुके हैं।

आगे की दिशा जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उपलब्ध सबूत तय करेंगे। फिलहाल इस मामले में आरोप और कानूनी रूप से साबित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण एडिटोरियल कसौटी है।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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