नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े एक अहम प्रक्रियात्मक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज, 2 सितंबर 2026 को सुनवाई होनी है। मामला इस सवाल से जुड़ा है कि विवाद से जुड़े कई मुकदमों में किस वाद को लीड या प्रतिनिधि मुकदमे के तौर पर आगे बढ़ाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने 12 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए संकेत दिया था कि यह मुद्दा दोबारा विचार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जा सकता है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े कई दीवानी मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं। इनमें अलग-अलग हिंदू पक्षकारों की ओर से दायर वाद शामिल हैं।
विवाद का एक अहम प्रक्रियात्मक सवाल यह है कि इन मुकदमों में किसे मुख्य या प्रतिनिधि वाद के तौर पर सुना जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को वाद संख्या 17 से जुड़े पक्षकारों को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों की ओर से प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इसके बाद इस आदेश को दूसरे हिंदू पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
12 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि हाईकोर्ट ने दूसरे वादियों को नोटिस दिए बिना प्रतिनिधित्व का सवाल तय कर दिया।
पीठ ने कहा था कि हाईकोर्ट के सामने दाखिल आवेदन का मूल उद्देश्य कुछ और था, लेकिन उसके आधार पर भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का
प्रतिनिधित्व तय कर दिया गया। अदालत ने संकेत दिया कि सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद इस मुद्दे पर दोबारा विचार होना चाहिए।
फिलहाल इसका अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त की सुनवाई में मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने की ओर झुकाव जरूर जाहिर किया था। लेकिन 12 अगस्त को कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया और अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख तय की गई।
इसलिए आज की सुनवाई में अदालत का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
अगर सुप्रीम कोर्ट मामला हाईकोर्ट को वापस भेजता है, तो वहां सभी संबंधित वादियों को सुनकर यह तय करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है कि प्रतिनिधि या लीड मुकदमा किसे माना जाए।
इस विवाद में वाद संख्या 1 और वाद संख्या 17 को लेकर विशेष कानूनी पेच सामने आया है।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वाद संख्या 17 को जुलाई 2025 में प्रतिनिधि वाद के तौर पर आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई थी। वाद संख्या 1 से जुड़े पक्षकारों ने इसका विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनका तर्क है कि दूसरे वाद को सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधि मानने से पहले सभी संबंधित वादियों को सुनना जरूरी था।
यही प्रक्रियात्मक सवाल मौजूदा सुप्रीम कोर्ट सुनवाई का केंद्र है।
मूल विवाद मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद परिसर को लेकर है।
हिंदू पक्षकारों की ओर से दायर मुकदमों में दावा किया गया है कि मौजूदा शाही ईदगाह परिसर उस स्थान पर है जिसे वे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान और ऐतिहासिक मंदिर स्थल मानते हैं।
दूसरी ओर, शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी और मुस्लिम पक्ष इस दावे का विरोध करते हैं। विवाद से जुड़े मुकदमों में कई अलग-अलग कानूनी मुद्दे अदालतों के सामने हैं।
इस रिपोर्ट में इन ऐतिहासिक दावों को न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े 20 से अधिक दीवानी मुकदमों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पास स्थानांतरित किया था। हाईकोर्ट के 26 मई 2023 के आदेश को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिकाएं लंबित हैं।
इस पूरे मुकदमे में प्रतिनिधि वाद का सवाल इसलिए अहम है क्योंकि इससे यह प्रभावित होगा कि आगे की सुनवाई में किस मुकदमे को प्राथमिकता मिलेगी और विभिन्न पक्षों के दावों को किस प्रक्रियात्मक ढांचे में आगे बढ़ाया जाएगा।
इस विवाद में परिसर के सर्वे से जुड़ा एक अलग महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी है।
16 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 दिसंबर 2023 के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें शाही ईदगाह परिसर के कोर्ट-कमीशन सर्वे की अनुमति दी गई थी।
इससे स्पष्ट है कि विवाद से जुड़े अलग-अलग कानूनी प्रश्न अभी शीर्ष अदालत के सामने लंबित हैं।
आज की कार्यवाही में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहेगा कि सुप्रीम कोर्ट लीड या प्रतिनिधि मुकदमे के विवाद को किस दिशा में ले जाता है।
अदालत के सामने यह प्रक्रियात्मक मुद्दा है कि क्या सभी संबंधित वादियों को सुनकर इलाहाबाद हाईकोर्ट को इस सवाल पर दोबारा फैसला करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आज की सुनवाई से किसी अंतिम फैसले या विवाद के मूल अधिकार संबंधी दावे पर निर्णय की घोषणा मानना सही नहीं होगा।
अदालत का वास्तविक आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले की आगे की कानूनी दिशा क्या होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।