ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को अमेरिका ने दिया संयुक्त राष्ट्र महासभा में आने का वीज़ा
Harish Qureshi
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2026-09-18 11:32:15
जंग और तनाव के बावजूद अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए वीज़ा मंजूर किया है।
न्यूयॉर्क, अमेरिका | 18 सितंबर 2026
By Mohd Haris
जंग के बीच कूटनीतिक दरवाज़ा खुला
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच वाशिंगटन ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने की अनुमति दी है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत मुख्य प्रतिनिधिमंडल के लिए वीज़ा मंजूर किया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक ईरान का मुख्य प्रतिनिधिमंडल और बैठक में भाग लेने के लिए जरूरी सहयोगी स्टाफ न्यूयॉर्क पहुंच सकेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बातचीत की कोशिशें एक साथ चल रही हैं।
अमेरिका ने अपनी मेज़बान जिम्मेदारी का हवाला दिया
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस फैसले को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के मेज़बान देश के रूप में अमेरिका की जिम्मेदारियों से जोड़ा है। वाशिंगटन ने कहा है कि ईरान के मुख्य प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सप्ताह में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है और महासभा की उच्च स्तरीय बैठकों में सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेते हैं। ऐसे में मेज़बान देश के वीज़ा फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक भागीदारी पर पड़ता है।
ईरानी राष्ट्रपति का संयुक्त राष्ट्र में संबोधन
रिपोर्टों के मुताबिक मसूद पेज़ेश्कियान के संयुक्त राष्ट्र महासभा के आगामी सत्र में संबोधन का कार्यक्रम है। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।
ईरान की मौजूदगी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर गंभीर मतभेद बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र का मंच दोनों पक्षों को अपनी स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखने का अवसर देता है।
प्रतिनिधिमंडल पर रहेंगी पाबंदियां
वीज़ा मंजूर होने का मतलब यह नहीं है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका में सामान्य आवागमन की पूरी स्वतंत्रता मिलेगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आकार को सीमित रखा जाएगा और उसके सदस्यों पर यात्रा संबंधी पाबंदियां लागू रहेंगी।
प्रतिनिधिमंडल के लिए विलासिता की वस्तुओं की खरीद पर भी प्रतिबंध रहेगा। अमेरिका पहले से ईरानी अधिकारियों और संस्थानों पर व्यापक आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लागू करता रहा है।
जंग और बातचीत का जटिल दौर
वीज़ा मंजूरी ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को कई महीने बीत चुके हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच संघर्ष के साथ-साथ उसे समाप्त करने के लिए रुक-रुककर बातचीत भी हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में संकेत दिया था कि संघर्ष समाप्त करने की दिशा में बातचीत की जरूरत बनी हुई है। दूसरी तरफ ईरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्थिति बनाए हुए है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक बड़ा केंद्र होर्मुज़ जलडमरूमध्य भी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ता है।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि होर्मुज़ को दोबारा खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत को आगे बढ़ाने से जुड़े समझौतों पर दोनों पक्षों के बीच अभी भी मतभेद मौजूद हैं।
फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल का मामला अलग
ईरान को वीज़ा देने का अमेरिकी फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए वीज़ा देने से इनकार किया है।
अमेरिका ने फिलिस्तीनी पक्ष के खिलाफ अपने फैसले के लिए अलग राजनीतिक और नीतिगत कारण बताए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन के प्रतिनिधित्व को लेकर यह फैसला अलग कूटनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है।
एक ही समय में दो अलग कूटनीतिक संकेत
ईरानी नेतृत्व को न्यूयॉर्क आने की अनुमति और फिलिस्तीनी नेतृत्व के वीज़ा से इनकार ने अमेरिकी विदेश नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ाई है। दोनों मामलों की परिस्थितियां और अमेरिकी प्रशासन द्वारा दिए गए आधार अलग हैं, इसलिए दोनों फैसलों को एक ही नीति के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
ईरान के मामले में अमेरिकी प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र के मेज़बान देश के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का हवाला दिया है। वहीं फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल के मामले में वाशिंगटन ने अलग सुरक्षा और राजनीतिक आधार बताए हैं।
संयुक्त राष्ट्र मंच पर क्या हो सकता है
ईरानी राष्ट्रपति के संभावित संबोधन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें रहेंगी। खासकर परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और युद्ध समाप्त करने की संभावनाएं प्रमुख मुद्दे हो सकते हैं।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि वह ईरान की कूटनीतिक बातचीत में प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय मुलाकातों की संभावना भी रहती है।
हालांकि अभी यह मानना जल्दबाजी होगा कि वीज़ा मंजूरी अपने आप में अमेरिका और ईरान के बीच किसी नए समझौते या युद्धविराम की पुष्टि है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में ऐसे किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
कूटनीति के लिए सीमित लेकिन अहम अवसर
अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में गहरी खाई के बावजूद संयुक्त राष्ट्र महासभा दोनों देशों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण मंच बन सकती है।
ईरानी नेतृत्व का न्यूयॉर्क पहुंचना इस बात की पुष्टि करता है कि सैन्य टकराव के बीच भी बहुपक्षीय कूटनीति पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन इस यात्रा का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों पक्ष बातचीत, परमाणु मुद्दे और क्षेत्रीय सुरक्षा पर कितनी ठोस प्रगति कर पाते हैं।
अभी सबसे अहम सवाल यही है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से आने वाले राजनीतिक बयानों के बाद क्या अमेरिका और ईरान के बीच व्यावहारिक बातचीत आगे बढ़ती है या दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव बरकरार रहता है।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।