अरघची ने दी फॉल्स-फ्लैग साजिश की चेतावनी
ईरान-कुर्दिस्तान रिश्तों में फूट की कोशिश? अरघची का दावा
बरज़ानी कार्यालय पर ड्रोन हमले के बाद अरघची का बड़ा बयान
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने इराकी कुर्दिस्तान के प्रधानमंत्री मस्रूर बरज़ानी के कार्यालय पर ड्रोन हमले को फॉल्स-फ्लैग कार्रवाई बताया। उन्होंने कुर्द नेताओं से सतर्क रहने और पड़ोसी रिश्तों में फूट डालने वाली साजिशों से बचने की अपील की। हमले के स्रोत और जिम्मेदारी पर विवाद अभी बरकरार है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने इराकी कुर्दिस्तान के प्रधानमंत्री मस्रूर बरज़ानी के कार्यालय पर हुए ड्रोन हमले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हमले को फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन बताते हुए कहा कि कुर्द पक्ष को ऐसी गतिविधियों के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए, जिनका मकसद पड़ोसी देशों के बीच मतभेद और अविश्वास पैदा करना है। अरघची का बयान उस हमले के एक दिन बाद आया, जिसमें इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय को दो ड्रोन ने निशाना बनाया था। कुर्दिस्तान क्षेत्र की सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक ड्रोन ईरानी क्षेत्र से लॉन्च हुए थे, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
17 अगस्त को इराकी कुर्दिस्तान की राजधानी एरबिल में प्रधानमंत्री मस्रूर बरज़ानी के कार्यालय को ड्रोन से निशाना बनाया गया। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार की सुरक्षा एजेंसी के अनुसार हमले में दो ड्रोन शामिल थे और घटना में किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। घटना ने इसलिए भी गंभीरता हासिल की क्योंकि हमला इराकी कुर्दिस्तान की सर्वोच्च राजनीतिक संस्थाओं में से एक को निशाना बनाकर किया गया। इससे सुरक्षा, सीमा नियंत्रण और ईरान-कुर्दिस्तान संबंधों को लेकर नए सवाल उठे हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने हमले को ‘हाईली सस्पिशियस’ बताया। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ऐसी कार्रवाई का मकसद ईरान और इराक के बीच रिश्तों को नुकसान पहुंचाना हो सकता है।
अरघची ने अपने बयान में कहा कि बरज़ानी के कार्यालय पर हमले को किसी भी तरह जायज़ नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कुर्दिस्तान में ईरान के ‘कुर्द दोस्तों’ को फॉल्स-फ्लैग साजिशों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान ने अतीत में सद्दाम हुसैन और आईएसआईएस के खिलाफ कुर्दों की सुरक्षा में भूमिका निभाई और सीमा पर कुर्द पक्ष से मिले सुरक्षा सहयोग की वह कद्र करता है। इस बयान का मकसद ईरान और इराकी कुर्दिस्तान के बीच पुराने सुरक्षा संबंधों को रेखांकित करना भी माना जा सकता है। अरघची ने सीधे तौर पर किसी देश या संगठन को हमले का जिम्मेदार नहीं ठहराया। उनकी मुख्य चेतावनी इस बात पर केंद्रित रही कि हमले का इस्तेमाल ईरान और इराकी कुर्दिस्तान के बीच तनाव बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इराकी अधिकारियों की पिछली चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्र में विदेशी संपर्क वाले कुछ सेल फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल रहे हैं। यह ईरानी सरकारी पक्ष का दावा है और इसके समर्थन में स्वतंत्र सार्वजनिक प्रमाण अभी सीमित हैं।
फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन का अर्थ ऐसी कार्रवाई से है जिसमें हमले की असली जिम्मेदारी छिपाकर किसी दूसरे पक्ष को जिम्मेदार दिखाने की कोशिश की जाती है। अरघची का आरोप है कि मौजूदा हमले के पीछे भी ऐसा ही मकसद हो सकता है।
कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार की सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि ड्रोन ईरानी क्षेत्र से लॉन्च किए गए थे। दूसरी तरफ, तेहरान ने हमले को संदिग्ध और उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। अरघची का फॉल्स-फ्लैग वाला बयान ईरान की इस स्थिति को और स्पष्ट करता है कि वह हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रहा। यही इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण अनसुलझा पहलू है। ड्रोन हमले का वास्तविक स्रोत, ऑपरेटर और रणनीतिक उद्देश्य अभी सार्वजनिक रूप से निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।
इराकी कुर्दिस्तान ईरान की पश्चिमी सीमा से लगा हुआ क्षेत्र है। दोनों के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा और राजनीतिक संपर्क के साथ-साथ सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दे भी मौजूद हैं। ईरान लंबे समय से इराकी कुर्दिस्तान में मौजूद ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों को लेकर चिंतित रहा है। तेहरान का आरोप है कि कुछ सशस्त्र या राजनीतिक संगठन इराकी क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ गतिविधियों के लिए करते हैं। इसी वजह से ईरान और कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के संबंधों में सहयोग और सुरक्षा तनाव दोनों साथ-साथ दिखाई देते हैं। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार को एक तरफ अपने इलाके में ईरानी कुर्द समूहों की मौजूदगी को लेकर दबाव झेलना पड़ता है, दूसरी तरफ उसे तेहरान के साथ सीमा सुरक्षा और राजनीतिक रिश्ते भी संभालने होते हैं।
मस्रूर बरज़ानी इराकी कुर्दिस्तान के प्रधानमंत्री हैं और उनका कार्यालय क्षेत्रीय सरकार के राजनीतिक केंद्रों में शामिल है। ऐसे संस्थान पर ड्रोन हमला सामान्य सुरक्षा घटना से आगे जाकर राजनीतिक संदेश देने वाली कार्रवाई के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, हमले का उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी पता नहीं चला है कि हमलावरों का लक्ष्य केवल नुकसान पहुंचाना था या इसके पीछे व्यापक राजनीतिक या सुरक्षा एजेंडा था। ईरान की चिंता इस बात पर केंद्रित है कि ऐसी घटना दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बढ़ा सकती है। तेहरान का कहना है कि दुश्मन ताकतें ईरान और इराक के बीच रिश्तों में दरार पैदा करना चाहती हैं।
घटना के बाद ईरान और इराक के बीच उच्चस्तरीय संपर्क भी जारी रहा। अरघची और इराकी विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने 18 अगस्त को फोन पर क्षेत्रीय हालात और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। यह संपर्क अहम है क्योंकि तेहरान और बगदाद दोनों के लिए सीमा से जुड़े सुरक्षा मामलों में समन्वय जरूरी है। ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इराकी जमीन से उसके खिलाफ कोई गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा न हो। दूसरी तरफ इराकी सरकार के सामने अपनी संप्रभुता और कुर्दिस्तान क्षेत्र की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
यदि ईरान और इराकी कुर्दिस्तान के बीच किसी हमले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप बढ़ते हैं, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। कुर्दिस्तान क्षेत्र पहले से ईरान, इराक, तुर्किये और पश्चिमी शक्तियों के बीच जटिल जियोपॉलिटिकल समीकरणों का हिस्सा है। ईरान के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा सवाल सीमा पार सक्रिय ईरानी कुर्द संगठनों का है। तेहरान इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के लिए चुनौती अलग है। उसे अपनी स्वायत्तता और सुरक्षा हितों की रक्षा करते हुए ईरान तथा बगदाद दोनों के साथ कामकाजी रिश्ते बनाए रखने होते हैं।
मौजूदा घटनाक्रम को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का नया चरण कहना अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल उपलब्ध तथ्य एक ड्रोन हमले, उसके बाद ईरानी प्रतिक्रिया और दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों तक सीमित हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव को देखते हुए ऐसी घटना का राजनीतिक असर गंभीर हो सकता है। अगर हमले के लिए किसी पक्ष को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश आगे बढ़ती है, तो ईरान और इराकी कुर्दिस्तान के बीच सुरक्षा संवाद पर दबाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से तब, जब हमले को किसी बड़े जियोपॉलिटिकल एजेंडा से जोड़ने के दावे सामने आएं।
तेहरान के लिए इराकी कुर्दिस्तान सिर्फ पड़ोसी क्षेत्र नहीं है। यह ईरान की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील इलाका है। ईरान पहले भी इराकी कुर्दिस्तान में मौजूद ईरानी कुर्द विपक्षी संगठनों के ठिकानों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। यही वजह है कि तेहरान इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सुरक्षा घटनाक्रम को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखता है। अरघची का ताजा बयान इसी व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण के भीतर समझा जाना चाहिए। उन्होंने सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा सतर्कता की अपील की है।
अब सबसे अहम सवाल ड्रोन हमले की जांच और उसके स्रोत की पुष्टि का है। अगर स्वतंत्र जांच ईरानी क्षेत्र से लॉन्च होने के दावे की पुष्टि करती है, तो बगदाद और एरबिल के सामने तेहरान से जवाब मांगने का दबाव बढ़ सकता है। अगर इसके उलट फॉल्स-फ्लैग की आशंका सामने आती है, तो ईरान अपने इस दावे को क्षेत्रीय स्तर पर और जोर से उठा सकता है। दोनों स्थितियों में सूचना युद्ध और जियोपॉलिटिकल नैरेटिव महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आने वाले दिनों में इराकी सरकार, कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार और ईरान के आधिकारिक बयानों पर करीबी नजर रखना जरूरी होगा।
अरघची की चेतावनी ऐसे समय आई है जब इराकी कुर्दिस्तान में बरज़ानी के प्रधानमंत्री कार्यालय पर ड्रोन हमले ने ईरान और कुर्दिस्तान के बीच सुरक्षा समीकरण को फिर चर्चा में ला दिया है। ईरान ने हमले को संदिग्ध और फॉल्स-फ्लैग कार्रवाई बताया है, जबकि कुर्दिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों ने ड्रोन के ईरानी क्षेत्र से आने का दावा किया है।
फिलहाल हमले की जिम्मेदारी और वास्तविक मकसद स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुए हैं। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि दोनों पक्षों के दावों के बीच जांच और सत्यापन अभी बाकी है। अरघची का संदेश स्पष्ट है कि तेहरान ईरान और इराकी कुर्दिस्तान के बीच किसी भी संभावित दरार को गंभीर सुरक्षा मामला मानता है। आगे की जांच यह तय करेगी कि यह घटना एक अलग ड्रोन हमला थी या इसके पीछे किसी बड़े क्षेत्रीय सियासी एजेंडे की भूमिका थी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।