जंतर-मंतर मारपीट मामला: स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत पर अदालत का आदेश आज
Wasi Siddiqui
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2026-09-15 15:51:43
जंतर-मंतर प्रदर्शन में कथित मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की नियमित जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा। अदालत ने मामले में एससी/एसटी एक्ट लगाए जाने के आधार पर पुलिस से सवाल किए।
📍 नई दिल्ली 🗓️ 15 सितंबर 2026 ✍️ वसी सिद्दीकी
जमानत पर अदालत का फैसला
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की नियमित जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत ने 14 सितंबर को अपना आदेश सुरक्षित रखा था और 15 सितंबर को आदेश सुनाने की तारीख तय की थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इस समय तक जमानत मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
मामले की सुनवाई एडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह ललेर की अदालत में हुई। भारद्वाज इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें 7 सितंबर को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था
मामला जून 2026 में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि विवाद के दौरान उन पर हमला किया गया और उनके सिर में चोट आई। पुलिस ने शुरुआती मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की थी। बाद में मामले में एससी/एसटी कानून की धाराएं जोड़ी गईं।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले इस मामले से जुड़ी एक वीडियो पॉडकास्ट क्लिप सार्वजनिक चर्चा में आई थी, जिसमें भारद्वाज पर कथित तौर पर हमले की बात कहने का आरोप लगा।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया। पहले उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा गया और इसके बाद 7 सितंबर को अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
एससी/एसटी एक्ट को लेकर अदालत के सवाल
14 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि घटना के दौरान क्या स्वतंत्र भारद्वाज ने जातिसूचक टिप्पणी की थी।
पुलिस ने अदालत को बताया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक टिप्पणी का उल्लेख नहीं था। पुलिस के अनुसार बाद में दर्ज किए गए बयान में इस तरह के आरोप सामने आए, जिसके बाद एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं। यह बिंदु जमानत सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा रहा।
बचाव पक्ष की दलील
स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से पेश वकील ने गिरफ्तारी को राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ते हुए इसे चुनौती दी। बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि विवाद के दौरान शिकायतकर्ता ने पहले भारद्वाज पर हमला किया था।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि भारद्वाज पूछताछ के लिए पुलिस के सामने पेश हो चुके थे और इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। ये दलीलें अदालत के सामने आरोपी पक्ष का पक्ष हैं। इन आरोपों को अदालत ने अभी अंतिम रूप से सही या गलत नहीं माना है।
मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं
मामले में एससी/एसटी अधिनियम से जुड़ी धाराओं के अलावा एक अलग प्राथमिकी पॉक्सो कानून के तहत दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट है। अदालत को बताया गया था कि भारद्वाज की गिरफ्तारी एससी/एसटी कानून से जुड़ी प्राथमिकी में हुई थी, पॉक्सो मामले में नहीं।
यह अंतर कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि अलग-अलग प्राथमिकी और आरोपों की अपनी स्वतंत्र जांच और न्यायिक प्रक्रिया होती है।
अदालत के सामने मुख्य सवाल
जमानत सुनवाई में अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण पहलू रहे। इनमें कथित मारपीट की परिस्थितियां, शिकायत और बाद के बयानों में अंतर, एससी/एसटी कानून लगाए जाने का आधार और जांच की मौजूदा स्थिति शामिल हैं।
बचाव पक्ष ने आरोपी की गिरफ्तारी और मामले की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से हमले और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन दोनों पक्षों के दावों का अंतिम परीक्षण मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
अब आगे क्या होगा
पटियाला हाउस कोर्ट ने 14 सितंबर की सुनवाई के बाद जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा था। अदालत ने 15 सितंबर को आदेश सुनाने की तारीख तय की थी। इसलिए स्वतंत्र भारद्वाज को अंतरिम या नियमित जमानत मिलने की बात तब तक पुष्ट नहीं मानी जानी चाहिए, जब तक अदालत का आदेश उपलब्ध न हो।
फिलहाल इस मामले में आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों के बीच कानूनी प्रक्रिया जारी है। अदालत का अगला आदेश यह स्पष्ट करेगा कि भारद्वाज को न्यायिक हिरासत से राहत मिलती है या उन्हें आगे भी हिरासत में रहना होगा।
जंतर-मंतर की घटना से जुड़ा यह मामला अब पुलिस जांच से आगे बढ़कर अदालत की निगरानी में है। कथित मारपीट, एससी/एसटी अधिनियम के इस्तेमाल और बाद में दर्ज अन्य आरोपों ने मामले को कानूनी रूप से संवेदनशील बना दिया है।
सबसे अहम बात यह है कि आरोप अभी आरोप हैं। दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानून के तहत निर्दोष माना जाता है। अंतिम स्थिति अदालत के आदेश और आगे की न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट होगी।
वीडियो देखें
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।