कोटा नगर निगम में बीजेपी को बहुमत, 51 सीटों के साथ बोर्ड बनाने की तैयारी
Wasi Siddiqui
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2026-09-14 15:29:28
कोटा नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 51 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 33 सीटें मिलीं। अन्य के खाते में 2 सीटें गईं। अब निगम में बोर्ड गठन की कवायद तेज होगी।
📍 कोटा, राजस्थान 🗓️ 14 सितंबर 2026 ✍️ वसी सिद्दीकी
कोटा नगर निगम में बीजेपी को बहुमत
कोटा नगर निगम चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी ने 51 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को 33 सीटें मिली हैं। अन्य उम्मीदवारों के खाते में 2 सीटें गई हैं।
कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। ऐसे में बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है। बीजेपी का 51 सीटों तक पहुंचना उसे निगम में बोर्ड गठन के लिए जरूरी संख्या उपलब्ध कराता है।
कांग्रेस 33 सीटों पर रुकी
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को इस चुनाव में 33 सीटों पर जीत मिली है। परिणाम बीजेपी और कांग्रेस के बीच शहरी राजनीतिक समर्थन के अंतर को सामने रखते हैं।
कोटा में चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। चुनावी प्रक्रिया के दौरान बागी उम्मीदवारों और निर्दलीयों की मौजूदगी ने कई वार्डों में मुकाबले को बहुकोणीय बनाया था।
51 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार
100 सदस्यीय निगम में 51 सीटें बहुमत का निर्णायक आंकड़ा हैं। बीजेपी का इसी संख्या तक पहुंचना बोर्ड गठन के लिहाज से अहम है।
इसका सीधा अर्थ है कि बीजेपी को बोर्ड बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय पार्षदों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि महापौर और उपमहापौर के चुनाव की प्रक्रिया अलग चरण में होगी।
महापौर पद पर भी बीजेपी की नजर
कोटा में महापौर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू है और उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के अनुसार महापौर का चुनाव 21 सितंबर 2026 को होना है। उपमहापौर का चुनाव 22 सितंबर को निर्धारित है।
बीजेपी के पास बहुमत होने के कारण महापौर चुनाव में उसका पलड़ा मजबूत माना जाएगा। इसके बावजूद औपचारिक चुनाव प्रक्रिया और पार्टी की ओर से उम्मीदवार चयन महत्वपूर्ण रहेगा।
चुनाव से पहले बागियों ने बढ़ाई थी चुनौती
कोटा नगर निगम चुनाव में नामांकन के दौरान बीजेपी और कांग्रेस दोनों के सामने बागी उम्मीदवारों की चुनौती सामने आई थी। रिपोर्टों के मुताबिक 27 वार्डों में दोनों प्रमुख दलों से जुड़े 32 बागी उम्मीदवार मैदान में थे।
इस स्थिति ने कई वार्डों में वोटों के बंटवारे की आशंका बढ़ाई थी। अंतिम नतीजों ने अब इस मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट कर दी है।
मतदान से पहले वार्ड 51 को लेकर विवाद
चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोटा के वार्ड 51 में कथित फर्जी मतदान को लेकर विवाद भी सामने आया था। स्थानीय स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप के बाद पुलिस और राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मामला चर्चा में आया। इन आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
राजस्थान की शहरी राजनीति के लिए अहम नतीजे
राजस्थान में इस बार बड़े पैमाने पर शहरी स्थानीय निकाय चुनाव हुए। राज्य में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाओं समेत कुल 309 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव कराया गया। मतदान 9 और 11 सितंबर को हुआ।
इन चुनावों को राज्य की मौजूदा सियासी स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगर निकायों के नतीजे स्थानीय मुद्दों, संगठनात्मक ताकत और शहरी मतदाताओं के रुझान का संकेत देते हैं।
बीजेपी के लिए राजनीतिक संदेश
कोटा में बहुमत बीजेपी के संगठन के लिए अहम उपलब्धि है। 51 सीटों के साथ पार्टी ने निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
शहरी निकाय की सत्ता मिलने के बाद अब असली परीक्षा प्रशासनिक कामकाज और स्थानीय मुद्दों पर होगी। शहर में सड़क, सफाई, यातायात, जल निकासी, पेयजल, आवासीय क्षेत्रों की सुविधाएं और नगरीय विकास जैसे मुद्दे नए बोर्ड के सामने प्राथमिकता में रहेंगे।
कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती
कांग्रेस के लिए 33 सीटों का परिणाम विपक्षी भूमिका को मजबूत तरीके से निभाने की चुनौती लेकर आया है। निगम में प्रभावी विपक्ष के लिए पार्टी को वार्ड स्तर पर जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता बढ़ानी होगी।
सिर्फ चुनावी नतीजे के आधार पर मतदाताओं के पूरे राजनीतिक रुझान का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। स्थानीय चुनावों में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, वार्ड के मुद्दे और स्थानीय संगठन भी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
अब आगे क्या होगा
नतीजों के बाद अगला प्रमुख चरण महापौर और उपमहापौर का चुनाव है। कोटा में महापौर पद के लिए निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत 21 सितंबर को मतदान होना है, जबकि उपमहापौर का चुनाव 22 सितंबर को होगा।
बीजेपी के पास बहुमत होने के कारण बोर्ड गठन की प्रक्रिया उसके लिए अपेक्षाकृत स्पष्ट है। अब पार्टी के सामने नेतृत्व चयन और निगम की प्राथमिकताओं को तय करने की जिम्मेदारी होगी।
नतीजों का व्यापक अर्थ
कोटा नगर निगम का परिणाम शहर की स्थानीय राजनीति में सत्ता संतुलन को स्पष्ट करता है। बीजेपी ने बहुमत हासिल किया है, जबकि कांग्रेस को विपक्ष में बैठना होगा।
अब जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि नया निगम बोर्ड चुनावी वादों और स्थानीय अपेक्षाओं को किस तरह प्रशासनिक फैसलों में बदलता है। चुनावी जीत के बाद असली कसौटी नगर प्रशासन की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता होगी।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।