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नेपाल बाढ़: 275 भारतीय लापता, 166 रेस्क्यू; भारत की 95 टन मदद

Apurva Choudhary 2026-09-05 06:30:09
नेपाल बाढ़: 275 भारतीय लापता, 166 रेस्क्यू; भारत की 95 टन मदद
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं, जबकि 166 को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। भारत ने सात विमानों से करीब 95 टन राहत सामग्री भेजी। 54 विशेषज्ञ भी नेपाल पहुंचे हैं। चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल लौट चुके हैं। तलाश अभियान जारी है।

LOCATION: काठमांडू/नेपाल-तिब्बत सीमा
DATE: 4 सितंबर 2026
BYLINE: Apurva Choudhary 

नेपाल फ्लैश फ्लड में 275 भारतीय अब भी लापता, 166 सुरक्षित
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर तलाश और राहत अभियान लगातार जारी है। भारत के विदेश मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक, 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं, जबकि 166 भारतीयों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह नेपाल सरकार और संबंधित अधिकारियों के लगातार संपर्क में है ताकि लापता नागरिकों का पता लगाया जा सके।
आपदा के बाद भारत ने सिर्फ अपने नागरिकों की मदद तक अभियान सीमित नहीं रखा है, बल्कि नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों में भी व्यापक सहयोग दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। इसमें मेडिकल सप्लाई और बचाव कार्यों में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री शामिल है।

नेपाल में कितने भारतीय अब भी लापता हैं?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, उपलब्ध जानकारी के आधार पर 275 भारतीय नागरिक अभी लापता हैं। भारतीय अधिकारी नेपाल सरकार और वहां के संबंधित प्रशासन के साथ संपर्क में रहकर इन लोगों की लोकेशन और स्थिति का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह आंकड़ा इस मायने में महत्वपूर्ण है कि आपदा प्रभावित इलाकों में सड़क और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर मलबे, बाढ़ के पानी और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण रेस्क्यू टीमों के लिए पहुंच बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारत की ओर से अब तक 166 भारतीय नागरिकों को बचाए जाने की पुष्टि की गई है। विदेश मंत्रालय ने नेपाल के अधिकारियों और स्थानीय रेस्क्यू टीमों के प्रयासों की सराहना भी की है।

चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे
इस आपदा के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक चीन के रास्ते भी प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकले। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1,907 भारतीय नागरिक चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं।
चीन की आधिकारिक जानकारी का हवाला देते हुए भारत ने यह भी कहा है कि फिलहाल तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कोई भारतीय यात्री फंसा हुआ नहीं है। इससे चीन की ओर मौजूद भारतीय नागरिकों को लेकर तत्काल स्थिति पहले की तुलना में स्पष्ट हुई है।
हालांकि, नेपाल में लापता भारतीयों की तलाश अभी खत्म नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय जारी है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर रेस्क्यू तथा ट्रेसिंग ऑपरेशन आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारत ने सात विमानों से भेजी 95 टन राहत सामग्री
भारत ने नेपाल के लिए राहत सहायता का एयर ब्रिज तैयार किया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है।
भारत की सहायता में मेडिकल सप्लाई के साथ-साथ रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए जरूरी उपकरण शामिल हैं। नेपाल की जरूरत के अनुसार आगे भी अतिरिक्त सामग्री भेजने की तैयारी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नेपाल सरकार की मांग के आधार पर सहायता बढ़ाई जाएगी।
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया है कि आने वाले दिनों में और फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य जरूरी सामग्री भेजी जा सकती है। इसका उद्देश्य उन इलाकों तक पहुंच बहाल करने में मदद करना है जहां बाढ़ और मलबे के कारण सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है।

54 विशेषज्ञ नेपाल में रेस्क्यू अभियान का हिस्सा
राहत सामग्री के अलावा भारत ने 54 विशेषज्ञों और कर्मियों को भी नेपाल भेजा है। इस दल में 30 टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है।
भारतीय रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें नेपाल के स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की तैनाती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ और मलबे से कुछ हाइड्रोपावर परियोजनाओं के सुरंग क्षेत्रों में लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है।
ऐसे अभियानों में केवल मलबा हटाना ही पर्याप्त नहीं होता। सुरंगों में पानी, कीचड़, सीमित पहुंच और संरचनात्मक जोखिम के कारण रेस्क्यू टीमों को तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है। इसी वजह से भारत की विशेषज्ञ टीमें नेपाल के ऑपरेशन में एक अहम भूमिका निभा रही हैं।

नेपाल में बाढ़ से सड़क और पुलों को भारी नुकसान
आपदा ने नेपाल के परिवहन और संपर्क नेटवर्क को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार करीब 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन पुल और लगभग 40 किलोमीटर ब्लैक-टॉप सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। इससे कई प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना कठिन हो गया है।
पुलों के टूटने और सड़कों पर मलबा आने से प्रभावित समुदायों के बीच आवागमन बाधित हुआ है। पहाड़ी इलाकों में इस तरह की स्थिति का असर राहत सामग्री की सप्लाई, मेडिकल इमरजेंसी और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर भी पड़ता है।
यही वजह है कि नेपाल को राहत सामग्री के साथ-साथ अस्थायी संपर्क व्यवस्था बहाल करने वाले उपकरणों की भी जरूरत है। भारत द्वारा अतिरिक्त बेली ब्रिज और दूसरे उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी इसी चुनौती से जुड़ी है।

आपदा का असर नेपाल की ऊर्जा परियोजनाओं पर भी
फ्लैश फ्लड से नेपाल की कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कुछ परियोजनाओं के टनल क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण वहां मौजूद लोगों को लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रिशूली घाटी में बाढ़ के बाद टनल रेस्क्यू के लिए इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। कुछ मामलों में मलबे के नीचे सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंच बनाने के लिए तकनीकी नक्शों और परियोजना संरचना की जानकारी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इससे साफ है कि मौजूदा अभियान सिर्फ सामान्य बाढ़ राहत तक सीमित नहीं है। इसमें सर्च ऑपरेशन, टनल रेस्क्यू, फोरेंसिक पहचान, मेडिकल सहायता और क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर की बहाली जैसे कई मोर्चे शामिल हैं।

भारत-नेपाल समन्वय क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा और व्यापक सामाजिक संपर्क के कारण नेपाल में किसी बड़ी आपदा का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ सकता है। इस बार भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद थे।
ऐसे में भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और नेपाल प्रशासन के बीच लगातार सूचना साझा करना बेहद जरूरी है। लापता नागरिकों की पहचान, सुरक्षित लोगों की सूची, परिवारों तक जानकारी पहुंचाना और रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना इसी समन्वय पर निर्भर करता है।
भारत ने पहले भी नेपाल में भूकंप और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सहायता दी है। मौजूदा अभियान में विशेषज्ञ टीमों और एयरलिफ्ट की गई राहत सामग्री का इस्तेमाल दोनों देशों के बीच आपदा-प्रबंधन सहयोग के व्यापक ढांचे को भी दिखाता है।

क्या 275 का आंकड़ा अंतिम है?
नहीं। 275 भारतीयों के लापता होने का आंकड़ा विदेश मंत्रालय की मौजूदा उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और तलाश अभियान जारी है। जैसे-जैसे स्थानीय प्रशासन और भारतीय मिशन को नई जानकारी मिलती है, लापता, रेस्क्यू किए गए और सुरक्षित वापस पहुंचे लोगों के आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।
इसी तरह नेपाल में कुल प्रभावित लोगों और मृतकों की संख्या भी राहत एवं पहचान प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ बदल सकती है। इसलिए किसी एक शुरुआती आंकड़े को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।

आगे क्या होगा?
अगले चरण में प्राथमिकता लापता भारतीय नागरिकों की तलाश, प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बहाल करने और रेस्क्यू टीमों के लिए सुरक्षित रास्ते उपलब्ध कराने की होगी। नेपाल सरकार की मांग के आधार पर भारत अतिरिक्त मेडिकल, फोरेंसिक और तकनीकी सहायता भेज सकता है।
विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि भारत राहत सहायता जारी रखेगा। फोरेंसिक किट और बेली ब्रिज जैसी अतिरिक्त सामग्री भेजने की तैयारी बताती है कि अभियान केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि रिकवरी और संपर्क बहाली की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती उन 275 भारतीय नागरिकों का पता लगाना है जिनकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। जब तक स्थानीय स्तर पर सर्च और पहचान की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इन लोगों के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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