बीजेपी ने असम की नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव में पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। मतदान 6 अक्टूबर और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
नगांव | 11 सितंबर 2026
गुवाहाटी। भारतीय जनता पार्टी ने असम की नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। शर्मा हाल में सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर बीजेपी में शामिल हुए थे। अब पार्टी ने उन्हें सीधे लोकसभा उपचुनाव के मैदान में उतारने का फैसला किया है।
नगांव सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। चुनाव आयोग ने नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर तय की है।
देबाशीष शर्मा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं। उन्होंने करीब 34 साल सरकारी सेवा में काम किया। अपनी सेवा के अंतिम दौर में वह नगांव के जिला आयुक्त के पद पर तैनात थे। इससे पहले वह गुवाहाटी नगर निगम के आयुक्त और मोरीगांव के जिला आयुक्त समेत कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
उन्होंने सितंबर की शुरुआत में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और कुछ ही दिनों बाद बीजेपी में शामिल हो गए। पार्टी में शामिल होने के समय उन्होंने कहा था कि तीन दशक से ज्यादा समय सरकारी सेवा में बिताने के बाद वह लोगों की सेवा के लिए नए माध्यम की तलाश में थे।
शर्मा के बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही उनके नगांव उपचुनाव लड़ने की अटकलें तेज थीं। शुरुआत में बीजेपी नेतृत्व ने कहा था कि पार्टी के पास संभावित उम्मीदवारों का पैनल है और अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
अब पार्टी ने शर्मा के नाम पर मुहर लगा दी है। उनके प्रशासनिक अनुभव को बीजेपी के लिए नगांव में एक महत्वपूर्ण चुनावी पूंजी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि चुनावी मुकाबले में इसका कितना असर पड़ेगा, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
नगांव लोकसभा सीट असम की राजनीति में अहम मानी जाती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रद्युत बोरदोलोई ने यहां से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा और असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद नगांव लोकसभा सीट खाली हुई और उपचुनाव की स्थिति बनी।
अब बीजेपी इस सीट को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के सामने कांग्रेस के अलावा दूसरे दलों की चुनौती भी रहेगी।
नगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नामांकन 16 सितंबर तक दाखिल किए जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर को होगी और उम्मीदवार 19 सितंबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे।
मतदान 6 अक्टूबर को होगा। मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ नगांव संसदीय क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
देबाशीष शर्मा की उम्मीदवारी से पहले ही असम की राजनीति में विवाद शुरू हो गया था। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से उनके पिछले प्रशासनिक कार्यकाल की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। कांग्रेस का तर्क था कि शर्मा हाल तक नगांव के जिला आयुक्त रहे हैं और चुनाव से जुड़े संवेदनशील प्रशासनिक मामलों को संभाल चुके हैं।
कांग्रेस ने उनके कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायत फंड के आवंटन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग भी उठाई थी। इन आरोपों को कांग्रेस की ओर से उठाई गई आपत्तियों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों को किसी न्यायिक या अंतिम प्रशासनिक निष्कर्ष के तौर पर स्थापित नहीं किया गया है।
बीजेपी नेतृत्व ने शर्मा के प्रशासनिक अनुभव और असम के सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन से उनके जुड़ाव को रेखांकित किया है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने उनके पार्टी में आने को संगठन के लिए मजबूत कदम बताया था।
शर्मा ने भी बीजेपी में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में विकास कार्यों पर भरोसा जताया था।
नगांव में बीजेपी के सामने केवल कांग्रेस की चुनौती नहीं होगी। उपचुनाव में अन्य राजनीतिक दल भी सक्रिय हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एआईयूडीएफ ने रेजाउल करीम सरकार को मैदान में उतारा है। कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार की घोषणा का इंतजार है।
इससे नगांव का मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है। ऐसे में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय संगठन और सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बीजेपी के लिए नगांव सीट आसान मुकाबला नहीं मानी जा रही। पार्टी को यहां अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों के बीच अपना समर्थन मजबूत करना होगा।
देबाशीष शर्मा के पास प्रशासनिक अनुभव जरूर है, लेकिन चुनावी राजनीति उनके लिए नया क्षेत्र है। इसलिए उनका व्यक्तिगत जनसंपर्क, स्थानीय संगठन के साथ तालमेल और पार्टी का चुनावी अभियान महत्वपूर्ण रहेगा।
अब नगांव में चुनावी प्रचार तेजी पकड़ेगा। बीजेपी देबाशीष शर्मा के प्रशासनिक अनुभव और सार्वजनिक सेवा की पृष्ठभूमि को प्रमुख मुद्दा बना सकती है।
दूसरी तरफ विपक्ष उनके पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल को चुनावी बहस का हिस्सा बना सकता है। कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों का असर कितना पड़ता है, यह आने वाले दिनों के राजनीतिक विमर्श पर निर्भर करेगा।
बीजेपी ने नगांव लोकसभा उपचुनाव में पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाकर प्रशासनिक अनुभव वाले चेहरे पर भरोसा जताया है। शर्मा के लिए यह सरकारी सेवा से सक्रिय राजनीति में प्रवेश के तुरंत बाद पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान होगा।
नगांव में मुकाबला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सीट पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास थी और अब बीजेपी इसे अपने खाते में लाने की कोशिश कर रही है। 6 अक्टूबर का मतदान इस राजनीतिक मुकाबले की दिशा तय करेगा, जबकि 9 अक्टूबर को नतीजे सामने आएंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।