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नंदीग्राम उपचुनाव में बड़ा मोड़, ममता गुट की संचिता प्रधान ने नामांकन लिया वापस

Harish Qureshi • 2026-09-18 16:35:45
नंदीग्राम उपचुनाव में बड़ा मोड़, ममता गुट की संचिता प्रधान ने नामांकन लिया वापस

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ममता गुट की संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस लिया। चुनाव आयोग ने तृणमूल के दोनों गुटों को नए नाम और चिह्न दिए।


नंदीग्राम, पश्चिम बंगाल | 18 सितंबर 2026

By Mohd Haris


नंदीग्राम में बदला चुनावी घटनाक्रम


पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासी तस्वीर अचानक बदल गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। नामांकन वापसी से पहले उनकी भाजपा नेता और नंदीग्राम के प्रमुख राजनीतिक चेहरे शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की खबर सामने आई।


संचिता प्रधान डे को ममता बनर्जी गुट ने 13 सितंबर को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया था। उस समय पार्टी ने उन्हें विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया था। मतदान 6 अक्टूबर को होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है।


संचिता प्रधान ने वापस लिया नामांकन


ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम उपचुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया है। नामांकन वापसी के बाद उनकी शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात भी सामने आई है।


हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में संचिता प्रधान ने अपने नामांकन वापस लेने की विस्तृत वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की है। इसलिए इस फैसले को किसी खास राजनीतिक समझौते या रणनीति का नतीजा बताना अभी पुष्ट तथ्य के तौर पर उचित नहीं होगा।


कांग्रेस को समर्थन देने की खबर की पुष्टि नहीं


आपके दिए इनपुट में ममता बनर्जी गुट द्वारा नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का दावा शामिल है। उपलब्ध ताज़ा रिपोर्टों में इसकी स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि नहीं मिली है।


इसके उलट, 18 सितंबर की रिपोर्टों में संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने की जानकारी प्रमुखता से सामने आई है। इसलिए इस खबर को कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन के रूप में पेश करना अभी तथ्यगत तौर पर सुरक्षित नहीं है।


इससे पहले कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने दावा किया था कि तृणमूल ने नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव रखा था। तृणमूल ने इस दावे को खारिज किया था। इसलिए सीट समझौते से जुड़ी जानकारी को भी आरोप और जवाब के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


चुनाव आयोग के फैसले से भी बदली तस्वीर


नंदीग्राम उपचुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक विवाद भी सामने आया है। चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों में मूल पार्टी नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया।


इसके बाद आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न आवंटित किया। दूसरे गुट को “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस” नाम और लिफाफा चिह्न दिया गया है।


यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के संदर्भ में लागू है। तृणमूल के मूल नाम और चिह्न को लेकर अंतिम संगठनात्मक विवाद का फैसला अलग प्रक्रिया का विषय है।


नंदीग्राम क्यों अहम है


नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र रहा है। भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौर से ही यह क्षेत्र ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा है।


2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी भाजपा में चले गए और राज्य की राजनीति में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव का यह क्षेत्र प्रमुख केंद्र बना रहा।


वर्तमान उपचुनाव शुभेंदु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम सीट छोड़ने के बाद हो रहा है। उन्होंने विधानसभा में दूसरी सीट बरकरार रखी, जिसके बाद नंदीग्राम सीट रिक्त हुई।


भाजपा ने किसे उम्मीदवार बनाया


भाजपा ने नंदीग्राम से हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने 15 सितंबर को नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा की थी।


हासिरानी रथ शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत पूर्व सहयोगी की मां हैं। भाजपा ने इस पृष्ठभूमि को चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ के रूप में रखा है।


तृणमूल के भीतर संगठनात्मक संकट


नंदीग्राम उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है जब तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंटी हुई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट और दूसरे नेताओं के नेतृत्व वाला प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं।


चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को अलग नाम और चिह्न के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की है। ममता गुट ने आयोग के अंतरिम आदेश पर कानूनी आपत्ति जताई थी, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट ने आदेश का स्वागत किया।


18 सितंबर को आयोग ने दोनों गुटों के लिए नए नाम और चिह्न को मंजूरी दे दी। इससे नंदीग्राम उपचुनाव में संगठनात्मक पहचान का मुद्दा भी चुनावी मुकाबले का हिस्सा बन गया है।


आगे क्या होगा


संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद नंदीग्राम का चुनावी गणित फिर बदल गया है। अब उम्मीदवारों की अंतिम सूची और संबंधित चुनावी स्थिति पर निगाह रहेगी।


इस घटनाक्रम के राजनीतिक असर को लेकर अलग-अलग दल अपने-अपने दावे कर सकते हैं। लेकिन नामांकन वापसी के पीछे किसी विशेष राजनीतिक समझौते या रणनीति को तथ्य मानने से पहले संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान जरूरी होगा।


नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर को प्रस्तावित है। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। तब तक उम्मीदवारों, दलों और चुनाव आयोग से जुड़े फैसले इस सीट की चुनावी तस्वीर को प्रभावित करते रहेंगे।


निष्कर्ष


नंदीग्राम उपचुनाव से पहले संचिता प्रधान डे का नामांकन वापस लेना पश्चिम बंगाल की राजनीति का अहम घटनाक्रम है। इसके साथ तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक विवाद और चुनाव आयोग की नई व्यवस्था ने मुकाबले को और जटिल बना दिया है।


फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि ममता गुट की घोषित उम्मीदवार ने चुनावी दौड़ से नाम वापस ले लिया है। कांग्रेस को समर्थन देने का दावा उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से पुष्ट नहीं है। आगे की तस्वीर उम्मीदवारों की अंतिम सूची और संबंधित दलों के आधिकारिक फैसलों से स्पष्ट होगी।


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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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