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भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल, हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा की जिम्मेदारी
Mohammad Naved
•
2026-09-10 12:40:50
भाजपा ने युवा, महिला, एससी, ओबीसी, किसान, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा की। हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे की जिम्मेदारी मिली।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 10 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
भाजपा ने संगठनात्मक जिम्मेदारियों का किया ऐलान
भारतीय जनता पार्टी ने अपने विभिन्न मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की घोषणा कर संगठनात्मक ढांचे में अहम जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। पार्टी ने युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, किसान, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक मोर्चों के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है।
नई व्यवस्था में पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वहीं डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चे और सतीश पूनिया को अनुसूचित जनजाति मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है।
किस नेता को कौन सा मोर्चा मिला
घोषित जिम्मेदारियों के मुताबिक संजय भाटिया अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रभारी होंगे। वैजयंत पांडा को अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है। किसान मोर्चे का प्रभार लाल सिंह आर्या को सौंपा गया है।
अनुसूचित जनजाति मोर्चे के लिए सतीश पूनिया और अल्पसंख्यक मोर्चे के लिए गजेंद्र पटेल को जिम्मेदारी दी गई है। युवा मोर्चे की कमान हरीश द्विवेदी और महिला मोर्चे का प्रभार डी. पुरंदेश्वरी को मिला है।
संगठन में जिम्मेदारियों का नया संतुलन
यह बदलाव भाजपा की हालिया राष्ट्रीय संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद सामने आया है। पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों तक पहुंच रखने वाले नेताओं को जिम्मेदारियां दी हैं।
मोर्चों के प्रभारी संगठन और संबंधित मोर्चे के बीच समन्वय में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके जरिए पार्टी की गतिविधियों, कार्यकर्ता संपर्क और संगठनात्मक कार्यक्रमों को संबंधित वर्गों तक पहुंचाने की व्यवस्था संचालित होती है।
युवा मोर्चे पर हरीश द्विवेदी की जिम्मेदारी
हरीश द्विवेदी उत्तर प्रदेश के बस्ती से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। हाल में उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम में भी अहम जिम्मेदारी मिली थी। अब युवा मोर्चे का प्रभारी बनाए जाने से उनके संगठनात्मक दायित्व का दायरा बढ़ा है।
युवा मोर्चा भाजपा के संगठनात्मक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पार्टी लंबे समय से युवाओं के बीच संगठन विस्तार, कार्यकर्ता संपर्क और राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर देती रही है।
महिला मोर्चे की जिम्मेदारी डी. पुरंदेश्वरी को
डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वह भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय वरिष्ठ नेता हैं और आंध्र प्रदेश से पार्टी की प्रमुख पदाधिकारी रही हैं।
उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय आई है जब भाजपा अपने संगठन को अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। महिला मोर्चा पार्टी के महिला कार्यकर्ताओं और महिला मतदाताओं से जुड़े संगठनात्मक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों से अलग है यह जिम्मेदारी
भाजपा ने इससे पहले विभिन्न मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की भी नियुक्तियां की थीं। युवा मोर्चे की राष्ट्रीय अध्यक्षता गुजरात से आने वाले सांसद हेमांग जोशी को दी गई है। महिला मोर्चे की राष्ट्रीय अध्यक्ष रूप कुमारी चौधरी हैं।
किसान मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंसीलाल गुर्जर, अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य, अनुसूचित जाति मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवेश कुमार राम और अनुसूचित जनजाति मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष मन्नालाल रावत बनाए गए हैं। अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी कुंवर बासित अली को दी गई है।
इससे स्पष्ट है कि मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके प्रभारी अलग-अलग संगठनात्मक भूमिकाओं में काम करेंगे।
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का संदर्भ
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी ने हाल में राष्ट्रीय संगठन में कई अहम बदलाव किए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महासचिव के साथ उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।
बी. एल. संतोष राष्ट्रीय महासचिव संगठन के पद पर बने हुए हैं। तरुण चुघ को केंद्रीय कार्यालय की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव और संबित पात्रा को उत्तर-पूर्व समन्वय से जुड़ा दायित्व मिला है।
चुनावी तैयारियों से जुड़ा व्यापक संदर्भ
भाजपा की नई संगठनात्मक नियुक्तियों को आगामी चुनावी तैयारियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में उत्तर प्रदेश समेत कई महत्वपूर्ण राज्यों पर विशेष ध्यान दिया है।
हालांकि, केवल इन नियुक्तियों के आधार पर किसी विशेष चुनावी रणनीति का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इतना स्पष्ट है कि पार्टी संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक राजनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए जिम्मेदारियां बांट रही है।
जमीनी संगठन पर बढ़ेगा जोर
मोर्चों के नए प्रभारियों के सामने संगठनात्मक गतिविधियों को जमीनी स्तर तक ले जाने की चुनौती होगी। युवा, महिला, किसान, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक मोर्चे भाजपा के सामाजिक विस्तार में अलग-अलग भूमिका निभाते हैं।
नई जिम्मेदारियों की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि संबंधित नेता पार्टी कार्यक्रमों और कार्यकर्ता नेटवर्क को कितनी मजबूती से सक्रिय कर पाते हैं। संगठनात्मक नियुक्ति अपने आप में राजनीतिक समर्थन या चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होती।
आगे क्या
अब इन प्रभारियों की भूमिका संबंधित मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों और पार्टी के केंद्रीय संगठन के साथ समन्वय में सामने आएगी। आने वाले महीनों में कार्यकर्ता बैठकें, संगठनात्मक कार्यक्रम और विभिन्न सामाजिक समूहों से संपर्क इन नियुक्तियों की दिशा और प्रभाव को स्पष्ट करेंगे।
भाजपा के लिए चुनौती केवल पदों का बंटवारा करना नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों को प्रभावी संगठनात्मक कार्रवाई में बदलना होगी। इसी आधार पर यह तय होगा कि नई टीम पार्टी के जमीनी ढांचे को कितना मजबूत करती है।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।