पीयूष गोयल के सिंगापुर दौरे में निवेश पर बड़ा फोकस
भारत-सिंगापुर आर्थिक रिश्तों को नई रफ्तार देने की तैयारी
70 कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ सिंगापुर पहुंचे पीयूष गोयल
पीयूष गोयल 19 से 21 अगस्त तक सिंगापुर दौरे पर हैं। उनके साथ करीब 70 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल है। फोकस निवेश, व्यापार, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और बाजार पहुंच पर है। सिंगापुर भारत का बड़ा निवेश साझेदार है। दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 36.1 अरब डॉलर पहुंच चुका है।
तारीख: 19 अगस्त 2026
बाय: Mohd Naved
भारत और सिंगापुर के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 19 से 21 अगस्त तक सिंगापुर दौरे पर हैं। उनके साथ करीब 70 वरिष्ठ कारोबारी प्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल गया है। एजेंडे में निवेश, व्यापार, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सेवाएं, हेल्थकेयर, कृषि और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब सिंगापुर भारत के लिए निवेश और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में एक अहम आर्थिक साझेदार बन चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत रहा।
पीयूष गोयल सिंगापुर में चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन यानी आईएसएमआर में हिस्सा लेंगे। इसके साथ चौथा भारत-सिंगापुर बिजनेस राउंडटेबल भी आयोजित होगा।
आईएसएमआर दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की प्राथमिकताओं की समीक्षा और नए क्षेत्रों में साझेदारी तय करने का प्रमुख मंच है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह व्यवस्था दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी में प्रगति की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
दौरे के दौरान गोयल सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से भी मुलाकात करेंगे। कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के स्तर पर बी2बी, जी2बी और संस्थागत बैठकों का सिलसिला भी प्रस्तावित है।
भारत और सिंगापुर के आर्थिक संबंध पिछले दो दशकों में लगातार विस्तृत हुए हैं। व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के अनुसार, वित्त वर्ष 2004-05 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 6.7 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 36.1 अरब डॉलर हो गया।
निवेश के मोर्चे पर भी सिंगापुर की भूमिका महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2025-26 में वहां से भारत में 19.8 अरब डॉलर का एफडीआई आया। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच संचयी एफडीआई 194.68 अरब डॉलर रहा। यह भारत में कुल एफडीआई प्रवाह का लगभग एक चौथाई है।
भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज की शुरुआत सितंबर 2022 में नई दिल्ली में हुई थी। इसके बाद दूसरा दौर अगस्त 2024 में सिंगापुर में और तीसरा दौर अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुआ।
2024 के दौर में दोनों देशों ने डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, स्थिरता और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और कनेक्टिविटी को भी सहयोग के नए क्षेत्रों के रूप में जोड़ा गया था।
अब चौथे दौर में दोनों पक्ष पुराने समझौतों की प्रगति का जायजा लेने के साथ नई कारोबारी संभावनाओं पर बातचीत करेंगे।
भारत की तरफ से आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है। वाणिज्य, वित्त और विदेश नीति से जुड़े वरिष्ठ मंत्री इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार आईएसएमआर का उद्देश्य मौजूदा पहलों की समीक्षा करना और भारत-सिंगापुर सहयोग को नए तथा उभरते क्षेत्रों में आगे ले जाना है।
इस संदर्भ में कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी अहम है। सरकार स्तर की बातचीत को निवेश और वास्तविक कारोबारी परियोजनाओं से जोड़ना इस दौरे का प्रमुख पहलू है।
आर्थिक आंकड़े दोनों देशों के रिश्तों की ठोस बुनियाद दिखाते हैं। सिंगापुर भारत का आसियान क्षेत्र में सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने सिंगापुर से 24.24 अरब डॉलर का आयात किया, जबकि निर्यात 11.86 अरब डॉलर रहा। इससे 12.38 अरब डॉलर का व्यापार घाटा दर्ज हुआ।
एफडीआई के आंकड़े भी सिंगापुर की अहमियत को रेखांकित करते हैं। 19.8 अरब डॉलर का वार्षिक एफडीआई और 194.68 अरब डॉलर का संचयी निवेश भारत की अर्थव्यवस्था में सिंगापुर की मजबूत हिस्सेदारी दिखाता है।
यानी अब चुनौती केवल निवेश आकर्षित करने की नहीं है। चुनौती यह है कि निवेश को उत्पादन, निर्यात, रोजगार और तकनीकी हस्तांतरण से जोड़ा जाए।
करीब 70 कारोबारी प्रतिनिधियों की भागीदारी से बातचीत का दायरा सरकारी संवाद से आगे बढ़कर कारोबारी अमल तक पहुंचता है।
टेक्नोलॉजी और एआई में सहयोग भारत के डिजिटल और औद्योगिक विस्तार से जुड़ सकता है। मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में सिंगापुर की पूंजी और विशेषज्ञता भारतीय परियोजनाओं के लिए उपयोगी हो सकती है।
कृषि और खाद्य क्षेत्र में एपीडा-फेयरप्राइस पहल भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों को सिंगापुर के उपभोक्ता बाजार तक पहुंचाना है।
यह दौरा केवल व्यापारिक संपर्क तक सीमित नहीं है। भारत और सिंगापुर ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया है।
ऐसे में आर्थिक सहयोग विदेश नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की आर्थिक मौजूदगी बढ़ाने के लिए सिंगापुर एक अहम प्रवेश बिंदु है।
आईएसएमआर की संस्थागत प्रकृति भी महत्वपूर्ण है। इसे नियमित तंत्र के रूप में विकसित करने से दोनों देशों के बीच समझौतों की समीक्षा और क्रियान्वयन पर निरंतर निगरानी संभव होती है।
भारत के लिए सिंगापुर से आने वाला निवेश पूंजी के साथ कारोबारी नेटवर्क और वैश्विक बाजारों तक पहुंच भी देता है।
सेवाओं, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, ट्रेडिंग, टेलीकम्युनिकेशन तथा फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में सिंगापुर से निवेश पहले से मौजूद है।
दूसरी तरफ व्यापार घाटा एक ऐसा मुद्दा है जिस पर भारत को दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी। निर्यात बढ़ाने के लिए भारतीय कंपनियों को सिंगापुर के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी पहुंच दिलाना इस रिश्ते की अगली परीक्षा होगी।
सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रमुख वित्तीय और कारोबारी केंद्र है। भारत के लिए वहां मजबूत आर्थिक उपस्थिति आसियान क्षेत्र में व्यापक कारोबारी संपर्कों को सहारा दे सकती है।
भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में आर्थिक कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग का महत्व बढ़ रहा है। ऐसे में भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी का असर द्विपक्षीय रिश्तों से आगे भी जा सकता है।
सबसे अहम सवाल यह है कि दौरे के दौरान होने वाली बैठकों से कितने ठोस निवेश और कारोबारी समझौते सामने आते हैं।
दूसरा सवाल बाजार पहुंच का है। भारत के लिए सिंगापुर में कृषि, खाद्य, मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं के निर्यात को किस हद तक बढ़ाया जा सकता है।
तीसरा सवाल व्यापार घाटे का है। 2025-26 में 12.38 अरब डॉलर का घाटा बताता है कि द्विपक्षीय व्यापार में मात्रा बढ़ने के साथ संतुलन का मुद्दा भी मौजूद है।
20 अगस्त को चौथा आईएसएमआर और बिजनेस राउंडटेबल प्रमुख घटनाक्रम होंगे। दोनों पक्ष सहयोग की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करेंगे और नए क्षेत्रों में आगे की दिशा तय करेंगे।
गोयल के कार्यक्रम में सिंगापुर के सरकारी अधिकारियों, निवेश संस्थानों, कारोबारी संगठनों और वैश्विक कंपनियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं। इससे सरकार और उद्योग के बीच संवाद को व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है।
पीयूष गोयल का सिंगापुर दौरा भारत-सिंगापुर आर्थिक रिश्तों के अगले चरण की परीक्षा है। आंकड़े बताते हैं कि निवेश और व्यापार दोनों में रिश्ता मजबूत हुआ है। अब प्राथमिकता मात्रा से आगे बढ़कर गुणवत्ता, निर्यात क्षमता, तकनीकी सहयोग और वास्तविक निवेश परिणामों पर होनी चाहिए।
सिंगापुर से 19.8 अरब डॉलर का एफडीआई और 36.1 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार इस साझेदारी का मजबूत आधार है। अगला कदम इस आर्थिक रिश्ते को अधिक संतुलित और उत्पादन-केंद्रित बनाना होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।