वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल चौथे आईएसएमआर के लिए सिंगापुर रवाना हुआ। बैठक में डिजिटलाइजेशन, विनिर्माण, स्वास्थ्य, कौशल, कनेक्टिविटी और सतत विकास पर चर्चा होगी। इसका मकसद भारत-सिंगापुर आर्थिक रिश्तों को गहरा करना और नए निवेश, तकनीकी सहयोग तथा व्यापारिक अवसरों को आगे बढ़ाना है।
Location: नई दिल्ली / सिंगापुर
Date: 19 अगस्त 2026
By: Mohd Naved
भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने की कवायद के तहत केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर के लिए रवाना हुआ है। चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन यानी आईएसएमआर में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की मौजूदा स्थिति की समीक्षा और नए क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा प्रस्तावित है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं। आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने 19 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल के सिंगापुर रवाना होने की जानकारी साझा की।
चौथा आईएसएमआर भारत और सिंगापुर के बीच बने उस उच्चस्तरीय आर्थिक संवाद तंत्र का अगला चरण है, जिसकी शुरुआत सितंबर 2022 में नई दिल्ली में हुई थी। इसका मकसद केवल मंत्रालय स्तर की बातचीत तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों का व्यापक जायज़ा लेकर नई प्राथमिकताएं तय करना है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, पहला आईएसएमआर 17 सितंबर 2022 को नई दिल्ली में हुआ था। उस बैठक में डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक, हरित अर्थव्यवस्था, ग्रीन हाइड्रोजन, कौशल विकास और खाद्य उत्पादकता जैसे उभरते क्षेत्रों पर चर्चा हुई थी।
इसके बाद दूसरा दौर 26 अगस्त 2024 को सिंगापुर में हुआ। तीसरे दौर के बाद दोनों पक्षों ने सहयोग के छह प्रमुख स्तंभों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इनमें सतत विकास, डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं औषधि, उन्नत विनिर्माण और कनेक्टिविटी शामिल हैं।
आईएसएमआर को भारत-सिंगापुर रिश्तों में एक रणनीतिक आर्थिक मंच के तौर पर देखा जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग मंत्रालयों की अलग-अलग बातचीत के बजाय व्यापक आर्थिक साझेदारी पर एक साथ विचार किया जाता है।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने 2025 में कहा था कि आईएसएमआर दोनों देशों को मंत्रालय-दर-मंत्रालय संवाद से आगे बढ़कर रणनीतिक स्तर पर सहयोग देखने का अवसर देता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया था कि इस मंच का उद्देश्य घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस परिणाम हासिल करना है।
भारत और सिंगापुर के रिश्तों को सितंबर 2024 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी यानी कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिला। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस साझेदारी के छह प्रमुख स्तंभ आईएसएमआर की प्राथमिकताओं से सीधे जुड़े हैं।
पहला आईएसएमआर सितंबर 2022 में नई दिल्ली में हुआ। इसके बाद 2024 में दूसरा दौर सिंगापुर में आयोजित किया गया। 2025 में तीसरा दौर नई दिल्ली में हुआ और दोनों पक्षों ने छह प्राथमिक क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की।
2024 के दूसरे दौर में डिजिटल पेमेंट, इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग, ऊर्जा, हरित अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, कनेक्टिविटी और उन्नत विनिर्माण जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूपीआई और पे-नाउ की डिजिटल भुगतान कनेक्टिविटी तथा इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग को शुरुआती दौर के महत्वपूर्ण परिणामों में गिना गया।
यूपीआई और पे-नाउ का लिंक भारत-सिंगापुर डिजिटल आर्थिक रिश्तों की अहम मिसाल है। सिंगापुर के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस व्यवस्था ने दोनों देशों के बीच तेज और अपेक्षाकृत कम लागत वाले सीमा-पार डिजिटल भुगतान को संभव बनाया।
भारत की तरफ से वित्त, विदेश और वाणिज्य से जुड़े शीर्ष मंत्री इस वार्ता में शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत का दायरा केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेगा। व्यापार, वित्तीय सेवाओं, तकनीक, विनिर्माण और कनेक्टिविटी को एक साथ देखने की कोशिश होगी।
सिंगापुर के लिए भारत एक बड़ा आर्थिक बाजार है। सिंगापुर के आधिकारिक बयानों में भारत के साथ व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लगातार प्राथमिकता दी गई है।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भारत-सिंगापुर संबंधों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में और महत्वपूर्ण बताया था। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग का अगला चरण ठोस कारोबारी परिणामों और नए क्षेत्रों में साझेदारी पर निर्भर करेगा।
उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि आईएसएमआर के जरिए दोनों देश लगातार छह प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। 2024 की बैठक में डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, स्वास्थ्य, सतत विकास, उन्नत विनिर्माण और कनेक्टिविटी पर स्पष्ट चर्चा हुई थी।
भारत-सिंगापुर आर्थिक रिश्तों में डिजिटल सहयोग पहले ही व्यावहारिक परिणाम दे चुका है। यूपीआई-पे-नाउ लिंक और इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग इसके उदाहरण हैं।
2025 में भारत-सिंगापुर संयुक्त कार्य समूह की बैठक में व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और नियामकीय सहयोग पर भी बातचीत हुई थी। यह बताता है कि आईएसएमआर की प्राथमिकताओं को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।
चौथे आईएसएमआर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि दोनों देश पिछली बैठकों में तय प्राथमिकताओं को कितनी तेजी से कारोबारी और नीतिगत परिणामों में बदलते हैं।
उन्नत विनिर्माण और सेमीकंडक्टर सहयोग भारत के औद्योगिक विस्तार के लिए अहम है। डिजिटलाइजेशन सीमा-पार भुगतान और व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बना सकता है। कौशल विकास से उद्योगों की जरूरत के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने की दिशा मजबूत हो सकती है।
स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए बाजार और संयुक्त परियोजनाओं की गुंजाइश खोल सकता है। कनेक्टिविटी के क्षेत्र में प्रगति भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों से जोड़ने में मददगार हो सकती है।
आईएसएमआर का महत्व आर्थिक सहयोग से आगे भी जाता है। भारत और सिंगापुर के बीच संबंधों को 2024 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद दोनों देशों के रिश्तों का दायरा और विस्तृत हुआ है।
सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया और आसियान क्षेत्र में भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है। इसलिए आर्थिक संवाद के साथ डिजिटल मानक, सप्लाई चेन, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों का रणनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है।
भारत के लिए सिंगापुर लंबे समय से महत्वपूर्ण निवेश साझेदार रहा है। सिंगापुर के आधिकारिक बयानों में भारत में निवेश और भारतीय कंपनियों की सिंगापुर में मौजूदगी को दोनों देशों के रिश्तों की प्रमुख आर्थिक कड़ी बताया गया है।
नए समझौतों और परियोजनाओं का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी घोषणाएं निवेश, रोजगार, व्यापार और तकनीकी हस्तांतरण में बदलती हैं। यही वह बिंदु है जहां आईएसएमआर की सफलता को केवल बैठक और संयुक्त बयान से आगे जाकर परखा जाएगा।
भारत और सिंगापुर दोनों एशिया की सप्लाई चेन और डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रमुख कारोबारी और वित्तीय केंद्र है, जबकि भारत बड़ा उपभोक्ता बाजार और विनिर्माण आधार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ऐसे में दोनों देशों के बीच डिजिटल पेमेंट, इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सहयोग का असर द्विपक्षीय रिश्तों से आगे क्षेत्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। 2024 में सिंगापुर के विदेश मंत्री ने भी यूपीआई-पे-नाउ जैसे डिजिटल ढांचे को क्षेत्रीय स्तर पर विस्तार देने की संभावना का उल्लेख किया था।
सबसे अहम सवाल यह है कि चौथे आईएसएमआर में कितने ठोस फैसले सामने आते हैं। क्या छह प्राथमिक क्षेत्रों में नए निवेश और परियोजनाओं की घोषणा होगी, या बातचीत मुख्य रूप से नीतिगत स्तर तक सीमित रहेगी?
दूसरा सवाल यह है कि सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग को कितनी तेजी से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निजी क्षेत्र को इस साझेदारी में कितना प्रत्यक्ष अवसर मिलता है।
उपलब्ध स्रोतों में 19 अगस्त 2026 को प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने की सूचना आईएएनएस के हवाले से सामने आई है। चौथे सम्मेलन के अंतिम नतीजों और संभावित समझौतों का आकलन बैठक के आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही किया जाना उचित होगा।
बैठक में छह प्राथमिक क्षेत्रों में अब तक की प्रगति का जायज़ा लिए जाने की उम्मीद है। इसके बाद दोनों पक्ष नए सहयोग क्षेत्रों और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की रूपरेखा पर विचार करेंगे।
भारत के लिए प्राथमिकता यह होगी कि डिजिटल, विनिर्माण, निवेश और कौशल से जुड़े सहयोग को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदला जाए। सिंगापुर के लिए भारत के बड़े बाजार, तकनीकी क्षमता और क्षेत्रीय आर्थिक भूमिका के साथ जुड़ाव को और मजबूत करना महत्वपूर्ण रहेगा।
चौथा आईएसएमआर भारत-सिंगापुर रिश्तों में निरंतरता का अगला चरण है। पिछले दौरों ने डिजिटल भुगतान, इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेज और छह व्यापक सहयोग क्षेत्रों के लिए आधार तैयार किया है।
अब असली कसौटी क्रियान्वयन है। अगर नई वार्ता से निवेश, तकनीकी सहयोग, विनिर्माण, कौशल और कनेक्टिविटी में ठोस परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो आईएसएमआर दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को वास्तविक आर्थिक परिणामों से जोड़ने वाला प्रभावी मंच साबित होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।