मुज़फ़्फ़रनगर में ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा, टिकैत का बड़ा बयान
ट्रैक्टरों के साथ निकले किसान, राकेश टिकैत ने दिया आंदोलन का संकेत
मुज़फ़्फ़रनगर में भाकियू की ट्रैक्टर यात्रा, टिकैत बोले आगे संघर्ष होगा
मुज़फ़्फ़रनगर में भाकियू टिकैत ने स्वतंत्रता दिवस से पहले ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा निकाली। राकेश टिकैत ने किसान एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हुए आगे आंदोलन की रणनीति के संकेत दिए। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुज़री। दौरान युवा जिलाध्यक्ष गुलबहार राव की तबीयत बिगड़ी, मौके पर चिकित्सकीय उपचार किया गया।
मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश | 13 अगस्त 2026 | Mohd Naved
मुज़फ़्फ़रनगर में भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने स्वतंत्रता दिवस से पहले ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा निकालकर किसान एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश देने की कोशिश की। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई यात्रा में सैकड़ों ट्रैक्टर शामिल हुए और ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगाया गया। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई महावीर चौक स्थित भाकियू कार्यालय पहुंची।
यात्रा का नेतृत्व भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किया। संगठन ने इसे अगस्त क्रांति और स्वतंत्रता दिवस के संदर्भ में ‘अगस्त ट्रैक्टर क्रांति यात्रा’ बताया है। भाकियू का कहना है कि इस आयोजन का मकसद किसानों के बीच राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का संदेश पहुंचाना है।
यात्रा में शामिल किसानों ने अपने ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगाया। मुज़फ़्फ़रनगर की सड़कों पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों की मौजूदगी ने आयोजन को अलग राजनीतिक और सामाजिक दृश्य दिया।
भाकियू के मुताबिक ऐसी यात्राओं का सिलसिला पिछले वर्षों से जारी है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में भी स्वतंत्रता दिवस के आसपास मुज़फ़्फ़रनगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाकियू की ट्रैक्टर यात्राओं का उल्लेख मिलता है। 2025 में भी जिले के शहर और ब्लॉकों में ट्रैक्टर तिरंगा यात्राएं आयोजित होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
यात्रा के दौरान राकेश टिकैत ने अगस्त को देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि इसी वजह से अगस्त ट्रैक्टर क्रांति यात्रा शुरू की गई है। उन्होंने दावा किया कि भाकियू की ट्रैक्टर यात्रा 2018 से जारी है और अगस्त में देशभर में तिरंगा यात्राएं निकाली जानी चाहिए।
टिकैत ने किसान मुद्दों पर भविष्य में आंदोलन की रणनीति तैयार किए जाने के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करेंगे। इस बयान को तत्काल नए आंदोलन की घोषणा के बजाय भविष्य की रणनीति के संकेत के रूप में देखना अधिक सटीक होगा, क्योंकि उपलब्ध सामग्री में किसी निश्चित तारीख या आंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा नहीं है।
उन्होंने मुज़फ़्फ़रनगर में ट्रैक्टरों को लेकर कहा कि इन्हें कोई नहीं रोक सकता। टिकैत ने ट्रैक्टरों को किसानों की ताकत बताया और कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन में भी ट्रैक्टर आगे रहेंगे।
इस आयोजन का सियासी संदर्भ भी अहम है। स्वतंत्रता दिवस से पहले मुज़फ़्फ़रनगर में अलग-अलग संगठनों की ओर से तिरंगा यात्राएं आयोजित की जा रही हैं। ऐसे माहौल में भाकियू की ट्रैक्टर यात्रा ने किसान राजनीति और राष्ट्रवादी प्रतीकों को एक साथ सार्वजनिक मंच पर रखा।
हालांकि, यात्रा को सीधे किसी नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत कहना उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा। फिलहाल स्थापित तथ्य इतना है कि भाकियू ने यात्रा निकाली और राकेश टिकैत ने किसानों के आगामी संघर्ष की जरूरत पर बात की।
किसान संगठनों की ट्रैक्टर यात्राएं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई घटना नहीं हैं। 2024 में भी मुज़फ़्फ़रनगर में भाकियू की ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा के दौरान किसानों ने विभिन्न मांगें उठाई थीं और प्रशासन ने ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की थी।
भाकियू ने कहा है कि ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी। संगठन के मुताबिक जनपद के सभी ब्लॉकों में भी ट्रैक्टर यात्राएं आयोजित की जाएंगी।
इसका मतलब यह है कि संगठन इसे एक स्थानीय कार्यक्रम के बजाय व्यापक किसान संपर्क अभियान के रूप में देख रहा है। हालांकि, अलग-अलग ब्लॉकों में होने वाले कार्यक्रमों की तारीख, मार्ग और संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोत सामग्री में नहीं है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान संगठनों की सांगठनिक मौजूदगी मजबूत रही है। ऐसे में ब्लॉक स्तर की यात्राएं संगठन को स्थानीय कार्यकर्ताओं और किसानों के साथ संपर्क मजबूत करने का अवसर देती हैं।
राकेश टिकैत का ट्रैक्टरों को किसानों की ताकत बताना किसान आंदोलन की पुरानी राजनीतिक भाषा से जुड़ा है। 2021 के किसान आंदोलन के दौरान भी ट्रैक्टर परेड को लेकर टिकैत के इसी तरह के बयान व्यापक रूप से रिपोर्ट हुए थे। उस समय मामला दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर प्रस्तावित किसान ट्रैक्टर परेड से जुड़ा था।
लेकिन 2026 की मुज़फ़्फ़रनगर यात्रा और 2021 की दिल्ली ट्रैक्टर परेड को एक समान घटना मानना सही नहीं होगा। मौजूदा यात्रा स्वतंत्रता दिवस के पहले आयोजित तिरंगा यात्रा थी, जबकि 2021 की परेड कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के व्यापक संदर्भ में थी।
इस अंतर को समझना जरूरी है। पुराने बयानों को मौजूदा कार्यक्रम से जोड़ते समय संदर्भ और तारीख दोनों स्पष्ट रखने होंगे।
भीषण गर्मी के बीच यात्रा के दौरान भाकियू युवा जिलाध्यक्ष गुलबहार राव की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जब ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा शिव चौक पहुंची, तब उन्हें असहज महसूस हुआ।
इसके बाद उन्हें पास के एक शोरूम में लिटाया गया और चिकित्सक को बुलाया गया। डॉक्टर ने मौके पर उनका उपचार किया। उपलब्ध सामग्री में उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण या बाद की विस्तृत मेडिकल स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है, इसलिए इससे आगे कोई दावा करना उचित नहीं होगा।
मुज़फ़्फ़रनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां होने वाली बड़ी किसान गतिविधियां अक्सर स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ प्रदेश और राष्ट्रीय किसान राजनीति का भी ध्यान खींचती हैं।
ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा का मौजूदा संदेश दो स्तरों पर दिखाई देता है। पहला, किसानों को स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय प्रतीक से जोड़ना। दूसरा, संगठन की सामूहिक ताकत और भविष्य में किसान मुद्दों पर संघर्ष की तैयारी का संकेत देना।
फिर भी इसका राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भाकियू आगे किन मांगों को लेकर कार्यक्रम घोषित करती है और किसानों की भागीदारी किस स्तर तक रहती है।
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। राकेश टिकैत ने आंदोलन की रणनीति तैयार किए जाने और किसान संघर्ष की बात जरूर कही है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में किसी नए आंदोलन की तारीख, स्थान या मांगों की विस्तृत सूची घोषित नहीं की गई है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को किसान संगठन की राजनीतिक सक्रियता बढ़ने के संकेत के रूप में देखना अधिक उचित है। आगे की रणनीति और कार्यक्रम ही यह स्पष्ट करेंगे कि यह यात्रा एक वार्षिक आयोजन तक सीमित रहती है या व्यापक आंदोलन की भूमिका तैयार करती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार यात्रा बुधवार, 13 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए महावीर चौक स्थित भाकियू कार्यालय पहुंची।
यात्रा का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किया।
संगठन के मुताबिक यात्रा का उद्देश्य अगस्त क्रांति और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किसान एकता तथा राष्ट्रभक्ति का संदेश देना था।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी और किसान अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करेंगे। उन्होंने ट्रैक्टरों को किसानों की ताकत बताया।
भीषण गर्मी के दौरान भाकियू युवा जिलाध्यक्ष गुलबहार राव की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें पास के शोरूम में ले जाकर चिकित्सक से मौके पर उपचार कराया गया।
भाकियू की ओर से जिले के सभी ब्लॉकों में ट्रैक्टर यात्राएं निकालने की बात कही गई है। इसलिए आने वाले दिनों में संगठन की गतिविधियों पर नजर रहेगी।
सबसे अहम सवाल यह होगा कि इन यात्राओं के बाद किसान संगठनों की मांगें किस रूप में सामने आती हैं। यदि कोई नया आंदोलन घोषित होता है, तो उसकी मांग, समयसीमा, प्रशासनिक प्रतिक्रिया और किसान भागीदारी उसके असर का आकलन करने में निर्णायक होगी।
फिलहाल स्थापित तथ्य यह है कि मुज़फ़्फ़रनगर में भाकियू ने बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों के साथ तिरंगा यात्रा निकाली और राकेश टिकैत ने किसान संघर्ष को लेकर आगे की रणनीति के संकेत दिए। यात्रा का वास्तविक सियासी और आंदोलनात्मक असर आगे होने वाली घोषणाओं और जमीनी भागीदारी से तय होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।