गद्दाफी के बाद बंटा लीबिया, क्या अब एक होगा?
अमेरिका की नई पहल से लीबिया में सत्ता समझौते की उम्मीद
तेल, सत्ता और चुनाव, लीबिया को जोड़ने की बड़ी कोशिश
लीबिया 2011 के बाद से राजनीतिक विभाजन में फंसा है। 2026 में अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियां पूर्वी और पश्चिमी धड़ों को एक ढांचे में लाने की कोशिश कर रही हैं। साझा बजट और सैन्य वार्ताओं से प्रगति हुई है, लेकिन सत्ता, सुरक्षा और चुनाव पर मतभेद कायम हैं।
त्रिपोली, लीबिया | 21 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
मुammar गद्दाफी के पतन और 2011 के नाटो समर्थित सैन्य हस्तक्षेप के करीब 15 साल बाद लीबिया फिर एक निर्णायक सियासी मोड़ पर खड़ा है। देश में बड़े पैमाने की जंग 2020 के युद्धविराम के बाद दोबारा नहीं लौटी, लेकिन सत्ता और संस्थानों का विभाजन खत्म नहीं हुआ। पश्चिम में त्रिपोली स्थित संयुक्त राष्ट्र-मान्यता प्राप्त Government of National Unity और पूर्व में Khalifa Haftar समर्थित सत्ता ढांचा अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र बनाए हुए हैं। अब अमेरिका इस गतिरोध को तोड़ने के लिए अपनी डिप्लोमेसी तेज कर रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump के अरब और अफ्रीकी मामलों के वरिष्ठ सलाहकार Massad Boulos इस कोशिश के प्रमुख अमेरिकी चेहरों में हैं। वॉशिंगटन का मकसद केवल दो सरकारों को एक कमरे में बैठाना नहीं, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संस्थानों को एक ढांचे में लाना है।
अमेरिकी पहल का एक अहम पहलू आर्थिक प्रोत्साहन है। लीबिया के पास अफ्रीका का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, लेकिन राजनीतिक विभाजन और सुरक्षा अस्थिरता ने निवेश और उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक प्रभावित किया है। अमेरिकी कोशिश में तेल क्षेत्र में विदेशी निवेश और राष्ट्रीय एकीकरण को एक-दूसरे से जोड़ने की रणनीति दिखाई देती है। यहां अमेरिकी हित केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। लीबिया की अस्थिरता का असर अवैध प्रवासन, हथियारों की तस्करी, संगठित अपराध और चरमपंथी नेटवर्क पर पड़ता है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस के आकलन के मुताबिक वॉशिंगटन लीबिया को आतंकवादी संगठनों के लिए अनुकूल वातावरण बनने से रोकने और विदेशी सुरक्षा प्रभावों को सीमित करने में भी रुचि रखता है।
2026 में एक अहम आर्थिक पेशरफ़्त सामने आई। 11 अप्रैल को लीबिया के पूर्वी और पश्चिमी पक्षों ने एकीकृत राष्ट्रीय बजट पर सहमति बनाई। यह एक दशक से ज्यादा समय में पहला साझा राष्ट्रीय बजट था। अमेरिका, मिस्र, यूएई, इटली, फ्रांस, जर्मनी, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये और ब्रिटेन ने इसे आर्थिक समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस समझौते का महत्व इसलिए है क्योंकि लीबिया की राजनीतिक लड़ाई लंबे समय से सरकारी खर्च, केंद्रीय बैंक, तेल आय और सार्वजनिक संस्थानों के नियंत्रण से भी जुड़ी रही है। साझा बजट का मतलब राजनीतिक एकीकरण नहीं है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि दोनों पक्ष सीमित आर्थिक सहयोग के लिए समझौता कर सकते हैं। मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स के मुताबिक बजट का आकार करीब 190 अरब लीबियाई दिनार था। इसमें National Oil Corporation के संचालन और ऊर्जा उत्पादन से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे।
अमेरिकी पहल की सबसे संवेदनशील परत सत्ता के बंटवारे से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषण के मुताबिक एक संभावित फार्मूले में पश्चिमी प्रधानमंत्री Abdul Hamid Dbeibah को सरकार में बनाए रखने और पूर्वी सैन्य नेतृत्व से जुड़े Saddam Haftar को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कार्यकारी भूमिका देने की चर्चा हुई है। हालांकि इस राजनीतिक संरचना को लेकर कोई अंतिम सार्वजनिक समझौता सामने नहीं आया है।
यही वह बिंदु है जहां अमेरिकी योजना को सबसे ज्यादा आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। Chatham House के विश्लेषण में सवाल उठाया गया है कि अगर सत्ता का नया ढांचा मुख्य रूप से Dbeibah और Haftar परिवारों के बीच समझौते पर आधारित हुआ, तो इससे आम लीबियाई नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी और जवाबदेही का सवाल कमजोर हो सकता है। दूसरे शब्दों में, संस्थागत एकीकरण और अभिजात वर्ग के बीच power-sharing एक ही चीज नहीं हैं। लीबिया की स्थिरता के लिए यह तय करना होगा कि नया ढांचा केवल मौजूदा ताकतवर गुटों को साथ लाता है या सचमुच व्यापक राजनीतिक वैधता भी पैदा करता है।
लीबिया में अमेरिकी पहल अकेली डिप्लोमैटिक प्रक्रिया नहीं है। UNSMIL की Special Representative Hanna Tetteh ने 2025 में तीन स्तंभों वाला राजनीतिक रोडमैप पेश किया था। इसमें चुनाव के लिए व्यवहारिक कानूनी ढांचा, नए एकीकृत सरकार के जरिए संस्थानों को जोड़ना और व्यापक Structured Dialogue शामिल है। जून 2026 में Structured Dialogue का अंतिम चरण पूरा हुआ। इसमें करीब 120 लीबियाई प्रतिनिधियों ने शासन, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और राष्ट्रीय मेल-मिलाप जैसे मुद्दों पर काम किया। अंतिम रिपोर्ट में 525 से अधिक सिफारिशें शामिल थीं, जिनका मकसद चुनाव, संस्थागत एकीकरण और लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के कारणों को संबोधित करना है। यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र का जोर Libyan-led process पर है। यानी अंतिम राजनीतिक ढांचा बाहर से थोपा हुआ नहीं, बल्कि लीबियाई संस्थाओं और समाज की भागीदारी से तैयार होना चाहिए।
राजनीतिक समझौते से भी मुश्किल सवाल सुरक्षा क्षेत्र का है। लीबिया में पूर्व और पश्चिम के पास अलग-अलग सैन्य और सशस्त्र नेटवर्क हैं। ऐसे में एक संयुक्त सरकार बनाना आसान हो सकता है, लेकिन उसके आदेश को पूरे देश में लागू करने वाली एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था बनाना कहीं ज्यादा जटिल है। जुलाई में Sirte में पूर्वी और पश्चिमी सैन्य नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की आमने-सामने बैठक हुई। यह संवाद महत्वपूर्ण था क्योंकि दोनों पक्षों के सैन्य ढांचों के बीच संपर्क राजनीतिक समझौते के साथ सुरक्षा एकीकरण की दिशा में भी रास्ता खोल सकता है। UNSMIL के सुरक्षा संवाद में भी सैन्य और सुरक्षा संस्थानों के एकीकरण को राष्ट्रीय एकता की बुनियादी जरूरत माना गया है। लेकिन इसमें कानून का शासन, मानवाधिकार और सशस्त्र समूहों के पुनर्गठन जैसे सवाल भी शामिल हैं।
लीबिया की सियासत केवल लीबियाई गुटों और अमेरिका के बीच का मामला नहीं है। मिस्र, यूएई, तुर्किये, कतर, इटली, फ्रांस, सऊदी अरब और अन्य देश लंबे समय से लीबिया के अलग-अलग पक्षों के साथ कूटनीतिक, आर्थिक या सुरक्षा संबंध रखते आए हैं। अप्रैल के साझा बयान में इन देशों ने एकीकृत बजट और UNSMIL के रोडमैप का समर्थन किया। इससे संकेत मिलता है कि प्रमुख बाहरी शक्तियां कम से कम आर्थिक और संस्थागत एकीकरण के बुनियादी लक्ष्य पर एक साझा रुख बनाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन क्षेत्रीय सहमति और रणनीतिक सहमति अलग-अलग चीजें हैं। हर देश की लीबिया में अपनी सुरक्षा, ऊर्जा, प्रवासन और क्षेत्रीय प्रभाव से जुड़ी प्राथमिकताएं हैं। यही कारण है कि किसी भी समझौते को लागू कराने के लिए केवल अमेरिकी दबाव पर्याप्त नहीं होगा।
लीबिया की अर्थव्यवस्था में तेल की केंद्रीय भूमिका है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार National Oil Corporation उत्पादन को बढ़ाकर 2030 तक प्रतिदिन 20 लाख बैरल तक ले जाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश तलाश रही है। लेकिन राजनीतिक विभाजन, सुरक्षा जोखिम, भ्रष्टाचार और कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था विदेशी निवेश के लिए बड़ी बाधाएं हैं। अगस्त में Zawiya के तेल परिसर पर ड्रोन हमलों के बाद ईंधन भंडारण ढांचे को नुकसान पहुंचा। इससे यह साफ हुआ कि तेल उत्पादन और ऊर्जा ढांचा अभी भी सुरक्षा जोखिमों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसलिए तेल निवेश को राजनीतिक समझौते का प्रोत्साहन बनाना व्यावहारिक रणनीति हो सकती है। लेकिन अगर तेल आय के वितरण पर पारदर्शिता और संस्थागत निगरानी नहीं हुई, तो वही संसाधन भविष्य के संघर्ष का कारण भी बने रह सकते हैं।
लीबिया का आर्थिक विभाजन केवल बजट तक सीमित नहीं है। केंद्रीय बैंक को लेकर भी पूर्व और पश्चिम के बीच तनाव रहा है। अगस्त में Central Bank Governor Naji Issa ने दोनों प्रतिद्वंद्वी विधायी निकायों को इस्तीफा पत्र भेजा। उन्होंने इस्तीफे की वजहों को सार्वजनिक रूप से विस्तार से नहीं बताया। यह घटनाक्रम दिखाता है कि आर्थिक संस्थानों का एकीकरण कितना नाज़ुक है। अगर केंद्रीय बैंक, तेल आय, बजट और सरकारी भुगतान व्यवस्था पर स्थायी सहमति नहीं बनती, तो राजनीतिक एकता का ढांचा भी कमजोर रहेगा।
यहां जवाब सीधा हां या ना नहीं है। अमेरिका के पास आर्थिक प्रोत्साहन, डिप्लोमैटिक दबाव और क्षेत्रीय साझेदारों को साथ लाने की क्षमता है। 2026 के साझा बजट और सैन्य संवाद से यह भी साबित हुआ है कि सीमित मुद्दों पर समझौता संभव है। लेकिन लीबिया की समस्या केवल दो सरकारों के बीच मतभेद नहीं है। इसमें चुनावी नियम, संवैधानिक व्यवस्था, तेल आय का वितरण, सुरक्षा बलों का नियंत्रण, स्थानीय सत्ता केंद्र, सशस्त्र समूह और विदेशी प्रभाव शामिल हैं। अगर अमेरिकी पहल केवल Dbeibah और Haftar परिवारों के बीच सत्ता समझौते तक सीमित रहती है, तो उसे वैधता की चुनौती मिल सकती है। अगर इसे UNSMIL के Libyan-led राजनीतिक रोडमैप, चुनावी प्रक्रिया और व्यापक राष्ट्रीय संवाद के साथ जोड़ा जाता है, तो स्थायी समझौते की संभावना मजबूत हो सकती है। यह अंतर इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
18 अगस्त 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने कहा कि वह लीबिया में राष्ट्रीय एकता की दिशा में प्रगति को लेकर उत्साहित है और UNSMIL के रोडमैप तथा Libyan-led process का समर्थन जारी रखेगा। अमेरिकी पक्ष ने यह भी कहा कि एकीकरण का मकसद सभी लीबियाई नागरिकों की सेवा करना और देश की संप्रभुता को बनाए रखना होना चाहिए। इससे फिलहाल यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन और संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों में कुछ समान आधार बन रहा है। फिर भी निर्णायक परीक्षा चुनावी कानून, संयुक्त सरकार की वैधता और सैन्य संस्थानों के वास्तविक एकीकरण पर होगी। लीबिया के लिए सबसे व्यवहारिक रास्ता ऐसा समझौता होगा जिसमें सत्ता के साथ जवाबदेही भी हो, तेल के साथ पारदर्शिता भी हो और सुरक्षा के साथ नागरिक नियंत्रण भी हो। केवल राजनीतिक पदों का बंटवारा लंबे संकट को खत्म करने की गारंटी नहीं देता।
लीबिया को एकजुट करने की कोशिश 2011 के बाद की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों में शामिल हो सकती है, लेकिन इसे सफलता मानना अभी जल्दबाजी होगी। साझा बजट, सैन्य वार्ता और Structured Dialogue ने कुछ दरवाजे खोले हैं, मगर सत्ता, सुरक्षा और चुनाव पर बुनियादी मतभेद अभी बाकी हैं। अमेरिका के पास इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रभाव है, लेकिन अंतिम राजनीतिक वैधता लीबियाई समाज और संस्थानों से ही आनी होगी। अगर बाहरी शक्तियां स्थानीय राजनीतिक सहमति, चुनाव और संस्थागत जवाबदेही को केंद्र में रखती हैं, तो एकीकृत लीबिया की संभावना मजबूत होगी। अगर प्रक्रिया केवल तेल और सत्ता के समझौते तक सिमट गई, तो पुराना विभाजन नए रूप में लौट सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।