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ब्राजील में बिकी दुनिया की सबसे महंगी गाय, कीमत करीब 40 करोड़ रुपये; भारतीय मूल की नल्लोर नस्ल ने बनाया रिकॉर्ड

Neelam Saini • 2026-08-31 17:59:59
ब्राजील में बिकी दुनिया की सबसे महंगी गाय, कीमत करीब 40 करोड़ रुपये; भारतीय मूल की नल्लोर नस्ल ने बनाया रिकॉर्ड

ब्राजील में करोड़ों की बिकी भारतीय मूल की नल्लोर गाय, जानिए क्यों है इतनी खास

दुनिया में महंगी चीजों की चर्चा अक्सर लग्जरी कारों, मकानों, हीरों और कलाकृतियों तक सीमित रहती है, लेकिन पशुधन की दुनिया में भी कुछ जानवरों की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। ब्राजील में वियाटिना-19 एफआईवी मारा इमोविस नाम की नल्लोर गाय इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आई है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, जून 2023 में ब्राजील के अरांडू में इस गाय की एक-तिहाई हिस्सेदारी करीब 1.44 मिलियन डॉलर में बिकी थी, जिससे पूरी गाय का मूल्य करीब 4.38 मिलियन डॉलर आंका गया। गिनीज ने इसे उस समय नीलामी में बिकने वाली दुनिया की सबसे महंगी गाय के रूप में दर्ज किया था। 

बाद की रिपोर्टों में इसकी कीमत करीब 4.8 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 40 करोड़ रुपये तक बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में कीमत और बिक्री की संरचना में अंतर दिखाई देता है। इसलिए 40 करोड़ रुपये को मौजूदा या एकमुश्त नकद खरीद मूल्य के बजाय रिपोर्टेड कुल मूल्यांकन के तौर पर समझना अधिक उचित है। 

कौन है वियाटिना-19?

वियाटिना-19 ब्राजील में पाली गई नल्लोर नस्ल की गाय है। इसका जन्म ब्राजील के गोयास राज्य में हुआ था। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, जून 2023 में इसकी उम्र करीब 53 महीने थी और उस समय इसकी बिक्री ने अंतरराष्ट्रीय पशुधन बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह गाय अपनी असाधारण शारीरिक बनावट के साथ-साथ आनुवंशिक क्षमता के लिए भी जानी जाती है। रिपोर्टों के अनुसार इसका वजन करीब 1,100 किलोग्राम तक बताया गया है, जो सामान्य नल्लोर गाय के औसत वजन से काफी अधिक है। यही वजह है कि इसकी कीमत सिर्फ एक पशु की कीमत नहीं मानी जाती, बल्कि इसके आनुवंशिक संसाधन और प्रजनन क्षमता का मूल्य भी इसमें शामिल होता है।

भारतीय मूल की है नल्लोर नस्ल

वियाटिना-19 की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि नल्लोर नस्ल की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, नल्लोर नस्ल भारत से उत्पन्न हुई और इसका नाम आंध्र प्रदेश के नल्लोर क्षेत्र से जुड़ा है। यह नस्ल भारतीय जंगली बैलवंशीय पशुओं से विकसित हुई और बाद में ब्राजील के पशुधन उद्योग में बेहद महत्वपूर्ण हो गई। भारत में इस नस्ल को ओंगोल पशुधन से भी जोड़ा जाता है। आंध्र प्रदेश का ओंगोल क्षेत्र इन पशुओं के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ब्राजील में इसी आनुवंशिक विरासत से विकसित नल्लोर पशु आज वहां के व्यावसायिक पशुपालन का प्रमुख हिस्सा हैं। इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि वियाटिना-19 ब्राजील में पली नल्लोर नस्ल की गाय है, जिसकी नस्लीय उत्पत्ति भारतीय पशुधन से जुड़ी है।

आखिर इतनी महंगी क्यों है यह गाय?

किसी सामान्य गाय की कीमत और वियाटिना-19 जैसे उच्च नस्लीय मूल्य वाले पशु की कीमत की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। पशुधन के उच्च स्तरीय बाजार में कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे अहम पहलू है जेनेटिक्स यानी आनुवंशिक गुणवत्ता। यदि किसी पशु के गुण अगली पीढ़ियों में लगातार अच्छे तरीके से स्थानांतरित होते हैं, तो उसके प्रजनन मूल्य में भारी इजाफा हो सकता है। वियाटिना-19 को इसी तरह की आनुवंशिक क्षमता के कारण खास माना गया। उसकी शारीरिक बनावट, मांसपेशीय विकास, गर्म मौसम को सहने की क्षमता और प्रजनन संबंधी गुणों ने उसे ब्राजील के उच्च-मूल्य वाले पशुधन बाजार में अलग पहचान दिलाई। 

सफेद शरीर और बड़ी कूबड़ इसकी पहचान

नल्लोर नस्ल की पहचान उसके सफेद या हल्के रंग के शरीर, ढीली त्वचा और कंधों के ऊपर मौजूद प्रमुख कूबड़ से होती है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इस नस्ल में गर्मी सहने की उल्लेखनीय क्षमता भी पाई जाती है। ब्राजील जैसे गर्म जलवायु वाले देश में यह विशेषता पशुपालन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसी अनुकूलता और मजबूत शरीर के कारण नल्लोर नस्ल ब्राजील के पशुधन उद्योग में बेहद प्रभावशाली बन चुकी है।

ब्राजील में नल्लोर नस्ल इतनी लोकप्रिय कैसे हुई?

भारत से जुड़ी इस नस्ल ने ब्राजील में एक लंबा सफर तय किया है। ऐतिहासिक रूप से भारतीय जेबू नस्ल के पशुओं को ब्राजील ले जाया गया और वहां उनका प्रजनन किया गया। समय के साथ ब्राजील के पशुपालकों ने चयनात्मक प्रजनन और आधुनिक पशु आनुवंशिकी के जरिए ऐसे पशुओं का विकास किया जिनमें तेज शारीरिक विकास, गर्मी सहने की क्षमता और बेहतर आनुवंशिक गुण मौजूद हों। आज ब्राजील में नल्लोर पशु सिर्फ पारंपरिक पशुधन नहीं हैं, बल्कि बड़े व्यावसायिक और आनुवंशिक प्रजनन कार्यक्रमों का हिस्सा हैं।

गाय की कीमत में जेनेटिक्स की भूमिका

वियाटिना-19 की कहानी यह भी बताती है कि आधुनिक पशुधन उद्योग में किसी पशु की कीमत सिर्फ उसके वजन या शरीर के आकार से तय नहीं होती। उच्च गुणवत्ता वाले पशु से प्राप्त भ्रूण, अंडाणु और प्रजनन सामग्री की बाजार में अलग कीमत हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक, वियाटिना-19 की आनुवंशिक सामग्री में भी काफी रुचि दिखाई गई है। इसका उद्देश्य उसके बेहतर गुणों को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। यही कारण है कि पशुधन उद्योग में कुछ चुनिंदा पशुओं को जेनेटिक एसेट के तौर पर देखा जाता है।

क्या 40 करोड़ रुपये में पूरी गाय बिकी थी?

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। सोशल मीडिया और कई खबरों में वियाटिना-19 की कीमत करीब 40 करोड़ रुपये बताई गई है, लेकिन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का मूल रिकॉर्ड जून 2023 की उस नीलामी से संबंधित है जिसमें गाय की एक-तिहाई हिस्सेदारी करीब 1.44 मिलियन डॉलर में बेची गई थी। उस सौदे के आधार पर पूरी गाय का मूल्य करीब 4.38 मिलियन डॉलर आंका गया था। 

बाद में कुछ भारतीय मीडिया रिपोर्टों में करीब 4.8 मिलियन डॉलर यानी लगभग 40 करोड़ रुपये का मूल्य बताया गया। इसलिए खबर लिखते समय यह अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है कि 40 करोड़ रुपये का आंकड़ा कुल रिपोर्टेड वैल्यू से जुड़ा है, न कि जरूरी तौर पर पूरी गाय की एक बार में 40 करोड़ रुपये में हुई सीधी बिक्री से। 

भारत के लिए क्या मायने रखती है यह कहानी?

वियाटिना-19 की कहानी भारतीय पशुधन नस्लों की वैश्विक आनुवंशिक क्षमता की ओर भी ध्यान खींचती है। जिस नल्लोर नस्ल की जड़ें भारत में हैं, उसी नस्ल ने ब्राजील में वैज्ञानिक प्रजनन, चयनात्मक जेनेटिक्स और बेहतर पशुपालन के जरिए अत्यधिक आर्थिक मूल्य हासिल किया है।

यह मामला केवल एक महंगी गाय की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि पारंपरिक पशुधन नस्लों में मौजूद आनुवंशिक विशेषताओं को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित और विकसित किया जाए तो वे कृषि और पशुपालन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, किसी एक रिकॉर्ड कीमत को पूरी नस्ल की सामान्य बाजार कीमत मानना सही नहीं होगा। वियाटिना-19 जैसी कीमत असाधारण आनुवंशिक और प्रजनन मूल्य वाले विशिष्ट पशु से संबंधित है।

निष्कर्ष

ब्राजील की वियाटिना-19 ने दुनिया का ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि उसकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंची, लेकिन इस कहानी की असली दिलचस्पी उसके भारतीय नस्लीय इतिहास और आधुनिक पशुधन विज्ञान में छिपी है। नल्लोर नस्ल, जिसकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं, ब्राजील में बड़े पैमाने पर विकसित होकर दुनिया के महत्वपूर्ण पशुधन संसाधनों में शामिल हो चुकी है।

वियाटिना-19 का रिकॉर्ड यह संकेत देता है कि आज के पशुधन बाजार में नस्ल, आनुवंशिकी, प्रजनन क्षमता, शारीरिक विशेषताओं और वैज्ञानिक पशुपालन का आर्थिक महत्व कितना बढ़ चुका है। साथ ही, इस मामले में अलग-अलग रिपोर्टों में दर्ज कीमतों के अंतर को ध्यान में रखना भी जरूरी है, ताकि 40 करोड़ रुपये के आंकड़े को सही संदर्भ में समझा जा सके। 

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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