ज़ेलेंस्की ने अमेरिका को सौंपे रूस युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव
रूस-यूक्रेन युद्ध पर नई पहल, अमेरिका को कीव ने भेजा प्रस्ताव
ज़ेलेंस्की का बड़ा बयान, अमेरिका से शांति पहल तेज करने की अपील
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि कीव ने अमेरिका को रूस के साथ युद्ध खत्म करने के लिए प्रस्ताव भेजे हैं। उन्होंने अमेरिका से यूक्रेन की एयर डिफेंस मजबूत करने और मॉस्को पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ाने की अपील की। प्रस्तावों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कीव, यूक्रेन | 12 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि कीव ने रूस के साथ जारी युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका को नए प्रस्ताव सौंपे हैं। ज़ेलेंस्की ने मंगलवार शाम अपने वीडियो संबोधन में कहा कि यूक्रेन ने अपने प्रस्ताव अमेरिकी पक्ष तक पहुंचा दिए हैं। हालांकि, उन्होंने इन प्रस्तावों की विस्तृत शर्तें सार्वजनिक नहीं कीं।
ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से यूक्रेन की डिफेंस क्षमता, खासकर एयर डिफेंस, मजबूत करने की अपील भी की। उनका कहना है कि वॉशिंगटन मॉस्को पर ऐसा दबाव बना सकता है जिससे रूस युद्ध को लंबा खींचने के बजाय उसे खत्म करने की दिशा में आगे बढ़े।
यूक्रेन का यह कदम ऐसे वक्त सामने आया है जब अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही रूस-यूक्रेन शांति प्रक्रिया ठहराव का सामना कर रही है।
अनादोलु एजेंसी के मुताबिक जनवरी और फरवरी में अमेरिका की मध्यस्थता के तहत रूस और यूक्रेन के बीच तीन दौर की वार्ता हुई थी। इसके बाद बातचीत रुक गई। दोनों पक्षों ने इसकी वजहों में अमेरिका का ईरान और मिडिल ईस्ट संघर्ष पर बढ़ा ध्यान बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जनवरी में मॉस्को गए थे, लेकिन अभी तक कीव की यात्रा नहीं कर पाए हैं।
यही वजह है कि ज़ेलेंस्की का नया प्रस्ताव कूटनीतिक प्रक्रिया को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि इससे बातचीत तुरंत फिर शुरू हो जाएगी।
सबसे अहम बात यह है कि यूक्रेन ने प्रस्ताव का पूरा मसौदा सार्वजनिक नहीं किया है।
ज़ेलेंस्की ने इतना जरूर कहा कि अमेरिका यूक्रेन की डिफेंस क्षमता को मजबूत करने, खासकर एयर डिफेंस उपलब्ध कराने और रूस पर दबाव बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।
इसलिए फिलहाल प्रस्ताव में क्षेत्रीय सीमाओं, सुरक्षा गारंटी, युद्धविराम, प्रतिबंधों या युद्ध के बाद की व्यवस्था को लेकर क्या शर्तें रखी गई हैं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। प्रस्ताव भेजे जाने की बात ज़ेलेंस्की ने कही है, लेकिन उसकी पूरी सामग्री अभी सार्वजनिक रिकॉर्ड में नहीं आई है।
अपने संबोधन में ज़ेलेंस्की ने रूस पर शरद ऋतु में नई सैन्य लामबंदी की तैयारी का आरोप भी लगाया।
उनका दावा है कि रूस सितंबर में होने वाले संसदीय चुनावों के बाद बड़ी संख्या में नए सैनिकों की भर्ती या लामबंदी कर सकता है। ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई लाख लोगों की अतिरिक्त लामबंदी की तैयारी कर रहे हैं।
लेकिन यह यूक्रेनी राष्ट्रपति का दावा है। रूस ने पहले ऐसे दावों को खारिज किया है।
अनादोलु एजेंसी के मुताबिक क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मार्च में कहा था कि नई लामबंदी का मुद्दा एजेंडे में नहीं है। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने भी जुलाई में नई लामबंदी की जरूरत से इनकार किया था और ऐसे दावों को उकसावे तथा प्रोपेगेंडा बताया था।
इसलिए नई लामबंदी की संभावना को फिलहाल पुष्ट तथ्य के बजाय यूक्रेनी पक्ष के दावे के रूप में देखना चाहिए।
रूस का आधिकारिक रुख यह रहा है कि वह युद्ध का समाधान चाहता है, लेकिन किसी समझौते में मॉस्को की सुरक्षा चिंताओं और उसके घोषित क्षेत्रीय दावों को शामिल किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक रूस किसी समाधान में उन चार यूक्रेनी क्षेत्रों को लेकर अपनी मांगों को शामिल करना चाहता है, जिन पर मॉस्को दावा करता है। रूस ने साथ ही संघर्ष के कथित “मूल कारणों” के समाधान पर भी जोर दिया है।
यूक्रेन इसके विपरीत लगातार युद्धविराम और ऐसी शांति की मांग करता रहा है जिसमें उसकी संप्रभुता और सुरक्षा को सुरक्षित रखा जा सके।
यही बुनियादी अंतर किसी भी शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है।
रूस और यूक्रेन के बीच सीधे समझौते की कोशिशें लंबे समय से कठिन रही हैं। ऐसे में अमेरिका दोनों पक्षों के बीच एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के तौर पर सामने आया है।
कीव चाहता है कि वॉशिंगटन रूस पर दबाव बढ़ाए। साथ ही यूक्रेन अपनी एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत करने के लिए अमेरिकी समर्थन चाहता है। ज़ेलेंस्की ने दोनों मुद्दों को एक साथ जोड़ा है।
इसका मतलब यह है कि यूक्रेन की कूटनीतिक रणनीति केवल युद्धविराम तक सीमित नहीं है। कीव युद्ध के दौरान अपनी सैन्य स्थिति मजबूत रखते हुए बातचीत की स्थिति बेहतर करना चाहता है।
रूस और यूक्रेन के बीच शांति प्रक्रिया में सबसे बड़ा विवाद शर्तों को लेकर है।
यूक्रेन चाहता है कि युद्ध का अंत उसकी संप्रभुता और सुरक्षा की गारंटी के साथ हो। रूस अपनी सुरक्षा चिंताओं, क्षेत्रीय दावों और संघर्ष के कथित मूल कारणों को समझौते का हिस्सा बनाना चाहता है।
इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच दूरी काफी बड़ी है।
अमेरिका यदि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता फिर से तेज करता है, तो सबसे पहले इसी अंतर को कम करने की कोशिश होगी।
ज़ेलेंस्की ने अपने नए प्रस्तावों के संदर्भ में एयर डिफेंस को विशेष महत्व दिया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार महत्वपूर्ण सैन्य रणनीति का हिस्सा रहे हैं। यूक्रेन के लिए शहरों, ऊर्जा ढांचे और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इसलिए एयर डिफेंस की क्षमता बढ़ाना केवल युद्धक्षेत्र की जरूरत नहीं है। यह यूक्रेन की भविष्य की वार्ता स्थिति से भी जुड़ा हुआ है।
अगर यूक्रेन अपने प्रमुख शहरों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे की बेहतर सुरक्षा करता है, तो रूस के हवाई हमलों का प्रभाव कम किया जा सकता है।
फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगा।
यूक्रेन ने अमेरिका को प्रस्ताव भेजे हैं। यह कूटनीतिक पहल का संकेत है, लेकिन प्रस्तावों की वास्तविक सामग्री और रूस की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी वार्ताकारों की आगे की गतिविधियां इस प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। खास तौर पर यह देखना होगा कि वॉशिंगटन कीव और मॉस्को दोनों से बातचीत को किस स्तर तक फिर सक्रिय करता है।
किसी भी शांति पहल की सफलता के लिए रूस की प्रतिक्रिया निर्णायक होगी।
अगर मॉस्को प्रस्ताव को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार करता है, तो वार्ता आगे बढ़ सकती है। अगर रूस इसे खारिज करता है या ऐसी शर्तें रखता है जिन्हें यूक्रेन स्वीकार नहीं करता, तो गतिरोध जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।
फिलहाल रूस की ओर से इन नए यूक्रेनी प्रस्तावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए उसकी अंतिम स्थिति को लेकर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब अपने पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है।
इतने लंबे संघर्ष के बाद दोनों देशों पर सैन्य, आर्थिक और मानवीय दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद युद्ध खत्म करने की शर्तों पर दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद कायम है।
यूक्रेन का नया प्रस्ताव इसी लंबे संघर्ष के बीच कूटनीतिक रास्ता तलाशने की कोशिश है।
ग्राउंड रियलिटी यह है कि बातचीत की इच्छा और समझौते की शर्तों पर सहमति दो अलग-अलग बातें हैं।
ज़ेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेन ने अमेरिका को प्रस्ताव भेज दिए हैं। रूस भी सार्वजनिक रूप से किसी समाधान की जरूरत की बात करता रहा है। लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी, सैन्य क्षमता और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे अभी भी बेहद विवादित हैं।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को “शांति समझौता करीब” के तौर पर पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
फिलहाल इसे एक नई कूटनीतिक पहल के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
आने वाले दिनों में तीन घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे।
पहला, अमेरिका यूक्रेन के प्रस्तावों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
दूसरा, अमेरिकी वार्ताकार मॉस्को और कीव के साथ बातचीत को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
तीसरा, रूस इन प्रस्तावों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है।
इसके साथ यूक्रेन की एयर डिफेंस जरूरत और रूस की कथित नई लामबंदी को लेकर दावों पर भी नजर रहेगी।
ज़ेलेंस्की का अमेरिका को शांति प्रस्ताव भेजना रूस-यूक्रेन युद्ध में नई कूटनीतिक गतिविधि का संकेत है। कीव चाहता है कि वॉशिंगटन उसकी एयर डिफेंस क्षमता मजबूत करने के साथ मॉस्को पर युद्ध खत्म करने का दबाव भी बढ़ाए।
लेकिन प्रस्तावों की पूरी सामग्री अभी सार्वजनिक नहीं हुई है और रूस की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे शांति समझौते की शुरुआत या युद्ध खत्म होने की निश्चित दिशा के रूप में देखना अभी जल्दबाज़ी होगी।
असली परीक्षा अब अमेरिका की मध्यस्थता और रूस की प्रतिक्रिया की होगी। अगर दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटने के लिए कुछ साझा आधार तलाश लेते हैं, तो रुकी हुई शांति प्रक्रिया को नई पेशरफ़्त मिल सकती है। फिलहाल इतना ही पुष्ट है कि कीव ने वॉशिंगटन के सामने अपनी नई कूटनीतिक पहल रख दी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।