बलूच समूहों के हमले तेज, पाकिस्तानी फौज और इंफ्रास्ट्रक्चर निशाने पर
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में फिर हमले, सिंध तक पहुंचा असर
बलूच समूहों का दावा, सैन्य चौकी और बिजली टावरों पर हमला
बलूचिस्तान और सिंध में बलूच सशस्त्र समूहों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बुनियादी ढांचे पर कई हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। यूबीए ने चार सैन्यकर्मियों की मौत बताई। बीआरजी ने बिजली टावरों और सरकारी इमारत को निशाना बनाने का दावा किया। स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। क्षेत्र में पुराना विद्रोह फिर तेज है।
क्वेटा, पाकिस्तान | 13 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में बलूच सशस्त्र समूहों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर कई हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में चार सैन्यकर्मियों की मौत की बात सामने आई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है।
ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा लगातार पाकिस्तान की आंतरिक सिक्योरिटी के लिए चुनौती बनी हुई है। हाल के महीनों में सैन्य ठिकानों, पुलिस और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
यूनाइटेड बलूच आर्मी यानी यूबीए के प्रवक्ता मजार बलूच ने दावा किया कि संगठन के लड़ाकों ने सोमवार को बलूचिस्तान के बोलान क्षेत्र में डाराज़ बीट स्थित पाकिस्तानी सैन्य चेकपोस्ट पर रिमोट-कंट्रोल विस्फोटक से हमला किया।
उनके मुताबिक हमले में चार सैन्यकर्मी मारे गए और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हुआ। समूह ने दावा किया कि उसके लड़ाके सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा बलों की आवाजाही पर पहले से नजर रख रहे थे। यह विवरण फिलहाल मुख्य रूप से समूह के बयान और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।
बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स यानी बीआरजी ने बलूचिस्तान के नसीराबाद जिले में चट्टर के पास दो 220 केवी बिजली टावरों को विस्फोट से नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी लेने का दावा किया।
बीआरजी के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच के मुताबिक, टावरों में विस्फोटक लगाए गए थे। संगठन ने दावा किया कि विस्फोट के बाद दोनों टावरों को भारी नुकसान पहुंचा। बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले स्थानीय सप्लाई और आर्थिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकते हैं, हालांकि इस घटना के व्यापक बिजली प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
बीआरजी ने बलूचिस्तान के कच्छी जिले के डाडर इलाके में एक कृषि कार्यालय को निशाना बनाने का भी दावा किया। संगठन के अनुसार, 9 अगस्त को विस्फोट में इमारत को गंभीर नुकसान पहुंचा।
समूह ने आरोप लगाया कि इस कार्यालय का इस्तेमाल बलूचिस्तान के कृषि क्षेत्र के खिलाफ सरकारी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। यह आरोप बीआरजी का राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
इससे घटनाक्रम का भौगोलिक दायरा केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं रहता। बलूच सशस्त्र समूहों की गतिविधियां पहले भी सिंध के कुछ हिस्सों तक पहुंचती रही हैं, जहां रेलवे, बिजली और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्टें आती रही हैं।
बलूचिस्तान में सक्रिय कई सशस्त्र संगठन पाकिस्तान से अधिक स्वायत्तता या पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करते हैं। इनमें बलूच लिबरेशन आर्मी, बलूच लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलूच आर्मी और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स जैसे समूह शामिल हैं।
इन संगठनों की रणनीति में सुरक्षा बलों के साथ-साथ सरकारी संस्थानों, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा ढांचे और चीन से जुड़े प्रोजेक्टों को निशाना बनाना शामिल रहा है। काउंटर टेररिज्म सेंटर के विश्लेषण के अनुसार 2025 से बलूच विद्रोह में हमलों की क्षमता और समन्वय में वृद्धि देखी गई है।
बलूचिस्तान में 2026 की शुरुआत से ही हिंसा के कई बड़े दौर सामने आए हैं। जनवरी के अंत और फरवरी की शुरुआत में बलूच लिबरेशन आर्मी ने कई जिलों में समन्वित हमले किए थे। पाकिस्तान के अधिकारियों और सैन्य पक्ष ने अलग-अलग आंकड़े जारी किए, जबकि बीएलए ने अपने नुकसान और सुरक्षा बलों के नुकसान के बारे में अलग दावे किए।
रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी के अंत के हमलों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया गया था। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी अभियान चलाया और बड़ी संख्या में लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया। इन आंकड़ों में पक्षों के बीच अंतर रहा है।
12 अगस्त को भी पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान में एक अभियान में 10 आतंकवादियों के मारे जाने की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक उसी दिन सुराब जिले में एक कार बम समय से पहले फट गया, जिसमें नागरिकों और विस्फोटक तैयार करने वाले लोगों की मौत हुई। सेना ने अपने दो जवानों के घायल होने की भी जानकारी दी।
पाकिस्तानी प्रशासन बलूच अलगाववादी समूहों को सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानता है। दूसरी ओर, बलूच संगठनों का नैरेटिव राजनीतिक अधिकारों, संसाधनों और स्वतंत्रता की मांग के इर्द-गिर्द केंद्रित है। इसलिए हर नए हमले को केवल एक अलग सुरक्षा घटना के रूप में देखना इस लंबे संघर्ष की पूरी तस्वीर नहीं देता।
बलूचिस्तान में सुरक्षा संकट का एक अहम पहलू चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी सीपीईसी भी है। प्रांत में चीन से जुड़े निवेश, बंदरगाह, ऊर्जा और खनन परियोजनाएं लंबे समय से सुरक्षा जोखिमों के दायरे में रही हैं।
विश्लेषणों में बलूच सशस्त्र समूहों द्वारा चीनी नागरिकों और सीपीईसी से जुड़े प्रोजेक्टों को निशाना बनाए जाने को विद्रोह की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया गया है। इससे पाकिस्तान के लिए दोहरा दबाव पैदा होता है, आंतरिक सुरक्षा और विदेशी निवेश की सुरक्षा।
सिंध में बिजली टावरों पर ताजा दावे इस बात की ओर ध्यान खींचते हैं कि बलूचिस्तान का विद्रोह पड़ोसी प्रांतों के सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क से भी जुड़ सकता है।
सिंध में अलगाववादी गतिविधियों के अपने संगठन और राजनीतिक संदर्भ हैं। सिंधुदेश रिवोल्यूशनरी आर्मी जैसे समूहों ने अतीत में बिजली लाइनों, रेलवे और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया है। हालांकि किसी खास संगठन और ताजा घटना के बीच संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
ताजा घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण एडिटोरियल सावधानी यही है कि ज्यादातर विवरण संबंधित बलूच समूहों के बयानों से आए हैं। चार पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों की मौत, बिजली टावरों को हुए नुकसान और सरकारी इमारत पर हमले के दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है।
इसके साथ पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इन विशेष घटनाओं पर विस्तृत स्वतंत्र पुष्टि या खंडन की जानकारी उपलब्ध स्रोतों में सीमित है। इसलिए इन आंकड़ों को अंतिम और निर्विवाद casualty figure के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
अगर बलूच समूह सैन्य ठिकानों के साथ ऊर्जा और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बनाते हैं, तो पाकिस्तान को सिक्योरिटी तैनाती और आर्थिक सुरक्षा दोनों पर अतिरिक्त संसाधन खर्च करने पड़ सकते हैं।
सबसे बड़ी चुनौती बलूचिस्तान के दूरदराज इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है। पहाड़ी और विस्तृत भूगोल, स्थानीय असंतोष और अलग-अलग सशस्त्र गुटों की मौजूदगी सुरक्षा अभियानों को जटिल बनाती है। काउंटर टेररिज्म सेंटर के आकलन में भी विद्रोह की बढ़ती operational sophistication को क्षेत्रीय सिक्योरिटी के लिए गंभीर चुनौती बताया गया है।
ताजा हमले यह संकेत देते हैं कि बलूचिस्तान में विद्रोह खत्म नहीं हुआ है। पाकिस्तान ने सैन्य अभियानों के जरिए कई बार संगठनों की क्षमता को कमजोर करने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद नए हमले सामने आ रहे हैं।
इस संघर्ष का स्थायी समाधान केवल सिक्योरिटी ऑपरेशन से हासिल होगा या राजनीतिक संवाद, आर्थिक हिस्सेदारी और स्थानीय अधिकारों पर समझौते की जरूरत होगी, यह पाकिस्तान की आने वाली पॉलिसी का अहम सवाल है।
बलूचिस्तान और सिंध में ताजा हमले पाकिस्तान के सामने मौजूद लंबे समय से चले आ रहे बलूच विद्रोह की गंभीरता को फिर सामने लाते हैं। यूबीए और बीआरजी ने सैन्य और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है, लेकिन इन दावों के सभी हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
पाकिस्तान के लिए चुनौती अब केवल सुरक्षा बलों पर हमले रोकने की नहीं है। ऊर्जा, परिवहन और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भी इसी संकट का हिस्सा बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस्लामाबाद सैन्य जवाब को तेज करता है या सुरक्षा कार्रवाई के साथ राजनीतिक पहल का रास्ता भी अपनाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।