India
भाषण के बीच चीन की पर्ची, फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने मंच पर ही पढ़ दिया जवाब
Harish Qureshi
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2026-09-09 14:56:17
सियोल डिफेंस डायलॉग में फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टियोडोरो को चीन की ओर से संदेश मिला। उन्होंने उसे मंच पर पढ़ा और दक्षिण चीन सागर विवाद पर बीजिंग के रुख को तीखे अंदाज में चुनौती दी।
सियोल | 9 सितंबर 2026
Mohd Haris
सियोल में मंच पर अचानक आया चीन का संदेश
दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में मंगलवार को आयोजित सियोल डिफेंस डायलॉग के दौरान चीन और फिलीपींस के बीच दक्षिण चीन सागर विवाद की तल्खी खुले मंच पर दिखाई दी। फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टियोडोरो दक्षिण चीन सागर में समुद्री चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून पर बोल रहे थे, तभी उन्हें दर्शक दीर्घा की ओर से एक लिखित संदेश सौंपा गया।
टियोडोरो ने भाषण रोककर संदेश पढ़ना शुरू किया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि यह चीन की ओर से आया है। इसके बाद उन्होंने संदेश में लिखे चीन के रुख को सार्वजनिक रूप से पढ़ते हुए एक-एक बिंदु पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
चीन के संदेश में क्या लिखा था
रिपोर्टों के मुताबिक संदेश में चीन ने 2016 के दक्षिण चीन सागर पंचाट फैसले को स्वीकार नहीं करने का अपना पुराना रुख दोहराया। इसमें कहा गया था कि पंचाट का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और उसका कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं है।
संदेश में यह भी कहा गया कि चीन इस फैसले को न तो स्वीकार करता है और न ही मान्यता देता है। बीजिंग का कहना है कि वह दक्षिण चीन सागर में अपनी संप्रभुता, अधिकारों और हितों की रक्षा कानून के अनुरूप करेगा और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के जरिए समुद्री विवादों से निपटेगा।
टियोडोरो ने मंच से दिया जवाब
टियोडोरो ने संदेश पढ़ते हुए चीन के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जब संदेश में पंचाट फैसले को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया गया, तो उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी यूएनसीएलओएस का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या चीन का मतलब यह है कि यूएनसीएलओएस ही अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।
जब संदेश में पंचाट के फैसले को गैर-बाध्यकारी बताया गया, तब टियोडोरो ने चीन के रुख पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चीन ऐसा इसलिए कह रहा है क्योंकि वह यूएनसीएलओएस के अधीन नहीं आना चाहता।
उन्होंने इसके बाद कहा कि चीन फैसला स्वीकार नहीं करता क्योंकि वह हार गया। यह टिप्पणी सुनकर मंच पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया भी सामने आई।
‘यह दबाव और आक्रामकता है’
संदेश पढ़ने के बाद टियोडोरो ने इसे सामान्य राजनयिक संवाद से अलग बताया। उन्होंने कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सवाल का जवाब देते समय इस तरह संदेश पहुंचाना आयोजकों और वहां मौजूद प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान का सवाल भी उठाता है।
फिलीपींस के रक्षा सचिव ने इसे ‘कोएर्शन, बुलिंग और एग्रेसन’ यानी दबाव, दादागीरी और आक्रामकता बताया। उन्होंने कहा कि यह अब केवल ग्रे-जोन गतिविधि नहीं रह गई है।
इसके बाद उन्होंने फिलीपीनो भाषा में चीन को बुनियादी शालीनता रखने और कुछ शर्म करने की नसीहत दी। इसी वजह से यह घटना अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तेजी से चर्चा का विषय बन गई।
संदेश चीन की ओर से कैसे पहुंचा
इस घटनाक्रम की एक अहम बारीकी भी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक संदेश चीन के दूतावास, सियोल में तैनात एक सैन्य अटैची की ओर से आया था। अटैची ने संदेश एक कार्यक्रम कर्मचारी को दिया था और उसे टियोडोरो तक पहुंचाने के लिए कहा था।
कार्यक्रम कर्मचारी ने कथित तौर पर इसे फिलीपींस के प्रतिनिधिमंडल के संदेश के तौर पर समझा और इसे भाषण के दौरान टियोडोरो तक पहुंचा दिया
इसलिए इसे औपचारिक मंचीय हस्तक्षेप या सीधे चीनी मंत्री की ओर से दिया गया संदेश कहना सटीक नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम में चीन की ओर से कोई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मौजूद नहीं था।
2016 का पंचाट फैसला क्यों अहम है
दक्षिण चीन सागर विवाद की मौजूदा तनातनी को समझने के लिए 2016 के पंचाट फैसले की पृष्ठभूमि अहम है। फिलीपींस ने चीन के व्यापक समुद्री दावों को चुनौती देते हुए मामला स्थायी पंचाट न्यायालय के समक्ष रखा था।
पंचाट ने चीन के तथाकथित नाइन-डैश लाइन के आधार पर व्यापक ऐतिहासिक अधिकारों के दावे को कानूनी आधार नहीं दिया और फिलीपींस के समुद्री
अधिकारों से जुड़े कई दावों पर फैसला सुनाया। चीन ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और इसे अमान्य बताया।
यही मुद्दा सियोल में मिले संदेश का केंद्रीय विषय था। फिलीपींस अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत फैसले की वैधता पर जोर देता है, जबकि चीन लंबे समय से पंचाट के अधिकार क्षेत्र और फैसले को चुनौती देता रहा है।
दक्षिण चीन सागर में विवाद की जड़
दक्षिण चीन सागर एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में से एक है। चीन, फिलीपींस के अलावा कई अन्य देश भी इसके अलग-अलग हिस्सों पर दावे करते हैं।
इस क्षेत्र में समुद्री मार्ग, मत्स्य संसाधन, संभावित ऊर्जा भंडार और रणनीतिक सैन्य स्थिति महत्वपूर्ण हैं। इसलिए यहां होने वाली किसी भी समुद्री गतिविधि का असर केवल दो देशों के रिश्तों तक सीमित नहीं रहता।
फिलीपींस और चीन के बीच हाल के वर्षों में समुद्री गतिविधियों को लेकर कई टकराव हुए हैं। विशेष रूप से स्प्रैटली द्वीप समूह और सेकंड थॉमस शोल से जुड़ी गतिविधियां दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बनी हुई हैं।
टियोडोरो और बीजिंग के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण
गिल्बर्टो टियोडोरो चीन के खिलाफ फिलीपींस सरकार के सबसे मुखर रक्षा अधिकारियों में रहे हैं। वर्ष 2026 में चीन ने टियोडोरो और उनके परिवार पर मुख्य भूमि चीन, हांगकांग और मकाऊ में प्रवेश प्रतिबंध लगाए थे। चीन ने उनके बयानों को द्विपक्षीय रिश्तों और क्षेत्रीय तनाव के लिए नुकसानदेह बताया था।
फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने उस कार्रवाई को अमित्र कदम बताया था। ऐसे माहौल में सियोल की यह घटना दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनयिक तल्खी को और उजागर करती है।
दक्षिण कोरिया की भूमिका भी अहम
यह घटनाक्रम दक्षिण कोरिया की मेजबानी में आयोजित सुरक्षा संवाद के दौरान हुआ। सियोल डिफेंस डायलॉग क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा मामलों पर चर्चा का प्रमुख मंच है।
टियोडोरो ने अपने जवाब में केवल चीन के रुख पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि कार्यक्रम के मेजबान दक्षिण कोरिया और वहां मौजूद प्रतिनिधियों के सम्मान का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह संदेश पहुंचाना मेजबान के प्रति भी उचित व्यवहार नहीं था।
क्या यह सीधी धमकी थी
मूल रिपोर्टिंग में इस घटना को धमकी वाली पर्ची के तौर पर पेश किया गया है, लेकिन उपलब्ध विवरण में संदेश की सामग्री मुख्य रूप से दक्षिण चीन सागर और 2016 के पंचाट फैसले पर चीन के आधिकारिक रुख से जुड़ी थी। इसमें चीन की स्थिति को दोहराया गया था।
इसलिए इसे शाब्दिक अर्थ में व्यक्तिगत धमकी कहना उपलब्ध तथ्यों से पूरी तरह स्थापित नहीं होता। टियोडोरो ने संदेश देने की शैली और समय को दबाव, दादागीरी और आक्रामकता के तौर पर लिया। यही इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य विवादित पहलू है।
आगे क्या असर पड़ सकता है
सियोल की घटना फिलीपींस और चीन के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव की एक और सार्वजनिक मिसाल बन गई है। हालांकि इस एक घटना से दोनों देशों के रिश्तों की दिशा में तत्काल बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
असल असर दक्षिण चीन सागर में समुद्री गतिविधियों, राजनयिक बातचीत और क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों पर दोनों देशों के व्यवहार से सामने आएगा। फिलीपींस लगातार अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएनसीएलओएस के तहत अपने समुद्री अधिकारों पर जोर दे रहा है, जबकि चीन 2016 के पंचाट फैसले को खारिज करने की अपनी नीति पर कायम है।
निष्कर्ष
सियोल डिफेंस डायलॉग में हुआ यह घटनाक्रम दक्षिण चीन सागर विवाद की गहराई को सामने लाता है। मंच पर मिली पर्ची का इस्तेमाल चीन ने अपने पुराने कानूनी और राजनयिक रुख को दोहराने के लिए किया, जबकि फिलीपींस के रक्षा सचिव ने उसी मंच से उसका तीखा जवाब दिया।
‘कुछ शर्म रखिए’ वाली टिप्पणी ने घटना को सुर्खियों में ला दिया है, लेकिन इसके पीछे असली विवाद 2016 के पंचाट फैसले, यूएनसीएलओएस और दक्षिण चीन सागर में समुद्री अधिकारों को लेकर चीन और फिलीपींस की अलग-अलग व्याख्याएं हैं।
आने वाले समय में इस विवाद की दिशा केवल ऐसे सार्वजनिक टकरावों से नहीं, बल्कि समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों की गतिविधियों और उनके बीच होने वाली राजनयिक बातचीत से तय होगी।
Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।