भारत और भूटान के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीमा पार नदियों के प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान, जल विज्ञान संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान और पुनात्सांगछू-1 जलविद्युत परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों देशों ने जल संसाधनों के सतत और पारस्परिक रूप से लाभकारी उपयोग के लिए तकनीकी सहयोग और संस्थागत संवाद को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
📍 Location: नई दिल्ली
📰 Date: 8 अगस्त 2026
✍️ By: Apurva Choudhary
भारत-भूटान के बीच जल सहयोग पर उच्चस्तरीय बैठक
भारत और भूटान के बीच सीमा पार नदियों से जुड़े सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत के जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योनपो गेम त्शेरिंग ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया।
जल संसाधन सहयोग की समीक्षा
बैठक के दौरान दोनों देशों ने जल संसाधन क्षेत्र में चल रहे सहयोग की व्यापक समीक्षा की। सीमा पार नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, बाढ़ पूर्वानुमान और जल विज्ञान संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान को और प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
पुनात्सांगछू-1 परियोजना पर चर्चा
दोनों पक्षों ने भारत के सहयोग से भूटान में विकसित की जा रही पुनात्सांगछू-1 जलविद्युत परियोजना की प्रगति का भी आकलन किया। परियोजना को समय पर पूरा करने और निर्माण कार्य में तेजी लाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
जल विज्ञान नेटवर्क को मजबूत बनाने पर जोर
बैठक में भूटान के मौजूदा जल-मौसम विज्ञान नेटवर्क को आधुनिक बनाने तथा सीमा पार नदियों से जुड़े हाइड्रोलॉजिकल डेटा के आदान-प्रदान की व्यवस्था को और मजबूत करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।
तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति
भारत और भूटान ने सीमा पार जल संसाधनों के सतत एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी प्रबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने तकनीकी सहयोग, आपसी विश्वास और नियमित संस्थागत संवाद के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है
भारत और भूटान के बीच जल सहयोग दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा, बाढ़ प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम माना जाता है। सीमा पार नदियों के बेहतर प्रबंधन से न केवल प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि जलविद्युत परियोजनाओं और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
आगे क्या
दोनों देशों के अधिकारी अब बैठक में हुई सहमतियों को लागू करने के लिए तकनीकी स्तर पर समन्वय बढ़ाएंगे। जल विज्ञान डेटा साझा करने, बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली और जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर संयुक्त कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
भारत और भूटान के बीच हुई यह बैठक दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और ऊर्जा सहयोग के जरिए दोनों देश भविष्य में भी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में काम करेंगे।