भारत की जनरेशन ज़ेड ने बदल दिया ब्यूटी का बाज़ार
स्किनकेयर से ग्रूमिंग तक, Gen Z बनी ब्यूटी इंडस्ट्री की ताकत
भारत में क्यों बढ़ रहा है Gen Z का ब्यूटी क्रेज?
भारत में जनरेशन ज़ेड ब्यूटी और पर्सनल केयर की मांग को नई दिशा दे रही है। स्किनकेयर, ग्रूमिंग, डिजिटल डिस्कवरी और सोशल कॉमर्स इसका आधार हैं। रिसर्च के मुताबिक युवा उपभोक्ता अब सिर्फ लुक नहीं, बल्कि इन्ग्रीडिएंट्स, इफिकेसी, वैल्यू और सेल्फ-एक्सप्रेशन को भी खरीदारी में महत्व देते हैं। इससे ब्रांड रणनीतियां तेजी से बदल रही हैं।
नई दिल्ली | 20 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
भारत का ब्यूटी और पर्सनल केयर बाज़ार एक अहम बदलाव से गुजर रहा है और इस बदलाव के केंद्र में जनरेशन ज़ेड खड़ी दिखाई देती है। स्किनकेयर, ग्रूमिंग, मेकअप और वेलनेस को लेकर युवा उपभोक्ताओं की पसंद अब पुराने ब्यूटी मानकों से अलग है। वे प्रोडक्ट खरीदने से पहले इन्ग्रीडिएंट्स, इफिकेसी, कीमत, रिव्यू और ब्रांड की डिजिटल मौजूदगी को भी परख रहे हैं। 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत का ब्यूटी मार्केट एक नए ग्रोथ फेज में दाखिल हो रहा है। रिपोर्ट डबल-डिजिट ग्रोथ, प्रीमियमाइजेशन, वेलनेस, ई-कॉमर्स और सोशल कॉमर्स को इस बदलाव के प्रमुख कारकों में रखती है। ऐसे माहौल में डिजिटल-नेटिव युवा उपभोक्ताओं का असर ब्रांड स्ट्रैटेजी पर बढ़ना स्वाभाविक है।
मिंटेल की भारत में Gen Z ब्यूटी रूटीन पर रिसर्च बताती है कि युवा भारतीय उपभोक्ता ब्यूटी को केवल मेकअप तक सीमित नहीं देखते। स्किनकेयर, सेल्फ-केयर, लाइफस्टाइल और वेलनेस अब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। युवा उपभोक्ता अपनी त्वचा और बालों की जरूरतों को समझने तथा उसी आधार पर रूटीन बनाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस बदलाव का एक अहम पहलू सेल्फ-एक्सप्रेशन है। Gen Z के लिए ब्यूटी कई बार सामाजिक पहचान और व्यक्तिगत पसंद व्यक्त करने का माध्यम भी बनती है। इसका असर कलर कॉस्मेटिक्स, फ्रेगरेंस, हेयरकेयर और ग्रूमिंग कैटेगरी में नए फॉर्मेट और नए ब्रांड नैरेटिव के रूप में दिखाई देता है।
भारतीय Gen Z ब्यूटी कंज्यूमर के लिए स्किनकेयर एक प्रमुख कैटेगरी बनकर उभरी है। मिंटेल की 2026 फेसियल स्किनकेयर रिपोर्ट के मुताबिक Gen Z और यंगर मिलेनियल्स फेसियल स्किनकेयर के भारी उपयोगकर्ताओं में शामिल हैं। खासतौर पर क्लेंज़िंग को लेकर उनकी रुचि मजबूत है, जबकि प्रोडक्ट्स से बेसिक सफाई के अलावा अतिरिक्त स्किनकेयर फायदे की उम्मीद भी बढ़ रही है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी है। युवा उपभोक्ता लंबी और जटिल रूटीन अपनाने के बजाय ऐसे प्रोडक्ट चाहते हैं जो स्पष्ट समस्या का समाधान करें। सीरम को प्रभावी माना जाने के बावजूद उसका इस्तेमाल व्यापक स्तर पर नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार में अगला अवसर सिर्फ ज्यादा प्रोडक्ट बेचने में नहीं, बल्कि सरल और लक्षित रूटीन तैयार करने में है।
भारतीय ब्यूटी खरीदारी में इन्ग्रीडिएंट-लेड सोच अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो रही है। एनआईक्यू के मुताबिक भारतीय ग्राहक प्रोडक्ट की सामग्री, पारदर्शिता और प्रभावशीलता को पहले से ज्यादा महत्व दे रहे हैं। डिजिटल जानकारी की आसान उपलब्धता ने उपभोक्ताओं को ब्रांड के दावों की तुलना करने और दूसरे खरीदारों के अनुभव देखने का मौका दिया है। इसका सीधा असर ब्रांड कम्युनिकेशन पर पड़ रहा है। केवल आकर्षक पैकेजिंग या सेलिब्रिटी प्रमोशन पर्याप्त नहीं रह गया है। ब्रांड को यह स्पष्ट करना पड़ रहा है कि किसी प्रोडक्ट में कौन से इन्ग्रीडिएंट्स हैं, उनका इस्तेमाल किस जरूरत के लिए है और उपभोक्ता उससे किस तरह का परिणाम अपेक्षित रखे।
Gen Z की ब्यूटी खरीदारी को समझने के लिए सोशल मीडिया की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नायका की ब्यूटी समिट रिपोर्ट के अनुसार Gen Z और मिलेनियल्स भारत में ब्यूटी कंजम्पशन और ग्रोथ के प्रमुख समूहों में हैं। रिपोर्ट माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स, पीयर रिकमेंडेशन, इंस्टाग्रामेबल पैकेजिंग और तेज़ी से बदलते ट्रेंड्स को ब्यूटी कंजम्पशन के महत्वपूर्ण ट्रिगर्स में गिनाती है।
एनआईक्यू की डिजिटल ब्यूटी रिपोर्ट भी बताती है कि भारत में ऑनलाइन ब्यूटी सेल्स की रफ्तार ऑफलाइन बिक्री की तुलना में कहीं तेज रही है। डिजिटल डिस्कवरी, सोशल मीडिया, एआई-पर्सनलाइजेशन और एक्सक्लूसिव ऑनलाइन ऑफर्स ने ब्यूटी खरीदारी के तरीके को बदल दिया है।
यहां एक नया पैटर्न सामने आता है। ग्राहक पहले सोशल मीडिया पर प्रोडक्ट देखता है, फिर रिव्यू पढ़ता है, इन्ग्रीडिएंट्स की जानकारी लेता है और उसके बाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करता है। इस पूरी प्रक्रिया में ब्रांड की डिजिटल क्रेडिबिलिटी निर्णायक हो सकती है।
Gen Z का असर सिर्फ महिलाओं की ब्यूटी कैटेगरी तक सीमित नहीं है। पुरुषों की स्किनकेयर और ग्रूमिंग आदतों में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। एनआईक्यू के मुताबिक Gen Z पुरुष स्किनकेयर, सेल्फ-एक्सप्रेशन और परफॉर्मेंस-लेड प्रोडक्ट्स को लेकर ज्यादा सहज हो रहे हैं। इससे पारंपरिक पुरुष ग्रूमिंग की परिभाषा व्यापक हो रही है। मिंटेल की रिसर्च में भी युवा पुरुषों के बीच एक्ने और फेसियल स्किनकेयर को लेकर अवसर की पहचान की गई है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर Gen Z पुरुष लंबी स्किनकेयर रूटीन अपनाता है। बल्कि बाजार के लिए संकेत यह है कि पुरुषों के लिए सरल, किफायती और समस्या-केंद्रित प्रोडक्ट्स की मांग विकसित हो रही है।
Gen Z को केवल प्रीमियम उपभोक्ता मानना अधूरा नज़रिया होगा। मिंटेल के अनुसार युवा भारतीयों के लिए अफोर्डेबिलिटी और वैल्यू अभी भी अहम हैं। वे एक्सक्लूसिव और प्रीमियम प्रोडक्ट्स में दिलचस्पी दिखा सकते हैं, लेकिन खरीदारी में कीमत और वास्तविक उपयोगिता का संतुलन भी देखते हैं।
यही कारण है कि भारतीय ब्यूटी बाजार में प्रीमियमाइजेशन के साथ वैल्यू-फोकस्ड प्रोडक्ट्स भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। यूरोमॉनिटर के अनुसार भारतीय स्किनकेयर बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड विशिष्ट उपभोक्ता जरूरतों पर तेजी से प्रोडक्ट लॉन्च कर रहे हैं।
यहां एक जरूरी सावधानी भी है। भारत के पूरे ब्यूटी बाजार की वृद्धि का श्रेय केवल Gen Z को देना डेटा के लिहाज से सही नहीं होगा। बाजार में मिलेनियल्स, Gen X, नए शहरी उपभोक्ता और छोटे शहरों के ग्राहक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नायका की रिपोर्ट Gen Z और मिलेनियल्स को ब्यूटी कंजम्पशन और ग्रोथ के प्रमुख समूहों में रखती है, जबकि यूरोमॉनिटर Gen Z और Gen Alpha को पर्सनलाइजेशन और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स की भविष्य की मांग के लिए महत्वपूर्ण बताता है। इसलिए ज्यादा सटीक निष्कर्ष यह है कि Gen Z बाजार को अकेले नहीं चला रही, बल्कि उसकी दिशा और उपभोक्ता व्यवहार को तेजी से प्रभावित कर रही है।
भारत के ब्यूटी बाजार में अगला बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि महानगरों में युवा क्या खरीद रहे हैं। सवाल यह भी है कि डिजिटल ब्यूटी ट्रेंड्स टियर-टू और उससे आगे के बाजारों में किस रफ्तार से पहुंच रहे हैं। एनआईक्यू ने भारत में ब्यूटी बाजार के मेट्रो से आगे बढ़ने और मिडिल इंडिया में नए उपभोक्ता अवसरों का उल्लेख किया है। इन्ग्रीडिएंट ट्रांसपेरेंसी, कीमत, स्किन-टोन कम्पैटिबिलिटी और ऑनलाइन रिव्यू ऐसे कारक हैं जो नए उपभोक्ता समूहों के खरीदारी फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर घरेलू ब्रांड्स पर भी पड़ता है। स्थानीय जरूरतों, भारतीय मौसम, स्किन टाइप और कीमत के मुताबिक तैयार किए गए प्रोडक्ट्स को ग्लोबल ट्रेंड्स के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। भारतीय उपभोक्ता अब ग्लोबल ब्यूटी ट्रेंड देखता है, लेकिन खरीदारी में स्थानीय प्रासंगिकता भी तलाशता है।
Gen Z ने ब्यूटी कंपनियों के सामने केवल नई ग्राहक पीढ़ी की चुनौती नहीं रखी है। उसने ब्रांड बिल्डिंग का तरीका भी बदल दिया है। सोशल मीडिया कंटेंट, माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर मॉडल, ई-कॉमर्स और सोशल कॉमर्स अब मार्केटिंग स्ट्रैटेजी के अहम हिस्से बन चुके हैं।
युवा उपभोक्ता के लिए ब्रांड की कहानी भी मायने रखती है। लेकिन कहानी तभी असरदार रहती है जब प्रोडक्ट की क्वालिटी और इफिकेसी उसके साथ मेल खाए। डिजिटल दौर में खराब रिव्यू या गलत दावे तेजी से सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
उपलब्ध रिसर्च से तीन प्रमुख दिशा साफ दिखाई देती हैं। पहला, ब्यूटी और वेलनेस का मेल और मजबूत होगा। दूसरा, स्किन हेल्थ, इन्ग्रीडिएंट ट्रांसपेरेंसी और टार्गेटेड सॉल्यूशंस की मांग बढ़ेगी। तीसरा, डिजिटल कॉमर्स और सोशल डिस्कवरी ब्यूटी खरीदारी के फैसलों में और ज्यादा अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ एक और बदलाव सामने आ रहा है। ब्यूटी अब केवल बाहरी रूप-सज्जा का बाजार नहीं रह गया है। सेल्फ-केयर, वेलनेस, सेल्फ-एक्सप्रेशन और पर्सनलाइजेशन इसके कारोबारी विस्तार का हिस्सा बन रहे हैं। मिंटेल ने भारत में Gen Z के बीच एक्सपीरियंस-लेड ब्यूटी की दिशा को भी रेखांकित किया है।
भारत में जनरेशन ज़ेड ब्यूटी मार्केट की एक महत्वपूर्ण ताकत बन रही है, लेकिन इसे अकेली बाजार-ड्राइविंग ताकत बताना सही नहीं होगा। स्थापित तथ्य यह है कि युवा उपभोक्ता स्किनकेयर, ग्रूमिंग, डिजिटल डिस्कवरी, इन्ग्रीडिएंट ट्रांसपेरेंसी और सेल्फ-एक्सप्रेशन को ब्यूटी खरीदारी के केंद्र में ला रहे हैं। आने वाले दौर में उन ब्रांड्स के लिए बेहतर अवसर होंगे जो ट्रेंड का पीछा करने के बजाय वास्तविक उपभोक्ता जरूरत समझेंगे। Gen Z के लिए ब्यूटी का मतलब अब केवल अच्छा दिखना नहीं है। इसमें इफिकेसी, वैल्यू, पहचान, सुविधा और डिजिटल भरोसा भी शामिल हैं। यही बदलाव भारतीय ब्यूटी इंडस्ट्री के अगले चरण की बुनियाद तैयार कर रहा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।