होर्मुज़ पर ईरान अड़ा, नाक़वी की तेहरान यात्रा से क्या निकलेगा?
ईरान की शर्तों पर नहीं खुलेगा होर्मुज़, पाकिस्तान फिर मध्यस्थ
नाक़वी तेहरान पहुंचे, होर्मुज़ पर ईरान-अमेरिका गतिरोध कायम
ईरान ने कहा है कि अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार किए बिना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दोबारा नहीं खुलेगा। इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नाक़वी ने तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची से मुलाक़ात की। इस्लामाबाद ईरान-अमेरिका वार्ता को फिर सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है।
तेहरान / इस्लामाबाद | 12 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक रणनीतिक जलमार्ग दोबारा नहीं खोला जाएगा। इस बयान के साथ तेहरान ने साफ कर दिया है कि ओमान के साथ सुरक्षित शिपिंग रूट पर कोई तकनीकी समझौता अपने आप होर्मुज़ को पूरी तरह नहीं खोलेगा।
इसी संवेदनशील माहौल में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नाक़वी तेहरान पहुंचे। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची से मुलाक़ात की। पाकिस्तान इस्लामाबाद में पहले हुए समझौते के आधार पर ईरान-अमेरिका के बीच अपनी मध्यस्थता को फिर सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक होर्मुज़ को पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिका को कई बुनियादी शर्तों पर सहमत होना होगा। इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना, ईरान की विदेशों में जमा संपत्तियों को जारी करना और क्षेत्रीय स्तर पर युद्धविराम शामिल हैं।
तेहरान विशेष रूप से ग़ज़ा और लेबनान में भी क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त करने की मांग कर रहा है। ईरानी पक्ष का कहना है कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, होर्मुज़ बंद रहेगा।
रॉयटर्स के मुताबिक ईरान ने पहले भी कहा है कि अमेरिका को प्रतिबंध हटाने, जमे हुए ईरानी फंड जारी करने और क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने होंगे।
मोहसिन नाक़वी की यात्रा का मकसद केवल द्विपक्षीय रिश्तों पर बातचीत नहीं है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक उनका मुख्य उद्देश्य जून में हुए इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू पर आगे बढ़ना और पाकिस्तान की ईरान-अमेरिका मध्यस्थता को फिर सक्रिय करना है।
नाक़वी ने ईरानी राष्ट्रपति से मुलाक़ात में दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत और लंबे समय से कायम बताया। उन्होंने तेहरान के साथ व्यापक राजनीतिक, आर्थिक, कारोबारी, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की पाकिस्तान की इच्छा भी जाहिर की।
इस यात्रा का एक अहम पहलू यह भी है कि ओमान ने हाल के दिनों में होर्मुज़ में सुरक्षित शिपिंग व्यवस्था को लेकर ईरान के साथ बातचीत में सक्रिय भूमिका निभाई है। पाकिस्तान अब व्यापक ईरान-अमेरिका समझौते के लिए अपनी मध्यस्थता की जगह फिर बनाने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान के मुताबिक जून में हुआ इस्लामाबाद एमओयू मौजूदा विवाद के समाधान का अहम आधार है। डॉन के अनुसार तेहरान इसे व्यापक संकट के समाधान के लिए “एकमात्र वैध ढांचा” मानता है और चाहता है कि इसे दोबारा बातचीत के जरिए चुनिंदा हिस्सों में बदलने के बजाय उसी रूप में लागू किया जाए, जिस रूप में यह तय हुआ था।
ईरान अब केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिख रहा। डॉन के मुताबिक तेहरान अमेरिका से ठोस और सत्यापित संकेत चाहता है कि वॉशिंगटन समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं पर वापस आने के लिए तैयार है।
यही वजह है कि होर्मुज़ का मुद्दा अब केवल समुद्री मार्ग खोलने का तकनीकी सवाल नहीं रहा। यह सीधे युद्धविराम, प्रतिबंध, अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ईरान की संप्रभुता से जुड़ गया है।
ईरान और ओमान ने होर्मुज़ में सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए संभावित नए रूट और मैनेजमेंट सिस्टम पर बातचीत की है। क़तर ने इन वार्ताओं को आगे बढ़ता हुआ बताया है और कहा है कि उसका प्राथमिक लक्ष्य स्ट्रेट को खोलना तथा युद्धविराम को कायम रखना है।
लेकिन तेहरान ने साफ किया है कि ओमान के साथ तकनीकी व्यवस्था और होर्मुज़ का पूर्ण पुनः उद्घाटन दो अलग मुद्दे हैं।
यानी जहाज़ों के सुरक्षित गुजरने के लिए रूट पर सहमति बन भी जाए, तब भी ईरान इसे स्ट्रेट खोलने की अंतिम मंज़ूरी नहीं मान रहा। पूर्ण पुनः उद्घाटन के लिए वह अमेरिका की राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी शर्तों पर अमल चाहता है।
होर्मुज़ पर विवाद का मूल सवाल यह है कि जलडमरूमध्य में शिपिंग व्यवस्था पर अंतिम नियंत्रण किस तरह होगा।
ईरान अपने तटीय और सुरक्षा हितों के आधार पर समुद्री आवाजाही पर नियंत्रण और निगरानी का अधिकार चाहता है। दूसरी तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी सामान्य और निर्बाध अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही की बहाली चाहते हैं।
इसलिए तकनीकी शिपिंग रूट तय करना समस्या का केवल एक हिस्सा है। असली विवाद स्ट्रेट के सिक्योरिटी मैनेजमेंट, ईरानी संप्रभुता और अमेरिकी सैन्य दबाव से जुड़ा है।
वॉशिंगटन की ओर से ईरान की ताज़ा शर्तों पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर फिर सख़्त बयान दिए हैं और एक संभावित समझौते के साथ सैन्य दबाव की चेतावनी भी दोहराई है।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि स्थिति लंबे समय तक अनिश्चित रह सकती है और उन्होंने ईरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने या सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा।
इससे साफ है कि दोनों पक्षों की सार्वजनिक पोज़िशन अभी भी काफी दूर है। ईरान पहले शर्तों पर अमल चाहता है, जबकि अमेरिका लगातार दबाव और संभावित समझौते दोनों के बीच अपनी नीति चला रहा है।
पाकिस्तान के लिए यह एक मुश्किल डिप्लोमैटिक परीक्षा है। एक तरफ उसकी ईरान के साथ लंबी सीमा और पड़ोसी संबंध हैं। दूसरी तरफ सऊदी अरब, तुर्की और अमेरिका के साथ भी उसके अहम रणनीतिक संबंध हैं।
पाकिस्तान ने हाल में सऊदी अरब और तुर्की के साथ एक त्रिपक्षीय डिफेंस समझौता किया है। इस्लामाबाद ने इसे रक्षात्मक और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा करार दिया है। ईरान ने इस समझौते को लेकर सार्वजनिक तौर पर तत्काल खतरा नहीं जताया।
इस पृष्ठभूमि में नाक़वी की तेहरान यात्रा पाकिस्तान की संतुलित डिप्लोमेसी की परीक्षा भी है। उसे ईरान का भरोसा बनाए रखना है और साथ ही अमेरिका के साथ बातचीत के रास्ते को खुला रखना है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्गों में शामिल है। युद्ध से पहले वैश्विक तेल और एलएनजी प्रवाह का करीब पांचवां हिस्सा इस मार्ग से गुजरता था।
इस मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान का असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमत, एलएनजी सप्लाई, शिपिंग इंश्योरेंस और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
11 अगस्त को रॉयटर्स ने बताया कि होर्मुज़ पर गतिरोध के बीच ब्रेंट क्रूड 1.4 प्रतिशत बढ़कर 88.91 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 1.3 प्रतिशत बढ़कर 83.20 डॉलर पर पहुंच गया।
यह बाजार की उस बेचैनी का संकेत है जो लंबे समुद्री व्यवधान के साथ बढ़ सकती है।
होर्मुज़ अकेला समुद्री संकट नहीं है। 11 अगस्त को अमेरिका ने खाड़ी-ए-ओमान में एक पनामा-फ्लैग वाले मालवाहक पोत के खिलाफ कार्रवाई की। अमेरिकी सेना के मुताबिक जहाज़ ने ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन किया था।
उसी दिन बाब अल-मंदब में एक मिस्री स्वामित्व वाले पोत तिहामा पर संदिग्ध हौथी हमला हुआ, जिसमें चार क्रू सदस्यों की मौत हुई। दो यमनी बचावकर्मी भी मारे गए।
इस तरह खाड़ी-ए-ओमान, होर्मुज़ और बाब अल-मंदब, तीनों अहम समुद्री chokepoints में तनाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
अभी इसकी कोई पक्की समयसीमा नहीं है। क़तर ने ईरान-ओमान वार्ता में सकारात्मक संकेतों की बात कही है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि ओमान के साथ तकनीकी समझौता अकेले स्ट्रेट को नहीं खोलेगा।
इसलिए आगे की पेशरफ़्त इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका ईरान की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इस्लामाबाद एमओयू को दोबारा बातचीत के केंद्रीय ढांचे के तौर पर स्वीकार किया जाता है।
अगर अमेरिका और ईरान किसी सत्यापित राजनीतिक समझ पर पहुंचते हैं, तो सुरक्षित शिपिंग की बहाली का रास्ता खुल सकता है। लेकिन मौजूदा बयानों में दोनों पक्षों के बीच बड़ा फासला कायम है।
होर्मुज़ संकट पाकिस्तान के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर किसी भी लंबे व्यवधान का असर पाकिस्तान की आयात लागत और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
इसी वजह से इस्लामाबाद के लिए मध्यस्थता केवल कूटनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। क्षेत्रीय स्थिरता पाकिस्तान के अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों से जुड़ी है।
नाक़वी की यात्रा इसी व्यापक संदर्भ में देखी जानी चाहिए। पाकिस्तान एक ऐसे समाधान की कोशिश कर रहा है जिसमें ईरान की सुरक्षा चिंताओं, अमेरिकी मांगों और समुद्री व्यापार की जरूरतों के बीच कोई व्यावहारिक रास्ता निकले।
सबसे पहले यह देखना होगा कि नाक़वी की तेहरान वार्ता के बाद ईरान पाकिस्तान की मध्यस्थता को कितना महत्व देता है। दूसरा अहम सवाल यह है कि अमेरिका इस्लामाबाद एमओयू को दोबारा बातचीत के आधार के तौर पर स्वीकार करता है या नहीं।
तीसरा सवाल होर्मुज़ की शिपिंग व्यवस्था से जुड़ा है। ईरान और ओमान के बीच तकनीकी रूट पर सहमति बनने के बावजूद पूर्ण समुद्री आवाजाही के लिए राजनीतिक समझौता जरूरी रहेगा।
फिलहाल ईरान का रुख स्पष्ट है। वह अमेरिका से ठोस कदम चाहता है। पाकिस्तान बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका अभी दबाव और डिप्लोमैटिक विकल्प दोनों को खुला रखे हुए है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान का सख़्त रुख अमेरिका के साथ जारी संघर्ष को एक नए दबाव बिंदु पर ले आया है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि केवल सुरक्षित शिपिंग रूट पर ओमान के साथ तकनीकी समझौता पर्याप्त नहीं होगा। पूर्ण reopening के लिए अमेरिका को ईरान की प्रमुख शर्तों पर कार्रवाई करनी होगी।
इसी बीच मोहसिन नाक़वी की तेहरान यात्रा पाकिस्तान की मध्यस्थता को फिर सक्रिय करने की कोशिश है। ईरानी नेतृत्व के साथ उनकी मुलाक़ातें बताती हैं कि इस्लामाबाद अब भी ईरान-अमेरिका विवाद में संवाद का चैनल बनाए रखना चाहता है।
लेकिन फिलहाल किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। होर्मुज़ के भविष्य का फैसला केवल शिपिंग रूट पर नहीं, बल्कि युद्धविराम, अमेरिकी सैन्य नाकाबंदी, ईरानी संपत्तियों, क्षेत्रीय संघर्षों और इस्लामाबाद एमओयू के भविष्य पर होने वाली बड़ी कूटनीतिक बातचीत से होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।