अर्जेंटीना में नाजी दौर की लूटी पेंटिंग की वापसी
अर्जेंटीना की अदालत ने 18वीं सदी की एक ऐतिहासिक पेंटिंग को उसके मूल मालिक के वारिस को लौटाने का आदेश दिया है। यह कलाकृति द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी कब्जे के दौर में यहूदी कला कारोबारी जैक्स गाउडस्टिकर के संग्रह से जब्त की गई थी।
मार डेल प्लाटा, अर्जेंटीना | 5 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
पेंटिंग का नाम “पोर्ट्रेट ऑफ ए लेडी” है। इसे अर्जेंटीना के मार डेल प्लाटा में एक निजी घर से जुड़े मामले के दौरान दोबारा पहचाना गया। अदालत के फैसले के बाद इसे जैक्स गाउडस्टिकर की वारिस मारेई फॉन साहेर को लौटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पेंटिंग का पता कैसे चला
अगस्त 2025 में नीदरलैंड्स के पत्रकार नाजी अधिकारी फ्रेडरिक काडगियन के अर्जेंटीना पहुंचने और वहां बसने से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे थे।
इसी जांच के दौरान मार डेल प्लाटा में बिक्री के लिए उपलब्ध एक मकान की रियल एस्टेट लिस्टिंग में पेंटिंग की तस्वीर दिखाई दी। तस्वीर में कलाकृति एक बैठक में सोफे के ऊपर लगी हुई
नजर आई।
पत्रकारों ने इस तस्वीर की तुलना उन ऐतिहासिक अभिलेखों से की, जिनमें नाजी दौर में लूटी गई और बाद में लापता हुई कलाकृतियों का विवरण दर्ज था। इसके बाद अर्जेंटीना में मामले की जांच
शुरू हुई।
पेंटिंग किसके संग्रह से लूटी गई थी
जैक्स गाउडस्टिकर नीदरलैंड्स के प्रमुख यहूदी कला कारोबारियों में शामिल थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी ने नीदरलैंड्स पर कब्जा कर लिया था।
इसी दौर में गाउडस्टिकर के विशाल कला संग्रह पर कब्जा कर लिया गया। उनकी कई कलाकृतियां युद्ध के बाद बरामद हुईं, लेकिन संग्रह की कुछ कृतियों का दशकों तक पता नहीं चल सका।
“पोर्ट्रेट ऑफ ए लेडी” भी उन्हीं कलाकृतियों में शामिल थी। इसके लंबे समय तक गायब रहने के बाद अर्जेंटीना में इसकी पहचान होना मामले का अहम मोड़ बना।
कलाकार की पहचान पर भी हुआ बदलाव
पेंटिंग की पहचान को लेकर भी विशेषज्ञ जांच हुई। शुरुआती जानकारी में इसे इतालवी चित्रकार ज्यूसेप्पे घिसलांदी से जोड़ा गया था।
बाद में अर्जेंटीना की नेशनल एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स के विशेषज्ञों ने जांच के आधार पर इसे जियाकोमो एंतोनियो मेल्कियोरे चेरूती की कृति बताया।
यह बदलाव पेंटिंग की ऐतिहासिक पहचान और उसके मूल संग्रह से जुड़े रिकॉर्ड की जांच में महत्वपूर्ण माना गया।
अर्जेंटीना के दंपति ने क्या किया
पेंटिंग पैट्रिशिया काडगियन और उनके पति हुआन कार्लोस कोर्टेगोसो के पास थी। पैट्रिशिया काडगियन नाजी अधिकारी फ्रेडरिक काडगियन की बेटी हैं।
अदालत की कार्यवाही के दौरान दंपति ने पेंटिंग पर अपने अधिकार और दावे छोड़ने पर सहमति दी। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को मंजूरी देते हुए पेंटिंग को उसके मूल मालिक
के वारिस को लौटाने का रास्ता साफ किया।
समझौते के तहत दंपति को न्यायिक निगरानी में कुछ शर्तों का पालन करना होगा। उन्हें मार डेल प्लाटा के एक अस्पताल के लिए आर्थिक योगदान भी करना होगा।
मारेई फॉन साहेर को मिलेगी पेंटिंग
मारेई फॉन साहेर जैक्स गाउडस्टिकर की बहू और उनकी एकमात्र वारिस हैं। लंबे समय से उनका परिवार नाजी दौर में जब्त की गई कलाकृतियों को वापस हासिल करने की कोशिश करता रहा
है।
इस मामले में अदालत का आदेश उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे उस कला कृति को उसके ऐतिहासिक स्वामित्व से जुड़े परिवार तक वापस पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है
नाजी शासन के दौरान यहूदी परिवारों और कला कारोबारियों से बड़ी संख्या में कलाकृतियां जबरन छीनी गई थीं। युद्ध खत्म होने के बाद इनमें से कई कृतियां संग्रहालयों, निजी संग्रहों और कला
बाजारों में अलग-अलग देशों तक पहुंच गईं।
ऐसी कलाकृतियों की वापसी को लेकर आज भी दुनिया के कई देशों में कानूनी और ऐतिहासिक प्रक्रिया चलती है। हर मामले में स्वामित्व, खरीद-बिक्री और युद्धकालीन कब्जे से जुड़े दस्तावेजों
की जांच करनी पड़ती है।
इस मामले की खासियत यह है कि दशकों बाद एक सामान्य मकान की बिक्री के विज्ञापन में दिखाई गई तस्वीर ने लापता कलाकृति का सुराग दिया।
80 साल बाद सामने आया इतिहास
यह मामला बताता है कि युद्धकालीन कला लूट से जुड़े विवाद कितने लंबे समय तक बने रह सकते हैं। एक कलाकृति की पहचान के लिए पुराने अभिलेख, स्वामित्व दस्तावेज और विशेषज्ञ जांच
एक साथ जरूरी होते हैं।
अर्जेंटीना की अदालत के फैसले के बाद अब “पोर्ट्रेट ऑफ ए लेडी” की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह फैसला नाजी दौर में लूटी गई कला की वापसी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में एक
महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।