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वसीम अकरम ने पाकिस्तान के टैलेंट सिस्टम पर उठाए सवाल, वैभव सूर्यवंशी का दिया उदाहरण
Wasi Siddiqui
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2026-09-12 15:50:38
वसीम अकरम ने पाकिस्तान के क्रिकेट सिस्टम पर सवाल उठाते हुए वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण दिया। उन्होंने पीएसएल, क्लब क्रिकेट और घरेलू ढांचे में सुधार की जरूरत बताई।
📍 लाहौर, पाकिस्तान
🗓️ 12 सितंबर 2026
✍️ वसी सिद्दीकी
पाकिस्तान के क्रिकेट सिस्टम पर वसीम अकरम का सवाल
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने देश के टैलेंट डेवलपमेंट सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लाहौर में मीडिया से बातचीत के दौरान अकरम ने भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए पूछा कि पाकिस्तान की प्रमुख घरेलू टी-20 लीग अब तक इसी स्तर की बल्लेबाजी प्रतिभा तैयार करने में क्यों सफल नहीं हुई।
अकरम की टिप्पणी का केंद्र केवल वैभव सूर्यवंशी नहीं था। उनकी चिंता पाकिस्तान में युवा बल्लेबाजों की तलाश, उन्हें तैयार करने और घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को लेकर है।
पीएसएल के एक दशक पर सवाल
पाकिस्तान सुपर लीग की शुरुआत 2016 में हुई थी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार इसकी पहली प्रतियोगिता फरवरी 2016 में खेली गई थी। 2026 में लीग का 11वां सत्र आयोजित हुआ।
इसी लंबे सफर का हवाला देते हुए अकरम ने पूछा कि क्या इस लीग ने पाकिस्तान को ऐसा उल्लेखनीय बल्लेबाज दिया है, जो राष्ट्रीय टीम के लिए लंबे समय तक योगदान दे सके।
उनके मुताबिक पीएसएल ने पाकिस्तान को कुछ अच्छे गेंदबाज जरूर दिए हैं, लेकिन बल्लेबाजी में वैसी प्रतिभा सामने नहीं आई, जैसी वह अपेक्षा कर रहे थे। यह अकरम का मूल्यांकन है और इसे पाकिस्तान क्रिकेट के पूरे प्रदर्शन पर आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
वैभव सूर्यवंशी क्यों बने उदाहरण
अकरम ने अपनी बात समझाने के लिए भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण दिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खिलाड़ी रिकॉर्ड में सूर्यवंशी की उम्र 15 वर्ष दर्ज है। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और उनका अंतरराष्ट्रीय पदार्पण 2026 में हुआ।
सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अनुसार जुलाई 2026 में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने पुरुष टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 15 वर्ष की उम्र में अर्धशतक बनाया और इस प्रारूप में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बने।
रॉयटर्स के अनुसार 2026 के आईपीएल सत्र में सूर्यवंशी ने 16 मैचों में 776 रन बनाए थे। इसके बाद वह भारत की टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम तक पहुंचे और 4 जुलाई 2026 को इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया।
यही पृष्ठभूमि अकरम के तर्क को समझने में महत्वपूर्ण है। वह एक ऐसे युवा खिलाड़ी की मिसाल दे रहे थे, जिसने कम उम्र में घरेलू क्रिकेट, फ्रेंचाइजी क्रिकेट और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी जगह बनाई।
अकरम ने अपनी टिप्पणी में उम्र को लेकर गलती की
रिपोर्ट के अनुसार अकरम ने बातचीत के दौरान सूर्यवंशी को 14 वर्ष का बताया। मौजूदा रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी उम्र 15 वर्ष है। इसलिए अकरम की टिप्पणी में उम्र को लेकर अंतर है।
हालांकि, उनकी टिप्पणी का मूल संदर्भ पाकिस्तान में युवा बल्लेबाजी प्रतिभा तैयार करने की प्रक्रिया था। उपलब्ध रिपोर्टिंग में भी सूर्यवंशी को उसी संदर्भ में उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।
सिर्फ पीएसएल पर निर्भर रहने से समस्या हल नहीं होगी
अकरम ने पाकिस्तान के टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत करने के लिए क्लब क्रिकेट पर जोर दिया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में खिलाड़ी क्लब क्रिकेट से निकलते हैं और अगर रेड बॉल क्रिकेट में सुधार करना है, तो जमीनी स्तर की इस व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कराची और लाहौर में क्लब क्रिकेट के लिए पीएसएल से 100-100 मिलियन पाकिस्तानी रुपये खर्च करने की बात भी कही। उनका सुझाव इस सोच पर आधारित है कि प्रतिभा की तलाश केवल बड़ी टी-20 लीग तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
यह पहलू इसलिए अहम है क्योंकि टी-20 क्रिकेट और टेस्ट क्रिकेट की जरूरतें अलग हैं। छोटे प्रारूप में आक्रामक बल्लेबाजी और तेज निर्णय क्षमता महत्वपूर्ण होती है, जबकि रेड बॉल क्रिकेट में तकनीक, धैर्य, लंबे समय तक एकाग्रता और परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होती है।
टेस्ट क्रिकेट को लेकर अकरम की चिंता
अकरम ने पाकिस्तान की टेस्ट क्रिकेट स्थिति को लेकर भी चिंता जाहिर की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने घरेलू और विदेशी परिस्थितियों में बांग्लादेश के खिलाफ पाकिस्तान की टेस्ट सीरीज हार को चेतावनी के तौर पर देखा और कहा कि ऐसे संकेतों के बाद सुधार की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केवल कोच बदलने से मूल समस्या दूर नहीं होगी। उनके मुताबिक किसी भी नए कोच को आखिरकार उसी खिलाड़ी समूह के साथ काम करना होगा। इसलिए समस्या का समाधान चयन प्रक्रिया, घरेलू क्रिकेट और टैलेंट डेवलपमेंट की बुनियाद में तलाशना होगा।
घरेलू ढांचे को समय देने की सलाह
अकरम ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के नए घरेलू ढांचे को समय देने की वकालत की। रिपोर्टों के अनुसार उनका मानना है कि घरेलू व्यवस्था को कम से कम 3 से 4 वर्ष तक निरंतरता के साथ चलने देना चाहिए, ताकि उसके नतीजों का सही आकलन किया जा सके।
यह सुझाव पाकिस्तान क्रिकेट में बार-बार होने वाले प्रशासनिक और रणनीतिक बदलावों की बहस से भी जुड़ता है। युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में समय लगता है। घरेलू प्रतियोगिताओं में अवसर, प्रशिक्षित कोचिंग, नियमित प्रतिस्पर्धा और लंबी अवधि की चयन नीति इसके अहम हिस्से हैं।
भारत और पाकिस्तान के मॉडल की तुलना कितनी सही?
अकरम ने वैभव सूर्यवंशी को उदाहरण बनाकर भारत और पाकिस्तान की टैलेंट पाइपलाइन की तुलना की है। लेकिन दोनों देशों के क्रिकेट ढांचे को पूरी तरह समान मानना सही नहीं होगा।
भारत में आईपीएल के साथ राज्य संघों, घरेलू प्रतियोगिताओं, आयु वर्ग के क्रिकेट और राष्ट्रीय स्तर की चयन व्यवस्था का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। पाकिस्तान में भी घरेलू क्रिकेट और पीएसएल का अपना ढांचा है। इसलिए किसी एक खिलाड़ी की सफलता से पूरे क्रिकेट सिस्टम की गुणवत्ता का अंतिम फैसला नहीं किया जा सकता।
सूर्यवंशी की उपलब्धियां निश्चित रूप से असाधारण हैं, लेकिन एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी का उभरना और किसी देश के टैलेंट डेवलपमेंट सिस्टम की समग्र सफलता दो अलग विषय हैं। इसी तरह पीएसएल से किसी खास तरह के बल्लेबाज के उभरने की कमी को केवल लीग की विफलता मानना भी एक सरलीकृत निष्कर्ष होगा।
असल बहस टैलेंट पाइपलाइन की है
अकरम की टिप्पणी का सबसे अहम पहलू यही है कि उन्होंने चर्चा को केवल किसी खिलाड़ी या लीग की कामयाबी तक सीमित नहीं रखा। सवाल यह है कि युवा प्रतिभा की पहचान कहां होती है, उसे कितने प्रतिस्पर्धी मैच मिलते हैं, कोचिंग कैसी होती है और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने के लिए उसके सामने किस तरह का रास्ता मौजूद है।
अगर क्लब क्रिकेट कमजोर है, तो शुरुआती स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान प्रभावित हो सकती है। अगर घरेलू क्रिकेट में निरंतरता नहीं है, तो खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप की तैयारी में मुश्किल आ सकती है। इसी तरह चयन नीति में बार-बार बदलाव होने पर युवा खिलाड़ियों को स्थिर अवसर मिलना कठिन हो सकता है।
पाकिस्तान क्रिकेट के लिए आगे की चुनौती
पाकिस्तान क्रिकेट के सामने चुनौती केवल नए बल्लेबाज खोजने की नहीं है। असल चुनौती ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है जिसमें प्रतिभा की पहचान कम उम्र में हो, उसे पर्याप्त मैच अनुभव मिले और प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता बने।
अकरम ने क्लब क्रिकेट को इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया है। उनका जोर इस बात पर है कि टैलेंट डेवलपमेंट को केवल पीएसएल के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
इस बहस में पीएसएल की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। लीग का 11वां सत्र 2026 में आयोजित हुआ और आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस सत्र में टीमों की संख्या बढ़कर 8 हुई। इससे लीग का दायरा बढ़ा है, लेकिन युवा बल्लेबाजी प्रतिभा को राष्ट्रीय टीम के लिए तैयार करने की उसकी क्षमता का आकलन प्रदर्शन और दीर्घकालीन परिणामों से ही होगा।
आगे क्या देखना होगा
अब पाकिस्तान क्रिकेट में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घरेलू ढांचे में अकरम द्वारा उठाए गए सवालों का किस तरह जवाब मिलता है। क्लब क्रिकेट में निवेश, आयु वर्ग के खिलाड़ियों की पहचान, घरेलू प्रतियोगिताओं की गुणवत्ता और चयन प्रक्रिया की निरंतरता इस बहस के प्रमुख बिंदु रहेंगे।
वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण पाकिस्तान के लिए किसी सीधी नकल का सुझाव नहीं है। यह उस अंतर पर सवाल है, जिसमें एक युवा खिलाड़ी को प्रतिभा से उच्च स्तर तक पहुंचने के लिए किस तरह का सिस्टम मिलता है।
अंततः पाकिस्तान क्रिकेट के लिए चुनौती एक ऐसे बल्लेबाज की तलाश से कहीं बड़ी है, जो अगले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय टीम में जगह बना सके। चुनौती ऐसी टिकाऊ टैलेंट पाइपलाइन बनाने की है, जिसमें क्लब क्रिकेट से लेकर घरेलू स्तर और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक खिलाड़ियों के विकास का स्पष्ट और निरंतर रास्ता मौजूद हो। अकरम की टिप्पणी ने इसी बुनियादी सवाल को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है।
Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।