अमेरिकी सेना के सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस्तीफा सौंप दिया। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ महीनों से तनाव और सेना की नीतियों पर मतभेद इसकी प्रमुख पृष्ठभूमि रहे।
वॉशिंगटन डीसी | 1 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
अमेरिकी सेना के शीर्ष नागरिक अधिकारी डैन ड्रिस्कॉल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान में वरिष्ठ नेतृत्व को लेकर लगातार बदलाव चल रहे हैं।
ड्रिस्कॉल फरवरी 2025 से अमेरिकी सेना के सचिव के पद पर थे और करीब 18 महीने बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
ड्रिस्कॉल के इस्तीफे की सबसे अहम पृष्ठभूमि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ उनके तनाव को माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, ड्रिस्कॉल ने ट्रंप प्रशासन के सामने सेना के Transformation और Readiness से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी। उनके मुताबिक हेगसेथ द्वारा संबंधित वरिष्ठ जनरलों को हटाए जाने से सेना के आधुनिकीकरण की कोशिशों पर असर पड़ रहा था।
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाने और रक्षा विभाग में निर्णय लेने के तौर-तरीकों को लेकर पेशेवर और व्यक्तिगत मतभेद बढ़े थे।
हालांकि व्हाइट हाउस ने इस्तीफे की आधिकारिक वजह के तौर पर इन मतभेदों को घोषित नहीं किया है।
दोनों के बीच तनाव बढ़ने की एक अहम वजह सेना के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को हटाया जाना था।
हेगसेथ ने अप्रैल में जॉर्ज को उनके पद से हटा दिया था। ड्रिस्कॉल और जॉर्ज के बीच करीबी कामकाजी संबंध थे। कांग्रेस की सुनवाई में ड्रिस्कॉल ने कहा था कि उन्हें जॉर्ज को हटाए जाने का कारण पहले से नहीं पता था।
रिपोर्ट के मुताबिक इस घटनाक्रम के बाद ड्रिस्कॉल और हेगसेथ के बीच तनाव और बढ़ गया।
ड्रिस्कॉल ने अमेरिकी सेना को अधिक चुस्त और तकनीक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया था।
उन्होंने कम लागत वाले हथियारों की तेज खरीद और ड्रोन जैसी नई युद्ध तकनीकों को बढ़ावा देने की कोशिश की। उन्होंने बड़े रक्षा ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे।
उनकी प्राथमिकताओं में सेना की Readiness, हथियारों की खरीद प्रक्रिया और सैन्य तकनीक में बदलाव शामिल थे।
यही क्षेत्र बाद में हेगसेथ के साथ नीति संबंधी मतभेदों का हिस्सा बने।
डैन ड्रिस्कॉल की भूमिका केवल सेना के प्रशासन तक सीमित नहीं रही।
राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता से जुड़े प्रयासों में भी शामिल किया था। सेना के सचिव के लिए यह असामान्य कूटनीतिक भूमिका थी।
इससे ड्रिस्कॉल की प्रशासन के भीतर अलग राजनीतिक और रणनीतिक पहुंच भी दिखाई दी।
वह उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पुराने परिचित भी हैं। दोनों ने येल लॉ स्कूल में साथ पढ़ाई की थी।
व्हाइट हाउस ने ड्रिस्कॉल के कार्यकाल की प्रशंसा की।
प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि ड्रिस्कॉल ने ट्रंप के एजेंडे को आगे बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभाई और सैन्य अभियानों, Readiness तथा Russia-Ukraine वार्ता में योगदान दिया।
इस बयान में हेगसेथ के साथ किसी विवाद को इस्तीफे का कारण नहीं बताया गया।
यही वजह है कि रिपोर्टों में सामने आए आंतरिक मतभेदों और आधिकारिक बयान के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
ड्रिस्कॉल का इस्तीफा अमेरिकी सेना में पहले से चल रहे नेतृत्व बदलावों के बीच हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक हेगसेथ के कार्यकाल में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया या किनारे किया गया है। इनमें सेना के चीफ ऑफ स्टाफ रैंडी जॉर्ज और यूरोप-अफ्रीका में अमेरिकी सेना के कमांडर जनरल क्रिस्टोफर डोनाह्यू से जुड़े बदलाव शामिल हैं।
रिपोर्ट ने ड्रिस्कॉल के इस्तीफे को ट्रंप प्रशासन के सैन्य नेतृत्व में व्यापक बदलावों का हिस्सा बताया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष में भी शामिल है और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व में तैनात हैं।
ड्रिस्कॉल के जाने के बाद सेना के अगले स्थायी सचिव की नियुक्ति अब महत्वपूर्ण होगी।
इस समय बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप प्रशासन सेना के आधुनिकीकरण, हथियार खरीद और वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को लेकर अपनी मौजूदा नीति को जारी रखेगा या उसमें बदलाव करेगा।
ड्रिस्कॉल की विदाई से इन नीतिगत बहसों पर तत्काल असर पड़ने की संभावना है, लेकिन अगले स्थायी सेना सचिव की नियुक्ति के बिना भविष्य की दिशा पर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।