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इंडोनेशिया की आग से बोर्नियो में धुंध का कहर, हवा इतनी जहरीली कि बढ़ी सांस की बीमारी

Harish Qureshi • 2026-09-01 14:49:24
इंडोनेशिया की आग से बोर्नियो में धुंध का कहर, हवा इतनी जहरीली कि बढ़ी सांस की बीमारी

इंडोनेशिया के कालिमंतान में लगी जंगल और पीटलैंड की आग का धुआं मलेशियाई बोर्नियो तक पहुंच गया है। सरावाक के छह इलाकों में हवा खतरनाक स्तर पर दर्ज हुई।


बोर्नियो | 1 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris


धुएं ने मलेशियाई बोर्नियो को घेरा


इंडोनेशिया के बोर्नियो क्षेत्र यानी कालिमंतान में लगी जंगल और पीटलैंड की आग से उठी घनी धुंध सीमा पार कर मलेशिया के सरावाक तक पहुंच गई है। सरावाक के कई इलाकों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।


1 सितंबर की सुबह मलेशिया के एयर पॉल्यूटेंट इंडेक्स के मुताबिक सरावाक के छह इलाकों में एपीआई 300 से ऊपर था। सेरियन में 408, कुचिंग में 407, समराहन में 372, श्री अमान में 361, सारीकेई में 333 और सिबू में 309 दर्ज किया गया। 300 से ऊपर का स्तर “खतरनाक” माना जाता है।


कुचिंग में हवा कितनी खराब?


कुचिंग में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। आईक्यूएयर के ताजा आंकड़ों में 1 सितंबर को कुचिंग का अमेरिकी एआईक्यूआई स्तर 468 तक पहुंचा, जिसे खतरनाक श्रेणी में रखा गया। पीएम2.5 की सांद्रता भी विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक गाइडलाइन से कई गुना ऊपर दर्ज हुई।


सेरियन की स्थिति भी खास तौर पर गंभीर है। यह इलाका इंडोनेशिया के कालिमंतान की सीमा के करीब है और वहां प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है।


इंडोनेशिया से मलेशिया तक कैसे पहुंच रहा धुआं?


बोर्नियो द्वीप का बड़ा दक्षिणी हिस्सा इंडोनेशिया के कालिमंतान में आता है, जबकि उत्तर में मलेशिया के सरावाक और साबाह स्थित हैं। इसी भौगोलिक स्थिति के कारण कालिमंतान में लगी आग का धुआं हवा के रुख के साथ मलेशिया तक पहुंच सकता है।


आसियान स्पेशलाइज्ड मीटियोरोलॉजिकल सेंटर के मुताबिक, कालिमंतान और सुमात्रा में बड़ी संख्या में हॉटस्पॉट दर्ज हुए हैं। मध्यम से घनी सीमा पार धुंध ने उत्तर, पश्चिम और मध्य कालिमंतान के साथ सरावाक, साबाह और ब्रुनेई के कई हिस्सों को प्रभावित किया है।


सांस की बीमारियां बढ़ीं


धुंध का असर केवल दृश्यता तक सीमित नहीं है। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 23 से 29 अगस्त के सप्ताह में अस्थमा के मामले बढ़कर 1,811 हो गए, जबकि इससे पिछले सप्ताह यह संख्या 219 थी। कंजंक्टिवाइटिस के मामलों में भी तेज वृद्धि दर्ज हुई।


इंडोनेशिया में भी स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। देश के उप स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार जुलाई और अगस्त में करीब 13,500 लोगों का श्वसन संक्रमण के लिए इलाज किया गया। बोर्नियो और सुमात्रा में लगभग 55 लाख लोग धुएं के सीधे संपर्क में आए हैं।


स्कूल और सार्वजनिक गतिविधियां प्रभावित


सरावाक में खराब हवा के कारण स्कूल और बाहरी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।


20 और 21 अगस्त को कुचिंग और आसपास के इलाकों में करीब 600 स्कूल बंद किए गए थे। इससे लगभग 2 लाख प्राथमिक और माध्यमिक छात्र प्रभावित हुए। 28 अगस्त को सरावाक के 30 और स्कूल बंद किए गए, जिससे 4,000 से अधिक बच्चे प्रभावित हुए।


बाहरी खेल गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। प्रशासन लोगों से प्रदूषित हवा में बाहर निकलने से बचने की अपील कर रहा है।


सरावाक में क्लाउड सीडिंग की तैयारी


स्थिति बिगड़ने के बाद सरावाक सरकार ने क्लाउड सीडिंग की तैयारी शुरू की है।


अधिकारियों के मुताबिक मौसम और वातावरण अनुकूल रहने पर 3 से 5 सितंबर के बीच क्लाउड सीडिंग की जा सकती है। इसका मकसद बारिश के जरिए धुएं और आग की स्थिति को कम करने में मदद करना है।


सरावाक में स्थानीय प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि एपीआई 500 से ऊपर पहुंचता है, तो स्थानीय स्तर पर आपात स्थिति घोषित की जा सकती है।


इंडोनेशिया में आग कितनी बड़ी है?


इंडोनेशिया में इस साल जंगल और भूमि की आग ने बड़ा इलाका प्रभावित किया है।


रॉयटर्स के अनुसार, जनवरी से जुलाई के बीच बोर्नियो और सुमात्रा में 2 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ। अकेले जुलाई में करीब 95,000 हेक्टेयर क्षेत्र जला, जो कई दशकों में किसी एक महीने का सबसे बड़ा नुकसान बताया गया है।


अगस्त में इंडोनेशिया में 9,000 से अधिक हॉटस्पॉट दर्ज किए गए। यह संख्या अगस्त 2015 में दर्ज 5,077 हॉटस्पॉट से अधिक है।


एल नीनो ने मुश्किल बढ़ाई


इंडोनेशिया इस समय मजबूत एल नीनो परिस्थितियों का सामना कर रहा है। इससे गर्मी और सूखे की स्थिति बढ़ती है, जिससे जंगल और पीटलैंड अधिक आसानी से आग पकड़ सकते हैं।


इंडोनेशिया के वानिकी मंत्री राजा जुली एंटोनी ने कहा है कि सितंबर में एल नीनो के चरम पर पहुंचने की आशंका है, जिससे आग पर नियंत्रण मुश्किल हो सकता है। उन्होंने आग की तबाही को बड़े पैमाने पर मानव-जनित भी बताया।


यहां वैज्ञानिक और प्रशासनिक नजरिया अलग-अलग कारकों को जोड़कर देखा जाना चाहिए। मौसम आग को फैलने के लिए अनुकूल बनाता है, जबकि भूमि उपयोग और आग लगाने जैसी मानवीय गतिविधियां भी अहम भूमिका निभाती हैं।


यह 2015 जैसी स्थिति है?


मौजूदा संकट की तुलना 2015 से की जा रही है। अल जज़ीरा के मुताबिक, यह क्षेत्र 2015 के बाद सबसे गंभीर धुंध संकट का सामना कर रहा है। उस साल इंडोनेशिया की आग से करोड़ों लोग प्रभावित हुए थे और 5 लाख से अधिक लोगों में श्वसन संबंधी समस्याएं दर्ज हुई थीं।


हालांकि मौजूदा स्थिति को 2015 की हूबहू पुनरावृत्ति कहना अभी जल्दबाजी होगी। आग, मौसम और हवा की दिशा तेजी से बदल सकती है।


बोर्नियो में संकट सिर्फ एक देश का नहीं


इस संकट की सबसे अहम बात इसका सीमा पार असर है।


आग इंडोनेशिया में लगी है, लेकिन उसका धुआं मलेशिया और ब्रुनेई तक पहुंच रहा है। आसियान ने दक्षिणी क्षेत्र के लिए ट्रांसबाउंड्री हेज अलर्ट का उच्चतम स्तर यानी लेवल 3 सक्रिय किया है।


यानी यह केवल इंडोनेशिया की जंगल की आग नहीं रह गई है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया का क्षेत्रीय पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।


आगे क्या होगा?


अगले कुछ दिनों में स्थिति मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करेगी।


पहला, इंडोनेशिया में आग पर कितना नियंत्रण होता है।


दूसरा, हवा किस दिशा में चलती है और धुआं मलेशिया की ओर कितना पहुंचता है।


तीसरा, बारिश होती है या नहीं। सरावाक में प्रस्तावित क्लाउड सीडिंग भी इसी उम्मीद से जुड़ी है।


फिलहाल सरावाक के कई इलाकों में हवा खतरनाक स्तर पर है और सीमा पार धुंध का असर जारी है। इसलिए इस संकट को केवल “धुएं की समस्या” समझना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्कूलों, परिवहन और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी सीधा असर जुड़ा है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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