हमास ने फ़िलिस्तीनियों से चुनावी रजिस्ट्रेशन की अपील की
फ़िलिस्तीन चुनाव से पहले हमास की बड़ी अपील
28 नवंबर के चुनाव से पहले हमास ने तेज़ किया सियासी रुख
हमास ने फ़िलिस्तीनियों से आगामी विधायी चुनावों के लिए मतदाता सूची में जल्द रजिस्ट्रेशन और अपनी जानकारी अपडेट करने की अपील की है। फ़िलिस्तीन सेंट्रल इलेक्शंस कमीशन के मुताबिक विधायी चुनाव 28 नवंबर को प्रस्तावित हैं और वेस्ट बैंक में रजिस्ट्रेशन 15 से 19 अगस्त तक होना है।
ग़ज़ा | 12 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
फ़िलिस्तीनी सियासत में चुनावी प्रक्रिया की तैयारी के बीच हमास ने फ़िलिस्तीनियों से मतदाता सूची में जल्द रजिस्ट्रेशन कराने और अपनी जानकारी अपडेट करने की अपील की है। हमास ने कहा कि चुनावी रजिस्टर में दर्ज होना राजनीतिक भागीदारी और अपने प्रतिनिधियों को चुनने के अधिकार के इस्तेमाल की बुनियादी शुरुआत है।
हमास ने अपनी अपील में विधायी परिषद और फ़िलिस्तीनी नेशनल काउंसिल समेत आधिकारिक संस्थानों के लिए प्रतिनिधियों के चुनाव में भागीदारी पर ज़ोर दिया। संगठन के मुताबिक व्यापक राष्ट्रीय भागीदारी फ़िलिस्तीनी संस्थानों की वैधता और जनता की राजनीतिक भूमिका को मजबूत करने के लिए अहम है।
फ़िलिस्तीन सेंट्रल इलेक्शंस कमीशन के मुताबिक 2026 के विधायी चुनाव 28 नवंबर को निर्धारित हैं। वेस्ट बैंक में मतदाता रजिस्ट्रेशन केंद्र 15 अगस्त की सुबह खुलेंगे और 19 अगस्त की शाम बंद होंगे।
इसके बाद उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया 26 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलेगी। चुनाव प्रचार 6 नवंबर से शुरू होकर 26 नवंबर तक चलेगा, जबकि 27 नवंबर को चुनावी ख़ामोशी यानी electoral blackout रहेगा। आम मतदाताओं के लिए मतदान 28 नवंबर को होगा।
इस लिहाज़ से हमास की अपील रजिस्ट्रेशन के अहम चरण से कुछ दिन पहले आई है।
प्रस्तावित चुनाव फ़िलिस्तीनी सियासत में लंबे अंतराल के बाद होने जा रहे हैं। आख़िरी विधायी चुनाव 2006 में हुए थे, जिनमें हमास ने अप्रत्याशित जीत हासिल की थी। इसके बाद फ़तह और हमास के बीच सियासी और प्रशासनिक विभाजन गहरा गया और 2007 में हमास ने ग़ज़ा पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।
जुलाई 2026 में राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने 28 नवंबर को विधायी चुनाव कराने की तारीख़ घोषित की थी। प्रस्तावित मतदान में वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और ग़ज़ा को शामिल करने की योजना बताई गई थी।
इसलिए मौजूदा चुनावी प्रक्रिया सिर्फ़ प्रतिनिधियों के चुनाव तक सीमित नहीं है। इसका सीधा ताल्लुक़ लंबे समय से चले आ रहे फ़िलिस्तीनी सियासी विभाजन और संस्थागत वैधता से भी है।
हमास का ताज़ा बयान चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी के समर्थन का संकेत देता है। संगठन ने कहा कि मौजूदा हालात में राष्ट्रीय भागीदारी बढ़ाने, फ़िलिस्तीनी एकता मजबूत करने और ऐसी संस्थाओं के निर्माण की ज़रूरत है जिनकी वैधता जनता की इच्छा से आती हो।
हालांकि, केवल रजिस्ट्रेशन की अपील को हमास की चुनावी रणनीति या उम्मीदवारों की अंतिम योजना के बराबर नहीं माना जा सकता। उपलब्ध बयान में संगठन ने मतदाता भागीदारी और राजनीतिक संस्थाओं की वैधता पर ज़ोर दिया है।
इसलिए मौजूदा चरण में सबसे स्पष्ट संदेश चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी का है।
फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने जून 2026 में सामान्य चुनाव कानून में संशोधन किया था। संशोधन के तहत फ़िलिस्तीनी विधायी परिषद की सीटों की संख्या 200 की गई और उम्मीदवार बनने की न्यूनतम उम्र 28 से घटाकर 23 वर्ष की गई। चुनावी सूचियों में महिलाओं की नुमाइंदगी बढ़ाने के लिए भी प्रावधान जोड़े गए।
सेंट्रल इलेक्शंस कमीशन के मुताबिक प्रत्येक चुनावी सूची में कम से कम 20 उम्मीदवार होने चाहिए और हर तीन उम्मीदवारों में कम से कम एक महिला शामिल करने का प्रावधान किया गया है।
इन बदलावों का मकसद चुनावी प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ाना बताया गया है। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया की वास्तविक सियासी दिशा मतदान और उम्मीदवारों की भागीदारी के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।
यही चुनावी प्रक्रिया का सबसे जटिल सवाल है। राष्ट्रपति अब्बास की घोषणा के मुताबिक चुनाव का दायरा फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों, जिसमें ग़ज़ा भी शामिल है, तक रखा गया है।
लेकिन ग़ज़ा में युद्ध से भारी तबाही और बड़े पैमाने पर विस्थापन के कारण मतदान की लॉजिस्टिक्स चुनौतीपूर्ण हैं। अल जज़ीरा ने रिपोर्ट किया है कि ग़ज़ा में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और आबादी के बड़े हिस्से के विस्थापन ने चुनावी व्यवस्था को मुश्किल बनाया है।
इसलिए चुनाव की तारीख़ तय होना और सभी इलाकों में उसका व्यावहारिक तौर पर सफल आयोजन होना दो अलग-अलग सवाल हैं।
पूर्वी यरुशलम में फ़िलिस्तीनियों की वोटिंग चुनावी प्रक्रिया की दूसरी बड़ी चुनौती है। अल जज़ीरा के मुताबिक 2021 में प्रस्तावित फ़िलिस्तीनी विधायी और राष्ट्रपति चुनाव उस समय रद्द कर दिए गए थे जब पूर्वी यरुशलम में मतदान की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी।
इस बार भी चुनाव प्रक्रिया के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण रहेगा कि सभी निर्धारित क्षेत्रों में मतदान किस तरह कराया जाएगा।
यानी रजिस्ट्रेशन शुरू होना चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि 28 नवंबर को हर क्षेत्र में मतदान बिना रुकावट होगा।
अगर चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक होते हैं, तो यह लंबे समय बाद फ़िलिस्तीनी राजनीतिक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व के नए चरण की शुरुआत होगी। 2006 के बाद से विधायी स्तर पर चुनाव न होने के कारण राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संस्थागत वैधता लगातार विवाद का विषय रहे हैं।
हमास की मौजूदा अपील इस प्रक्रिया में संगठन की सार्वजनिक राजनीतिक मौजूदगी को भी रेखांकित करती है। दूसरी ओर फ़तह और फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी के लिए चुनावी प्रक्रिया संस्थागत वैधता और राजनीतिक पुनर्गठन की परीक्षा होगी।
अगर दोनों प्रमुख फ़िलिस्तीनी धड़े चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं, तो इसका असर लंबे समय से चले आ रहे विभाजन पर भी पड़ सकता है। लेकिन यह अभी एक संभावित सियासी असर है, स्थापित परिणाम नहीं।
सबसे पहले 15 से 19 अगस्त के बीच वेस्ट बैंक में मतदाता रजिस्ट्रेशन का चरण पूरा होगा। इसके बाद मतदाता सूची प्रकाशित करने और आपत्तियों की प्रक्रिया आएगी। सितंबर के अंत में उम्मीदवारों के नामांकन की शुरुआत होगी।
28 नवंबर की तारीख़ तक कई अहम सवालों का जवाब मिलना बाकी है। इनमें ग़ज़ा में मतदान की व्यावहारिक व्यवस्था, पूर्वी यरुशलम में मतदान और सभी राजनीतिक पक्षों की भागीदारी शामिल है।
इसलिए फिलहाल हमास की अपील को चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सियासी संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन चुनाव के अंतिम स्वरूप और भागीदारी पर फैसला आने वाले हफ्तों में ज्यादा स्पष्ट होगा।
हमास ने फ़िलिस्तीनियों से आगामी विधायी चुनावों के लिए मतदाता सूची में रजिस्ट्रेशन और जानकारी अपडेट करने की अपील की है। संगठन ने इसे राजनीतिक भागीदारी, प्रतिनिधित्व और फ़िलिस्तीनी संस्थाओं की वैधता से जोड़ा है।
सेंट्रल इलेक्शंस कमीशन के कार्यक्रम के मुताबिक वेस्ट बैंक में रजिस्ट्रेशन 15 अगस्त से 19 अगस्त तक होगा और आम मतदान 28 नवंबर को निर्धारित है।
लेकिन चुनावी प्रक्रिया के सामने ग़ज़ा की ज़मीनी स्थिति, पूर्वी यरुशलम में मतदान और सभी इलाकों में चुनाव कराने की क्षमता जैसी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। इसलिए आने वाले हफ्ते फ़िलिस्तीनी सियासत के लिए बेहद अहम होंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।